वैश्विक मानकों के अनुरूप बनेगा दिल्ली का ई-वेस्ट ईको पार्क

पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने नॉर्वे के रेवैक ई-वेस्ट प्लांट के डिसमेंटलिंग, सेग्रीगेशन और मटेरियल रिकवरी सिस्टम को परखा ताकि इनका आकलन किया जा सके।

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नई दिल्ली: नॉर्वे के रेवैक प्लांट की तर्ज पर राष्ट्रीय राजधानी का ई-वेस्ट ईको पार्क बनेगा। दिल्ली सरकार के पर्यावरण व उद्योग मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने भारत के पहले प्रस्तावित ई-वेस्ट ईको पार्क के लिए वैश्विक मॉडल अपनाने की दिशा में अहम पहल करते हुए नॉर्वे के विश्व प्रसिद्ध रेवैक ई-वेस्ट प्रोसेसिंग प्लांट का निरीक्षण किया। यह दौरा दिल्ली सरकार की उस योजना का अहम हिस्सा है, जिसके तहत होलंबी कलां में भारत का पहला ई-वेस्ट ईको पार्क विकसित किया जाएगा। 

संयंत्र सालाना 51,000 मीट्रिक टन ई-वेस्ट प्रोसेस करेगा
यह पार्क लगभग 150 करोड़ रुपये की लागत से बनाया जाएगा और सालाना 51,000 मीट्रिक टन ई-वेस्ट को प्रोसेस करेगा। रेवैक को इसके उत्कृष्ट रिकॉर्ड, पर्यावरण-अनुकूल वेस्ट प्रबंधन और दिल्ली साइट से मिलते-जुलते भौगोलिक व ऑपरेशनल ढांचे के कारण मॉडल के रूप में चुना गया है।
नॉर्वे का रेवैक प्लांट प्रति वर्ष लगभग 1,10,000 मीट्रिक टन ई-वेस्ट का प्रोसेस करता है, जिससे यह यूरोप की सबसे बड़ी और अत्याधुनिक सुविधाओं में से एक है। यह प्लांट रीसाइक्लिंग, मटेरियल रिकवरी और प्रदूषण-मुक्त संचालन के लिए जाना जाता है। खास बात यह है कि रेवैक से तैयार रीसाइकल मटेरियल भारतीय निर्माताओं को भी निर्यात किया जाता है, जिससे एक सतत सीमा-पार सर्कुलर अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलता है।
मंत्री सिरसा ने दिल्ली में पर्यावरण और उद्योग के बीच संतुलन बनाए रखने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा हमारा लक्ष्य दिल्ली को सभी क्षेत्रों में उन्नत और फ्यूचर रेडी बनाना है, जहां स्वच्छ उद्योग आर्थिक विकास को बढ़ावा मिल सके और पर्यावरण सुरक्षित हो। उन्होंने यह भी कहा कि रेवैक का चयन सिर्फ इसकी वैश्विक साख के कारण नहीं, बल्कि इसलिए भी किया गया है क्योंकि इसका भू-भाग और जलवायु परिस्थितियां होलंबी कलां से मेल खाती हैं, जिससे स्थानीय कार्यान्वयन के लिए इसकी तकनीक और प्रथाएं बेहतर रूप से अपनाई जा सकेंगी।

ई-वेस्ट ईको पार्क पीपीपी मॉडल पर संचालित होगा
होलंबी कलां का ई-वेस्ट ईको पार्क पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप मॉडल पर संचालित होगा, जिसे दिल्ली स्टेट इंडस्ट्रियल एंड इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉरपोरेशन द्वारा संचालित किया जाएगा। यह पार्क ई-वेस्ट मैनेजमेंट नियम 2022 के अनुसार सभी 106 श्रेणियों के ई-वेस्ट को संभालने के लिए डिजाइन किया गया है। इससे 350 करोड़ रुपये से अधिक का राजस्व उत्पन्न होगा, हजारों ग्रीन जॉब्स पैदा होंगी और वर्तमान में असंगठित व खतरनाक ई-वेस्ट सेक्टर को औपचारिक रूप दिया जाएगा।

भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा ई-वेस्ट उत्पादक
भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा ई-वेस्ट उत्पादक है और दिल्ली का इसमें लगभग 9.5 प्रतिशत योगदान है। इस चुनौती को ध्यान में रखते हुए, दिल्ली सरकार विकसित भारत 2047 मिशन के तहत सतत शहरी इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश कर रही है, जो आर्थिक अवसरों को पर्यावरणीय जिम्मेदारी के साथ जोड़ता है।

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