पटना। बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में जहां भाजपा ने सर्वाधिक सवर्ण उम्मीदवारों पर भरोसा जताया है, वहीं आरजेडी ने मुस्लिम और यादव (MY) समीकरण बैठाने के साथ ही ‘बाप’ यानि बहुजन, अगड़ा (सवर्ण), आधी आबादी (महिलाएं) और पुअर (गरीब) वर्ग पर ध्यान केंद्रित करने की कोशिश की है।
वहीं जदयू ने पिछड़ा वर्ग के उम्मीदवारों को ज्यादा तवज्जो दी है। एक तरफ जहां एनडीए ने सिर्फ पांच मुस्लिमों को टिकट दिया है, वहीं महागठबंधन ने 30 मुस्लिमों को टिकट देकर उन पर भरोसा जताया है। इसके साथ ही महागठबंधन ने सर्वाधिक 67 यादवों को टिकट देकर उपकृत किया है।
तेजस्वी ने यादव समाज को दिया तवज्जो
पिछले विधानसभा चुनावों और लोकसभा चुनाव के अनुभव से तेजस्वी यह जान चुके हैं कि केवल यादव और मुस्लिम वोटों के भरोसे सत्ता में नहीं आ सकते हैं। इस कारण इस बार तेजस्वी कभी ‘ए टू जेड’ तो कभी ‘BAAP’ (यानि बहुजन, अगड़ा यानी सवर्ण, आधी आबादी यानी महिलाएं, पुअर यानी गरीब वर्ग) का नारा देते आ रहे हैं।
आधे सीटों पर मुस्लिम और यादव
बिहार विधानसभा चुनाव में राजद ने अपने 143 उम्मीदवारों की सूची जारी कर दी है। इसमें साफ है कि भले ही ‘ए टू जेड’ का नारा तेजस्वी ने दिया हो, लेकिन मुस्लिम और यादव को तवज्जो देने से उन्होंने परहेज नहीं किया। राजद ने 52 यादव उम्मीदवार और 18 मुस्लिम प्रत्याशी मैदान में उतारे हैं। पिछली बार भी पार्टी ने 18 मुस्लिमों को टिकट दिया था, जिनमें से 8 ने जीत दर्ज की थी। इस तरह राजद ने सत्तर सीटों, यानि लगभग आधे उम्मीदवारों को अपने पुराने समीकरण MY (मुस्लिम-यादव) को टिकट दिया है।
आरजेडी की सूची में 16 अगड़ी जाति के
आरजेडी की सूची में 16 अगड़ी जाति के उम्मीदवार हैं। इसमें 7 राजपूत, 6 भूमिहार और 3 ब्राह्मण शामिल हैं। इसके अलावा तेजस्वी यादव ने 24 महिलाओं को भी टिकट दिया है। यह किसी भी पार्टी में सबसे ज्यादा है। पार्टी ने 13 कुशवाहा उम्मीदवारों को टिकट दिया है। माना जा रहा है कि लोकसभा चुनाव 2024 में कुशवाहा वोटरों के एक हिस्से ने इंडिया गठबंधन को समर्थन दिया था और पार्टी उसी रुझान को बरकरार रखना चाहती है।
राजद ने 21 उम्मीदवार अति पिछड़ी जाति के उतारे
राजद ने इस बार 21 उम्मीदवार अति पिछड़ी जातियों से उतारे हैं। इनमें बीमा भारती, अजय डांगी, अनीता देवी, भरत भूषण मंडल, अरविंद सहनी, देव चौरसिया और विपिन नोनिया जैसे नाम शामिल हैं। आरजेडी ने हाल ही में मंगनीलाल मंडल को प्रदेश अध्यक्ष बनाकर भी संदेश दिया कि पार्टी अब अत्यंत पिछड़ों के 36 प्रतिशत वोट बैंक को अपने साथ जोड़ना चाहती है। यह बिहार की राजनीति में एक नई सामाजिक रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है।
20 अनुसूचित जाति के
आरजेडी ने इस बार 21 सुरक्षित सीटों पर उम्मीदवार उतारे हैं, जिनमें 20 अनुसूचित जाति और 1 अनुसूचित जनजाति की सीट शामिल है। अनुसूचित जाति वर्ग में रविदास, पासवान और पासी समुदायों को सबसे अधिक प्रतिनिधित्व दिया गया है।
कांग्रेस के आधे उम्मीदवार सवर्ण, उसमें भी आठ भूमिहार
वहीं कांग्रेस ने अपने 61 उम्मीदवारों में सर्वाधिक सवर्णों को तवज्जो दिया है। इसमें आठ भूमिहार, पांच राजपूत, सात ब्राह्मण, एक कायस्थ को टिकट दिया है। इसके साथ ही 10 मुसलमानों को टिकट कांग्रेस द्वारा दिया गया है। पांच यादव, चार कुर्मी-कुशवाहा, छह ईबीसी (अत्यंत पिछड़ा वर्ग), तीन वैश्य तो 12 दलित चुनाव मैदान में हैं।
वाम दलों की सूची में सर्वाधिक यादव व दलित
वाम दल 33 सीटों पर चुनाव लड़ रहे हैं। इनमें सर्वाधिक दलित और यादव नौ-नौ उम्मीदवार हैं। सात कुर्मी-कुशवाहा, दो वैश्य और तीन सवर्णों को टिकट दिया है। वीआईपी ने 15 सीटों पर टिकट दिए हैं। इसमें आठ उम्मीदवार ईबीसी, तीन यादव, एक कुर्मी, दो सवर्ण और एक दलित चुनावी मैदान में हैं।
एनडीए में हर तीसरा उम्मीदवार सवर्ण
एनडीए ने 10.56 प्रतिशत आबादी वाले सवर्णों को 35 प्रतिशत टिकट दिया है, यानि हर तीसरा प्रत्याशी सवर्ण है। इस गठबंधन से 85 उम्मीदवार सवर्ण हैं। इसमें भी राजपूत समाज के 37 प्रत्याशी के साथ सबसे ज्यादा है। वहीं भूमिहार प्रत्याशी 32 और ब्राह्मण उम्मीदवारों की संख्या 14 व दो कायस्थ समाज के हैं।
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एनडीए ने राजपूतों को दिया तवज्जो
एनडीए में 37 राजपूत, 23 कुशवाहा (कोईरी), 32 भूमिहार (जिनकी आबादी 2.86 प्रतिशत है) को टिकट दिया गया है। राजपूतों की आबादी 3.45 प्रतिशत है, कुशवाहा-कोईरी की आबादी 4.21 प्रतिशत है। ब्राह्मणों की आबादी 3.65 प्रतिशत यानि राजपूतों से ज्यादा है, लेकिन उन्हें 14 सीट मिली है।
भूमिहारों का भी बढ़ा महत्व
सवर्णों को टिकट देने में भाजपा सबसे आगे है। 101 में से 49 उम्मीदवार इन्हीं चार (सवर्ण) जातियों से हैं। जेडीयू ने 22, लोजपा (आर) ने 10, हम और रालोमो ने 2-2 अगड़ी जाति के उम्मीदवारों को टिकट दिया है। राजपूत समाज के प्रत्याशियों में भाजपा ने 21, जेडीयू ने 10, लोजपा (आर) ने पांच और रालोमो ने एक उम्मीदवार उतारा है। हम ने अपने कोटे में दो भूमिहार चाचा-भतीजा को उतारा है।



