नई दिल्ली: बिहार की दाहा नदी, जो गोपालगंज से शुरू होकर सिवान और छपरा होते हुए गंडक नदी में मिलती है, गंभीर पर्यावरणीय संकट का सामना कर रही है। स्थानीय निवासी प्रयाग कुमार ने NGT में याचिका दायर कर बताया कि गोपालगंज, सिवान और छपरा के नालों का गंदा पानी और औद्योगिक कचरा बिना किसी उपचार के नदी में डाला जा रहा है। इससे नदी का पानी जहरीला हो रहा है, जिससे न केवल जलीय जीवन खतरे में है, बल्कि नदी के अस्तित्व पर भी सवाल उठ रहे हैं। एनजीटी ने 6 अक्टूबर 2025 को इस मामले की सुनवाई की और बिहार स्टेट पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड, बिहार इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन समेत अन्य अधिकारियों से जवाब तलब किया। अगली सुनवाई 10 दिसंबर 2025 को होगी।
याचिकाकर्ता ने यह भी बताया कि 2023 में गंडक-दाहा-घाघरा नदी लिंक योजना प्रस्तावित की गई थी, लेकिन तकनीकी और प्रशासनिक मंजूरी के अभाव में यह ठप है। स्थानीय अधिकारियों और जल शक्ति मंत्रालय से बार-बार शिकायत के बावजूद कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। यह स्थिति नदी के आसपास रहने वाले समुदायों के लिए भी चिंताजनक है, क्योंकि प्रदूषण से उनकी आजीविका और स्वास्थ्य पर असर पड़ रहा है।
सूर सरोवर बर्ड सेंचुरी: विस्तार में देरी
उत्तर प्रदेश के आगरा में स्थित सूर सरोवर बर्ड सेंचुरी के विस्तार की प्रक्रिया भी सुस्त गति से चल रही है। इस सेंचुरी में 14.5 हेक्टेयर सरकारी जमीन को शामिल करने की घोषणा अप्रैल 2025 में हुई थी। सितंबर 2025 में पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मुख्य वन्यजीव संरक्षक ने एनजीटी को बताया कि विस्तार के लिए तीन भूखंड चुने गए हैं, जिनमें से दो के लिए अधिसूचनाएं जारी हो चुकी हैं। तीसरे भूखंड की अधिसूचना अभी लंबित है। एनजीटी ने मई 2025 में इसकी प्रगति पर रिपोर्ट मांगी थी, लेकिन प्रक्रिया पूरी नहीं हुई।
- इसको भी पढ़ें: नवाबगंज पक्षी अभयारण्य में ध्वनि प्रदूषण पर NGT सख्त
NGT की भूमिका और भविष्य
एनजीटी का यह कदम पर्यावरण संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण है। दाहा नदी और सूर सरोवर जैसे प्राकृतिक संसाधनों को बचाने के लिए त्वरित कार्रवाई जरूरी है। स्थानीय प्रशासन की उदासीनता और देरी चिंता का विषय है। आगामी सुनवाई में ठोस उपायों की उम्मीद की जा रही है।



