नई दिल्ली। राजधानी में बढ़ते प्रदूषण पर लगाम लगाने के लिए सरकार ने अब तक का सबसे बड़ा कदम उठाया है। दिल्ली में अब पेट्रोल और डीजल वाहनों का दौर धीरे-धीरे खत्म होने जा रहा है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने सूबे की नई इलेक्ट्रिक व्हीकल पॉलिसी (Delhi EV Policy) का एलान किया है, जो कल यानी 1 जुलाई 2026 से प्रभावी हो जाएगी। 15,000 करोड़ रुपये के भारी-भरकम बजट वाली रेखा सरकार की यह महत्वाकांक्षी नीति आगामी 31 मार्च 2030 तक लागू रहेगी।
सरकार का लक्ष्य केवल इलेक्ट्रिक गाड़ियों को बढ़ावा देना नहीं, बल्कि अगले चार वर्षों में दिल्ली के पूरे पब्लिक और प्राइवेट ट्रांसपोर्ट सिस्टम का कायाकल्प करना है। एक अध्ययन के मुताबिक, दिल्ली में वाहनों से होने वाले कुल प्रदूषण में 33 प्रतिशत हिस्सेदारी कमर्शियल वाहनों की, जबकि 46 प्रतिशत हिस्सेदारी टू-व्हीलर और थ्री-व्हीलर सेगमेंट की है। यही वजह है कि नई नीति में इन सेक्टर्स पर सबसे कड़े फैसले लिए गए हैं।
मौजूदा पेट्रोल-डीजल और CNG गाड़ियों का क्या होगा?
पॉलिसी लागू होने के बाद आम जनता के मन में सबसे बड़ा सवाल यही है कि उनकी पुरानी गाड़ियों का क्या होगा। सरकार ने स्पष्ट किया है कि नई नीति का फोकस मुख्य रूप से ‘नए वाहनों के रजिस्ट्रेशन’ पर है। दिल्ली में पहले से चल रहे वैध पेट्रोल, डीजल और CNG वाहनों को तुरंत बंद नहीं किया जाएगा। लोग अपनी मौजूदा गाड़ियों को तय नियमों के तहत चला सकेंगे। हालांकि, जैसे-जैसे ये वाहन अपनी निर्धारित आयु पूरी करेंगे, इन्हें हटाकर इलेक्ट्रिक वाहन अपनाने के लिए मालिकों को प्रोत्साहित किया जाएगा।
टू-व्हीलर सेगमेंट: 1 अप्रैल 2028 से नया पेट्रोल वाहन नहीं
दिल्ली में कुल वाहनों का लगभग दो-तिहाई हिस्सा दोपहिया वाहनों का है। नई नीति के तहत 1 अप्रैल 2028 के बाद दिल्ली में किसी भी नई पेट्रोल या CNG मोटरसाइकिल और स्कूटर का रजिस्ट्रेशन पूरी तरह प्रतिबंधित हो जाएगा। इसके बाद उपभोक्ताओं के पास केवल इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर खरीदने का ही विकल्प बचेगा। इस बदलाव को रफ्तार देने के लिए सरकार प्योर इलेक्ट्रिक वाहनों की खरीद पर 100% रजिस्ट्रेशन फीस और रोड-टैक्स माफ करेगी।
ऑटो रिक्शा: 1 जनवरी 2027 से सिर्फ इलेक्ट्रिक का विकल्प
राजधानी की सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था में अहम भूमिका निभाने वाले ऑटो रिक्शा को लेकर भी बड़ा बदलाव किया गया है। 1 जनवरी 2027 से दिल्ली में नए पेट्रोल, डीजल और CNG ऑटो रिक्शा का रजिस्ट्रेशन पूरी तरह बंद कर दिया जाएगा। इसके बाद केवल इलेक्ट्रिक ऑटो ही रजिस्टर्ड होंगे। पुराने ऑटो परमिट खत्म होने तक सड़कों पर चल सकेंगे, लेकिन नया वाहन लेते समय चालकों को अनिवार्य रूप से ई-ऑटो ही चुनना होगा, जिसके लिए सरकार वित्तीय सब्सिडी भी देगी।
स्कूल बसों के लिए रोडमैप तय
नई ईवी नीति में दिल्ली के स्कूलों के लिए चरणबद्ध तरीके से कड़े नियम लागू किए गए हैं। इसके तहत सभी स्कूलों को (चाहे बसें अपनी हों या किराए पर ली गई हों) अपने बस बेड़े को निर्धारित समय में इलेक्ट्रिक में कन्वर्ट करना होगा। अगले 2 वर्ष में कुल बस बेड़े का 10 प्रतिशत हिस्सा EV करना अनिवार्य। अगले 3 वर्ष में 20 प्रतिशत बसों को इलेक्ट्रिक में बदलना होगा। 31 मार्च 2030 तक स्कूल की 30 प्रतिशत बसों का इलेक्ट्रिक होना अनिवार्य होगा।
गाड़ी स्क्रैप करने पर ₹1 लाख तक का इंसेंटिव
पुरानी और प्रदूषण फैलाने वाली गाड़ियों को सड़कों से हटाने के लिए सरकार ने आकर्षक स्क्रैपिंग इंसेंटिव की घोषणा की है। यदि कोई व्यक्ति अपनी पुरानी BS-IV या उससे पुरानी गाड़ी को सरकार के अधिकृत स्क्रैपिंग सेंटर में जमा करके नया इलेक्ट्रिक वाहन खरीदता है, तो उसे विशेष छूट मिलेगी। कारों की स्क्रैपिंग पर यह लाभ 1 लाख रुपये तक तय किया गया है, जबकि टू-व्हीलर, ऑटो और छोटे कमर्शियल वाहनों के लिए भी अलग-अलग प्रोत्साहन राशि तय की गई है।



