नई दिल्ली: दिल्ली के किरारी इलाके में बहने वाले सुलेमान नगर नाले (Kirari Suleman Nagar Drain) को पूरी तरह से नया रूप देने का काम जोरों पर है। अधिकारियों का कहना है कि इसकी पानी निकासी की ताकत को बढ़ाने के लिए लगातार प्रयास हो रहे हैं, जिससे बारिश के दिनों में जलभराव की दिक्कतों से निजात मिल सके। सिंचाई और बाढ़ नियंत्रण विभाग ने हाल ही में राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण (एनजीटी) को सौंपी अपनी रिपोर्ट में इसकी जानकारी दी। विभाग के इंजीनियर विवेक चौहान ने बताया कि उनकी तकनीकी कमिटी की बैठक में करीब 58 करोड़ रुपये की परियोजना को हरी झंडी मिल चुकी है। इसमें नाले की दीवारों की मरम्मत, सफाई और पुलों को दोबारा बनाने जैसे काम शामिल हैं, ताकि पानी का बहाव बिना किसी रुकावट के हो सके।
यह कदम पिछले साल नवंबर में आई एक दुखद खबर के बाद उठाया गया है, जहां राजेंद्र नगर इलाके के पास इसी नाले में एक 13 साल के बच्चे की डूबकर मौत हो गई थी। मीडिया में उस वक्त इस नाले को ‘गंदगी की नदी’ तक कहा गया था। 7.8 किलोमीटर लंबा यह नाला रोहिणी सेक्टर 20-21 से शुरू होकर किरारी और मुंडका जैसे घनी बस्तियों वाले इलाकों से गुजरता है, जहां बाढ़ का खतरा हमेशा मंडराता रहता है। रिपोर्ट में कहा गया है कि अनियोजित कॉलोनियों की वजह से नाले में बारिश का पानी तो आता ही है, साथ में सीवर और घरेलू कचरा भी मिल जाता है, जो इसकी क्षमता से ज्यादा बोझ डालता है।
अधिक पानी से रुकावटें बढ़ीं, पुलों को अपग्रेड करने की तैयारी
विभाग की रिपोर्ट से पता चलता है कि मुंडका और किरारी में तेजी से फैलती अनधिकृत बस्तियां नाले के लिए मुसीबत बनी हुई हैं। मौजूदा पुल नाले के बढ़ते पानी को झेल नहीं पाते, जिससे आसपास के इलाकों में पानी भर जाता है। इसी समस्या से निपटने के लिए पुलों को ऊंचा और मजबूत बनाने की एक अलग योजना बनाई गई है, जिस पर 6 करोड़ रुपये से ज्यादा खर्च होंगे। कमिटी ने इसे भी मंजूर कर लिया है।
सुरक्षा के लिए ग्रिल्स लगाए, सफाई अभियान चल रहा
परियोजना के तहत पुराने पुलों को तोड़कर नए बनाए जा रहे हैं, साथ ही नाले से कचरा, गाद और अन्य बाधाओं को हटाने का काम टेंडर के जरिए शुरू हो चुका है। विभाग साल भर नाले की देखभाल करेगा, ताकि बहाव सुचारू रहे। दीवारों की मरम्मत के लिए भी कॉन्ट्रैक्ट दिए गए हैं। हादसों को रोकने के लिए कुछ पुलों पर लोहे की जालियां फिट की गई हैं, जो बच्चों और जानवरों को गिरने से बचाएंगी।
बैंकों को ऊंचा करने में गाद का इस्तेमाल
रिपोर्ट में यह भी जिक्र है कि नाले से निकाली जा रही गाद और गोबर को फेंकने की बजाय किनारों पर लगाया जा रहा है। इससे बैंक ऊंचे हो जाते हैं, जो ज्यादा बारिश में पानी को इलाकों में फैलने से रोकते हैं। चूंकि नाला अपनी तय क्षमता से कहीं ज्यादा पानी संभाल रहा है, इसलिए ऐसे उपाय जरूरी हो गए हैं। यह परियोजना दिल्ली के बाढ़ प्रभावित इलाकों के लिए एक बड़ी राहत साबित हो सकती है। अगर सब कुछ प्लान के मुताबिक चला, तो आने वाले मानसून में किरारी और मुंडका जैसे क्षेत्रों में जलभराव की शिकायतें काफी कम हो जाएंगी। अधिकारियों का कहना है कि स्थानीय लोगों को भी कचरा न फेंकने के लिए जागरूक किया जा रहा है, ताकि नाला साफ-सुथरा रहे।



