दिल्ली में गंदे पानी की समस्या से निपटने के लिए दिल्ली जल बोर्ड (डीजेबी) ने बड़े पैमाने पर सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) और डिसेंट्रलाइज्ड एसटीपी (डीएसटीपी) बनाने की योजना बनाई है।
एनजीटी के 14 अक्टूबर 2025 के आदेश के बाद सौंपी गई रिपोर्ट में डीजेबी ने स्पष्ट समयसीमा बताई है। शुरू में 56 डीएसटीपी बनाने का प्लान था, लेकिन जमीन की कमी और तकनीकी जांच के बाद इसे 34 पर लाया गया है। इससे इलाज की क्षमता कम नहीं हुई, बल्कि बेहतर तरीके से काम होगा।
रिपोर्ट में कहा गया है कि 34 में से 33 डीएसटीपी के लिए टेंडर जारी हो चुके हैं। इनमें से कुछ की वित्तीय बोलियां खुल चुकी हैं, कुछ की तकनीकी जांच चल रही है। तीन बड़े एसटीपी – ताजपुर पहाड़ी, फतेहपुर बेरी और घिटोरनी – विशेष रूप से अनधिकृत कॉलोनियों, वन क्षेत्रों, अमीर कॉलोनियों और ओ-जोन इलाकों के लिए बनाए जा रहे हैं।
इन इलाकों में सीवर नेटवर्क बिछाने के लिए वन विभाग और डीडीए से एनओसी की जरूरत है, जिस पर काम चल रहा है। डीजेबी ने वादा किया है कि सभी प्लांट 31 दिसंबर 2028 तक चालू हो जाएंगे।
यह योजना सीवरेज मास्टर प्लान-2031 और 2043 तक की जरूरतों के आधार पर बनी है। डीजेबी का कहना है कि इससे भूमि का बेहतर उपयोग होगा, इलाज की क्षमता बढ़ेगी और पर्यावरण सुरक्षित रहेगा।
रिपोर्ट में मुख्य अभियंता पवन कुमार ने हलफनामा दिया कि वे डीडीए, वन विभाग और अन्य एजेंसियों से जमीन के लिए बात कर रहे हैं। अगर सब ठीक रहा, तो अनधिकृत इलाकों का गंदा पानी भी शुद्ध होकर इस्तेमाल होगा।
एनजीटी के मामले में यह रिपोर्ट महत्वपूर्ण है, क्योंकि दिल्ली में गंदा पानी स्टॉर्म ड्रेन में गिरने से यमुना प्रदूषित हो रही है। डीजेबी ने कहा कि वे पर्यावरण संरक्षण के लिए प्रतिबद्ध हैं और आगे की प्रगति रिपोर्ट देंगे।
पर्यावरण विशेषज्ञों ने इस कदम की सराहना की है, लेकिन समय पर पूरा होने पर जोर दिया है। दिल्लीवासियों के लिए यह अच्छी खबर है, क्योंकि इससे शहर साफ-सुथरा बनेगा।



