नई दिल्ली: दिवाली के बाद दिल्ली की हवा फिर से खतरनाक स्तर तक खराब हो गई है। इस साल दिवाली के दौरान राजधानी में वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 488 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर तक पहुंच गया, जो विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा सुझाए गए सीमा से लगभग 100 गुना अधिक है। दिवाली से पहले हवा का स्तर अब के मुकाबले सुरक्षित था, लेकिन दिवाली की रात 675 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर तक पहुँचने वाला यह स्तर आंखों और श्वास प्रणाली के लिए अत्यंत खतरनाक माना जा रहा है।
सांस लेना हुआ 11 सिगरेट के बराबर
बर्कले अर्थ की रिपोर्ट के मुताबिक, इस समय दिल्ली की हवा इतनी प्रदूषित है कि इसमें सांस लेना, रोज़ाना करीब 11 सिगरेट पीने के बराबर है। परिणामस्वरूप दिल्ली दुनिया के सबसे प्रदूषित शहरों में पहले नंबर पर आ गई है। 22 अक्टूबर की सुबह भी राजधानी दिल्ली के ज्यादातर इलाकों में हवा की क्वालिटी बहुत खराब से गंभीर श्रेणी में रही।
ग्रीन पटाखों से भी नहीं मिली राहत
हालांकि इस साल सुप्रीम कोर्ट ने ‘ग्रीन’ पटाखों के इस्तेमाल की अनुमति दी थी और कृषि अपशिष्ट (स्टबल बर्निंग) में 77.5 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई थी, फिर भी राजधानी की हवा जहरीली धुंध में घिर गई। विशेषज्ञों का कहना है कि नियमों का पालन कम हुआ और रासायनिक धुएँ की तीखी गंध सुबह तक बनी रही।
AQI पिछले साल से भी बदतर
इस साल का AQI पिछले साल 328 और 2023 में 218 तथा 2022 में 312 से कहीं अधिक है। यानी लगातार बढ़ती वायु प्रदूषण समस्या ने दिल्लीवासियों के लिए सांस लेना मुश्किल बना दिया है।
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वायु प्रदूषण का खतरा
विशेषज्ञों का कहना है कि इतनी खराब हवा में सांस लेने से फेफड़ों और हृदय के रोगों का खतरा बढ़ जाता है। बच्चे, बुजुर्ग और उन लोगों को विशेष सतर्कता बरतनी चाहिए जिन्हें श्वसन संबंधी बीमारियां हैं। इस प्रदूषण से आँख में जलन, खासी और भी कई प्रकार की परेशानिया हो सकती हैं।



