नई दिल्ली। दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व में दिल्ली सरकार ने पर्यावरण संरक्षण और जलवायु परिवर्तन से निपटने की दिशा में महत्वपूर्ण और दूरदर्शी फैसला लिया है। दिल्ली सचिवालय में हुई दिल्ली सरकार की कैबिनेट बैठक में पर्यावरण विभाग की ओर से लाए गए ‘कार्बन क्रेडिट मोनेटाइजेशन फ्रेमवर्क’ लागू करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई है। इसके तहत दिल्ली सरकार अब अपने विभिन्न ग्रीन प्रोजेक्ट्स से होने वाली उत्सर्जन कटौती को अंतरराष्ट्रीय बाजार में बेचकर राजस्व जुटाएगी। योजना को मंजूरी मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के मार्गदर्शन और पर्यावरण मंत्री श्री मनजिंदर सिंह सिरसा की उपस्थिति में दी गई।
दिल्ली सरकार जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए प्रतिबद्ध है
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि दिल्ली सरकार जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। ‘कार्बन क्रेडिट मोनेटाइजेशन फ्रेमवर्क’ के लागू होने से सरकार को अतिरिक्त राजस्व स्रोत प्राप्त होंगे, जिससे विकास कार्यों को और गति मिलेगी। इससे न केवल पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि इससे प्राप्त होने वाला राजस्व राज्य के समेकित कोष (Consolidated Fund of the State) में जमा होकर जनहितकारी योजनाओं में उपयोग किया जा सकेगा। इससे विभिन्न विभागों की कार्यक्षमता बढ़ेगी और आम नागरिकों को स्वच्छ एवं बेहतर पर्यावरण का लाभ मिलेगा। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि इस पहल के माध्यम से दिल्ली सरकार न केवल जलवायु परिवर्तन के खिलाफ भारत की प्रतिबद्धताओं को पूरा करने में नेतृत्व कर रही है, बल्कि स्थायी विकास के लिए नए वित्तीय रास्ते भी खोल रही है। दिल्ली अब कार्बन मार्केट का लाभ उठाने वाला देश का प्रमुख राज्य बनकर उभरेगा।
पर्यावरण विभाग इस पूरे काम का नोडल विभाग होगा
दिल्ली सरकार के पर्यावरण विभाग ने बताया कि यह योजना दिल्ली सरकार के विभिन्न विभागों द्वारा चलाई जा रही पहलों को कवर करेगी। पर्यावरण विभाग इस पूरे काम का नोडल विभाग होगा। दिल्ली सरकार वर्तमान में इलेक्ट्रिक बसें चलाने, बड़े पैमाने पर पौधारोपण करने, सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने और कचरा प्रबंधन जैसे कई ऐसे काम कर रही है जिनसे कार्बन उत्सर्जन कम होता है। इस नई नीति के तहत, इन सभी कामों से होने वाली प्रदूषण की कमी को वैज्ञानिक तरीके से मापा जाएगा और उन्हें ‘कार्बन क्रेडिट’ के रूप में रजिस्टर कराया जाएगा। इन क्रेडिट्स को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय कार्बन मार्केट में बेचा जा सकेगा, जिससे दिल्ली सरकार को राजस्व प्राप्त होगा।
बिना सरकारी खर्च के होगी कमाई
पर्यावरण विभाग के अनुसार, इस योजना की सबसे बड़ी विशेषता इसका वित्तीय मॉडल है। दिल्ली सरकार का पर्यावरण विभाग पारदर्शी टेंडर (RFP) प्रक्रिया के जरिए एक विशेषज्ञ एजेंसी का चयन करेगा। यह एजेंसी यह देखेगी कि किन-किन योजनाओं से कार्बन क्रेडिट बन सकते हैं। इसके बाद उनका दस्तावेजीकरण और अंतरराष्ट्रीय मानकों पर रजिस्ट्रेशन का सारा काम भी करेगी। यह पूरी प्रक्रिया ‘रेवेन्यू शेयरिंग मॉडल’ पर आधारित होगी यानी सरकार को इस पर कोई पैसा खर्च नहीं करना होगा। होने वाली कमाई का एक हिस्सा एजेंसी को मिलेगा और बड़ा हिस्सा सरकार के खजाने में आएगा।
खजाने में सीधे जमा होगा पैसा
इस फ्रेमवर्क के जरिए होने वाली पूरी कमाई सीधे ‘राज्य की संचित कोष’ में जमा की जाएगी और इसे दिल्ली सरकार के वित्तीय खातों में दिखाया जाएगा। इस पैसे का इस्तेमाल दिल्ली के विकास और पर्यावरण को और बेहतर बनाने के लिए किया जा सकेगा।



