नई दिल्ली। केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने शुक्रवार को नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे-6 (NFHS-6) की रिपोर्ट जारी की। 2023-24 में हुए इस सर्वे में देश के 715 जिलों के करीब 6.79 लाख परिवारों को शामिल किया गया। रिपोर्ट में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, पोषण, टीकाकरण और महिलाओं के सशक्तिकरण से जुड़े कई अहम संकेतकों में सुधार दर्ज किया गया है। हालांकि मोटापा, शुगर जैसी लाइफस्टाइल बीमारियों के बढ़ते मामले चिंता का कारण बने हुए हैं
पोषण स्तर में सुधार
रिपोर्ट के मुताबिक देश में संस्थागत प्रसव बढ़कर 90.6% हो गया है। यानी अब ज्यादा महिलाएं अस्पताल या स्वास्थ्य केंद्रों में बच्चों को जन्म दे रही हैं। वहीं बच्चों का पूर्ण टीकाकरण कवरेज बढ़कर 87.1% पहुंच गया है। सर्वे में बच्चों के पोषण स्तर में सुधार दिखा है। पांच साल से कम उम्र के बच्चों में उम्र के हिसाब से कम लंबाई यानी स्टंटिंग घटकर 29.3% रह गई है। गंभीर दुबलापन यानी वेस्टिंग भी घटकर 5.2% हो गया। कम वजन वाले बच्चों के आंकड़ों में भी हल्की गिरावट दर्ज की गई है।
गर्भवती महिलाओं को एंटीनटल केयर मिलने का प्रतिशत बढ़कर 95.9% हो गया है। पहली तिमाही में जांच कराने वाली महिलाओं की संख्या भी बढ़ी है। जन्म के दो दिन के भीतर नवजात की जांच कराने का प्रतिशत 85.3% तक पहुंच गया है। आयरन और फोलिक एसिड की गोलियां लेने वाली महिलाओं की संख्या में भी सुधार दर्ज किया गया।देश की कुल प्रजनन दर 2.0 पर स्थिर बनी हुई है। गर्भनिरोधक उपयोग दर बढ़कर 69.1% हो गई है। रिपोर्ट के अनुसार परिवार नियोजन सेवाओं की पहुंच पहले से बेहतर हुई है।
रिपोर्ट में बताया गया है कि स्वास्थ्य बीमा या हेल्थ फाइनेंसिंग स्कीम का कवरेज 41% से बढ़कर 60.2% हो गया है। सरकार का कहना है कि आयुष्मान भारत जैसी योजनाओं से गरीब और कमजोर वर्गों को इलाज की सुविधा मिली है।
टीकाकरण में बड़ी उपलब्धि
टीकाकरण में बड़ी उपलब्धि
NFHS-6 के अनुसार 12 से 23 महीने आयु वर्ग के बच्चों में पूर्ण टीकाकरण कवरेज 83.8 प्रतिशत से बढ़कर 87.1 प्रतिशत हो गया है। 95.6 प्रतिशत बच्चों को अधिकांश टीके सरकारी स्वास्थ्य सुविधाओं के माध्यम से लगाए गए, जो सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था पर लोगों के भरोसे को दर्शाता है। रोटावायरस टीकाकरण कवरेज में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। यह 36.4 प्रतिशत से बढ़कर 85.4 प्रतिशत तक पहुंच गया। वहीं खसरा युक्त टीके की दूसरी खुराक का कवरेज भी 58.6 प्रतिशत से बढ़कर 71.8 प्रतिशत हो गया है।
पोषण संकेतकों में सुधार
रिपोर्ट के अनुसार पांच वर्ष से कम उम्र के बच्चों में बौनापन (स्टंटिंग) 35.5 प्रतिशत से घटकर 29.3 प्रतिशत रह गया है, यानी लगभग 17 प्रतिशत की कमी दर्ज हुई है। गंभीर कुपोषण (सीवियर वेस्टिंग) में 32 प्रतिशत की कमी आई है और यह 7.7 प्रतिशत से घटकर 5.2 प्रतिशत पर पहुंच गया है।
जन्म के एक घंटे के भीतर स्तनपान शुरू कराने वाले बच्चों का प्रतिशत भी 41.8 से बढ़कर 50.1 प्रतिशत हो गया है। वहीं छह से आठ माह के बच्चों को स्तनपान के साथ पूरक आहार देने का प्रतिशत 45.9 से बढ़कर 59.5 प्रतिशत हो गया।
मेंस्ट्रुअल हाइजीन
NFHS-6 के अनुसार 15-24 वर्ष आयु वर्ग की महिलाओं में मासिक धर्म के दौरान स्वच्छ तरीकों के उपयोग का प्रतिशत 77.6 से बढ़कर 79.2 हो गया है। सरकार की मासिक धर्म स्वच्छता योजना और जनऔषधि परियोजना ने जागरूकता व सुलभता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
स्वास्थ्य बीमा का दायरा तेजी से बढ़ा
रिपोर्ट में बताया गया है कि स्वास्थ्य बीमा या हेल्थ फाइनेंसिंग स्कीम का कवरेज 41% से बढ़कर 60.2% हो गया है। सरकार का कहना है कि आयुष्मान भारत जैसी योजनाओं से गरीब और कमजोर वर्गों को इलाज की सुविधा मिली है।
महिला सशक्तिकरण में बढ़ी भागीदारी
इंटरनेट इस्तेमाल करने वाली महिलाओं की संख्या लगभग दोगुनी होकर 64.3% पहुंच गई है। खुद इस्तेमाल करने वाले बैंक खाते रखने वाली महिलाओं का प्रतिशत 89% हो गया है। मोबाइल फोन इस्तेमाल करने वाली महिलाओं की संख्या में भी इजाफा हुआ है। खुद अपना मोबाइल फोन इस्तेमाल करने वाली महिलाओं की संख्या 53.9 से 63.6 फीसदी हो गई है।
इनमें हुआ इजाफा
रिपोर्ट में सामने आया कि बदलती जीवनशैली की वजह से मोटापा, डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर के मामलों में इजाफा हुआ है। विशेषज्ञ इसे आने वाले समय की बड़ी स्वास्थ्य चुनौती मान रहे हैं।



