नई दिल्ली: दिल्ली सरकार के शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने बृहस्पतिवार को रोहिणी स्थित एक सरकारी स्कूल में आयोजित जॉब फेयर का दौरा किया और इसे “सिर्फ प्लेसमेंट का मौका नहीं, बल्कि शिक्षा में बदलाव की झलक” बताया। उन्होंने कहा कि यह आयोजन राजधानी में वोकेशनल (व्यावसायिक) शिक्षा के बढ़ते महत्व को दर्शाता है।
शिक्षा के क्षेत्र में पांच वर्षों की बड़ी योजना
शिक्षा मंत्री ने कहा कि सरकार अगले पांच वर्षों में दिल्ली के सरकारी स्कूलों को निजी स्कूलों के स्तर तक लाने के लिए ठोस कदम उठाएगी। इसके तहत स्कूलों के इन्फ्रास्ट्रक्चर में सुधार, सीखने के परिणामों को बेहतर बनाना और छात्रों को तकनीक तथा करियर के समान अवसर देना शामिल है।
30 से अधिक कंपनियों ने लिया भाग
इस जॉब फेयर में एचसीएल, हल्दीराम, सिटीकार्ट, नवगुरुकुल और टेक महिंद्रा जैसी 30 से अधिक कंपनियों ने हिस्सा लिया। उन्होंने कक्षा 12वीं के वोकेशनल प्रशिक्षण प्राप्त छात्रों को रोजगार के अवसर दिए। कार्यक्रम में शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारी, स्थानीय विधायक राजकुमार चौहान, छात्र-छात्राएं और उनके अभिभावक भी मौजूद रहे।
छात्रों से सीधा संवाद
सूद ने कंपनियों के प्रतिनिधियों से चयन प्रक्रिया, वेतन और अन्य लाभों को लेकर बातचीत की। इसके साथ ही उन्होंने छात्रों से बातचीत कर उन्हें समाज के निर्माण में भूमिका निभाने और कार्यक्षेत्र से जुड़ने के लिए प्रेरित किया।
लाखो छात्रों ने चुनी वोकेशनल शिक्षा
शिक्षा मंत्री ने जानकारी दी कि पिछले शैक्षणिक सत्र में दिल्ली सरकार के स्कूलों में 4.2 लाख से अधिक छात्रों ने विभिन्न ट्रेड्स में वोकेशनल शिक्षा को चुना। यह पहल राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के उद्देश्यों के अनुरूप है, जिसमें अकादमिक और व्यावसायिक शिक्षा का एकीकरण किया गया है।
निष्कर्ष
दिल्ली सरकार की यह पहल न केवल रोजगार के अवसर बढ़ाने में मदद करेगी, बल्कि सरकारी स्कूलों में पढ़ रहे छात्रों को भविष्य के लिए व्यावसायिक रूप से सक्षम भी बनाएगी। अगले पांच वर्षों में होने वाले बदलाव शिक्षा व्यवस्था में एक बड़ा बदलाव लाने की दिशा में मील का पत्थर साबित हो सकते हैं।



