नई दिल्ली। दिल्ली के एलजी तरनजीत संधू ने राजधानी के भविष्य को लेकर एक व्यापक दृष्टिकोण प्रस्तुत करते हुए कहा कि दिल्ली का विकास केवल ऊंची इमारतों और बड़े बुनियादी ढांचे से नहीं, बल्कि पर्यावरणीय संतुलन, बेहतर जीवन गुणवत्ता और टिकाऊ शहरी विकास से तय होगा। उन्होंने उद्योग जगत के प्रतिनिधियों के साथ आयोजित एक बैठक में कहा कि दिल्ली को विकसित भारत 2047 के लक्ष्य के अनुरूप एक आदर्श और टिकाऊ महानगर के रूप में विकसित करना होगा।
दिल्ली की अमूल्य धरोहर
एलजी ने बताया कि भविष्य के वैश्विक शहरों की पहचान इस बात से होगी कि वे विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच कितना संतुलन स्थापित कर पाते हैं। उन्होंने यमुना के बाढ़क्षेत्र, ग्रीन बेल्ट, रिज क्षेत्र और जैव विविधता वाले इलाकों को दिल्ली की अमूल्य धरोहर बताते हुए इनके संरक्षण और पुनर्जीवन पर विशेष जोर दिया।
101 जलाशयों का पुनर्जीवन
उन्होंने बताया कि दिल्ली सरकार द्वारा चलाए जा रहे जल संचय अभियान के तहत पहले चरण में 101 जलाशयों के पुनर्जीवन का कार्य किया जा रहा है। इसके साथ ही बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण, सार्वजनिक पार्कों के विकास और पारिस्थितिकी तंत्र के संरक्षण की दिशा में भी काम किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि हरित दिल्ली केवल पर्यावरणीय लक्ष्य नहीं, बल्कि बढ़ती गर्मी, जलवायु परिवर्तन और सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौतियों से निपटने की आवश्यकता है।
एलजी ने राजधानी के लिए एक भविष्य उन्मुख विकास रोडमैप भी प्रस्तुत किया। इसके तहत नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा देने, रूफटॉप सोलर परियोजनाओं के विस्तार, इलेक्ट्रिक वाहन अवसंरचना विकसित करने और जलवायु अनुकूल शहरी नियोजन को प्राथमिकता देने की बात कही गई। उन्होंने अपशिष्ट प्रबंधन, उपचारित जल के पुनः उपयोग, वेस्ट-टू-एनर्जी परियोजनाओं और मॉड्यूलर सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट्स के माध्यम से सर्कुलर इकोनॉमी मॉडल अपनाने पर भी जोर दिया।
तकनीक के उपयोग को बढ़ाने की आवश्यकता पर बल देते हुए संघू ने कहा कि ट्रैफिक प्रबंधन, नागरिक सेवाओं और प्रशासनिक कार्यों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) तथा डिजिटल प्लेटफॉर्म का अधिकतम उपयोग किया जाना चाहिए ताकि नागरिकों को बेहतर सेवाएं मिल सकें और कारोबार करने में आसानी हो।
उन्होंने कहा कि केवल सरकारी प्रयासों से टिकाऊ विकास का लक्ष्य हासिल नहीं किया जा सकता। इसके लिए नागरिकों की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है। उन्होंने रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशनों (RWA), स्कूलों और स्थानीय समुदायों को पार्कों, हरित क्षेत्रों और पर्यावरण संरक्षण गतिविधियों में भागीदार बनने का आह्वान किया।
उद्योग जगत की भूमिका पर चर्चा करते हुए एलजी ने कहा कि भारत की युवा आबादी देश की सबसे बड़ी ताकत है। निजी क्षेत्र को कौशल विकास, नवाचार और रोजगार सृजन में निवेश बढ़ाकर इस जनसांख्यिकीय क्षमता का लाभ उठाना चाहिए। उन्होंने प्रधानमंत्री के विकसित भारत के विजन का उल्लेख करते हुए कहा कि सरकार और उद्योग को अलग-अलग संस्थाओं की तरह नहीं, बल्कि राष्ट्रीय विकास के साझेदार के रूप में कार्य करना होगा।
उन्होंने नीति निर्माण में निरंतरता बनाए रखने के लिए नियमित संवाद, विशेषज्ञ परामर्श और उद्योग-सरकार साझेदारी को मजबूत करने का सुझाव दिया। उपराज्यपाल ने विश्वास जताया कि शोध संस्थानों, नागरिक समाज और उद्योग जगत की सहभागिता से दिल्ली न केवल देश की प्रशासनिक राजधानी बल्कि नवाचार और टिकाऊ शहरी विकास का वैश्विक मॉडल बन सकती है।



