पटना: बिहार चुनाव में बहुत पहले ही कांग्रेस की सक्रियता उसके कम सीटों के मिलने की उम्मीद का संकेत दे रही है। यही कारण है कि जहां एक तरफ राहुल गांधी ने बिहार की यात्रा की, वहीं दूसरी तरफ पहली बार प्रियंका गांधी भी बिहार के चुनावी प्रचार के लिए पहुंच रही हैं। यही नहीं, सीडब्ल्यूसी की बैठक भी 84 साल बाद बिहार में हुई और यहां की धरती से दलित वर्ग को लुभाने की कोशिश की गई।
पटना एयरपोर्ट पर कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव श्रीमती @priyankagandhi जी का बिहार प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष श्री @rajeshkrinc जी सहित बिहार प्रदेश कांग्रेस परिवार के वरिष्ठ नेताओं ने
— Bihar Congress (@INCBihar) September 26, 2025
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दरअसल, सवाल सीट बंटवारे को लेकर है। महागठबंधन में सीट बंटवारे की चर्चा शुरू हो गई है और कांग्रेस को पहले से ही डर है कि पिछले चुनाव के स्ट्राइक रेट के आधार पर सीटों के बंटवारे का मुद्दा सभी पार्टियां उठाएंगी। महागठबंधन में सबसे कम स्ट्राइक रेट कांग्रेस का ही था। यही कारण है कि कांग्रेस यह पहले से दिखाने की कोशिश कर रही है कि वे बिहार में पिछले चुनाव की अपेक्षा ज्यादा जनाधार बटोरने की क्षमता रखते हैं।
कांग्रेस सूत्रों के अनुसार, पार्टी के उच्च पदासीन नेता वर्तमान स्थिति के आधार पर सीट बंटवारा करना चाहते हैं। पार्टी का मानना है कि वर्तमान में बिहार में कांग्रेस का जनाधार बढ़ा है और सीटों का बंटवारा उसी आधार पर होना चाहिए, जबकि महागठबंधन के अन्य दल स्ट्राइक रेट के आधार पर सीटों का बंटवारा करने का प्रस्ताव दे रहे हैं।
पिछले चुनाव में सिर्फ 27 प्रतिशत था स्ट्राइक रेट
पिछले विधानसभा चुनाव में तेजस्वी यादव की पार्टी आरजेडी ने 144 सीटों पर चुनाव लड़ा और 75 सीटें जीतीं। इसका जीतने का स्ट्राइक रेट 52 प्रतिशत था। वहीं लेफ्ट पार्टियां 29 सीटों पर चुनाव लड़कर 16 सीटें जीत पाईं। इसका स्ट्राइक रेट 55 प्रतिशत था, जबकि कांग्रेस 70 सीटों पर चुनाव लड़कर मात्र 19 सीटें जीत सकी। इसका स्ट्राइक रेट सिर्फ 27 प्रतिशत था।
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अकेले चुनाव लड़कर कांग्रेस को दहाई तक पहुंचना भी मुश्किल!
यदि स्ट्राइक रेट के हिसाब से सीटों का बंटवारा हुआ, तो कांग्रेस की सीटें पिछले चुनाव की अपेक्षा कम हो जाएंगी। यह कांग्रेस स्वीकार नहीं कर सकती, और बिहार में अकेले चुनाव लड़कर कांग्रेस के लिए दहाई अंक तक पहुंचना भी मुश्किल होगा। इसी डर से अपने सभी दिग्गज नेताओं को बहुत पहले ही कांग्रेस ने बिहार में सक्रिय कर दिया है, ताकि गठबंधन में अधिकतम सीटों का दबाव बनाया जा सके।



