इस साल 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस परेड में खासा रंग-बिरंगा नजारा देखने को मिलेगा। कार्तव्य पथ पर कुल 30 टेब्लो (झांकियां) निकलेंगीं। ये टेब्लो भारत की सांस्कृतिक धरोहर, विकास की कहानी और आत्मनिर्भरता को दर्शाएंगी। मुख्य थीम ‘स्वतंत्रता का मंत्र – वंदे मातरम’ और ‘समृद्धि का मंत्र – आत्मनिर्भर भारत’ है। इस साल ‘वंदे मातरम’ गीत के 150 साल पूरे होने पर भी विशेष जोर है।
राज्यों की झांकियां दिखाएंगी अपनी खासियत
कुल 17 टेब्लो अलग-अलग राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के होंगे। असम अपनी आशिराकांडी क्राफ्ट विलेज को दिखाएगा। गुजरात और छत्तीसगढ़ ‘वंदे मातरम’ थीम पर आधारित होंगे। महाराष्ट्र गणेशोत्सव को आत्मनिर्भरता का प्रतीक बताएगा। पश्चिम बंगाल अपनी स्वतंत्रता संग्राम में भूमिका दिखाएगा। ओडिशा ‘सॉइल टू सिलिकॉन’ (मिट्टी से सिलिकॉन तक) की यात्रा दिखाएगा। तमिलनाडु इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) हब बनने की कहानी पेश करेगा। केरल अपना वॉटर मेट्रो और 100 प्रतिशत डिजिटल गवर्नेंस दिखाएगा। नगालैंड हॉर्नबिल फेस्टिवल के जरिए संस्कृति, पर्यटन और आत्मनिर्भरता पर फोकस करेगा।
केंद्र के विभाग भी दिखाएंगे अपनी उपलब्धियां
13 टेब्लो विभिन्न मंत्रालयों, विभागों और सेवाओं के होंगे। संस्कृति मंत्रालय का टेब्लो ‘वंदे मातरम: द सोल-क्राय ऑफ ए नेशन’ मुख्य थीम को मजबूती देगा। मिलिट्री अफेयर्स विभाग का ट्राई-सर्विसेज टेब्लो ‘ऑपरेशन सिंदूर’ पर होगा, जो सेनाओं की एकजुटता दिखाएगा। हाउसिंग एंड अर्बन अफेयर्स मंत्रालय ‘वंदे मातरम’ के 150 साल पर फ्लोरल टेब्लो लाएगा।
सांस्कृतिक कार्यक्रम और विशेष अतिथि
परेड में लगभग 2,500 कलाकार सांस्कृतिक कार्यक्रम पेश करेंगे। इससे पूरा आयोजन और भी जीवंत और रंगीन बनेगा। इस बार गणतंत्र दिवस परेड के मुख्य अतिथि यूरोपियन काउंसिल के प्रेसिडेंट एंटोनियो कोस्टा और यूरोपियन कमीशन की प्रेसिडेंट उर्सुला वॉन डेर लेयेन होंगी।



