नई दिल्ली: दिल्ली प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष देवेन्द्र यादव ने संसद सत्र के दौरान प्रधानमंत्री के दिए बयान ‘आप भी मौसम का मजा लीजिए’ को आड़े हांथों लिया। देवेन्द्र यादव ने कहा कि दिल्लीवासी अपनी सांसों के लिए संघर्ष कर रहे है ऐसे में केन्द्र सरकार को दिल्ली के प्रदूषण रोकथाम के लिए रेखा गुप्ता सरकार को विशेष दिशा निर्देश देने चाहिए; उस स्थिति में प्रधानमंत्री दिल्लीवालों की जिंदगी का मजाक उड़ाकर ऐसे बयान दे रहे हैं, जो पूरी तरह असंवेदनशील है। उन्होंने कहा कि 24 घंटे वातानुकूलित वातावरण में रहने वाले प्रधानमंत्री मोदी जी को शायद दिल्ली के गरीब आदमी की जिंदगी के संघर्ष का अनुभव नही है।
देवेन्द्र यादव ने बताया कि दिसम्बर में दिल्ली के मौसम पर पर्यावरणविद श्री भावरीन खंडारी ने कहा कि हाल के हफ्तों में दिल्ली में बार-बार एक्यूआई बेहद खतरनाक श्रेणी में दर्ज हुआ है और कुछ क्षेत्रों में पीएम 2.5 और पीएम 10 सांद्रता में खतरनाक कणों के साथ 440-500 से अधिक का स्तर दर्ज किया गया है। जबकि सोमवार की सुबह से शाम तक धुंध भरा दिन रहा।
प्रदूषण रोकथाम के नाम पर हुआ छलावा
देवेन्द्र यादव ने कहा कि दिल्ली की प्रदूषित हवा हर सीमा को पार कर चुकी है, जिसके कारण दिल्ली गैस चेंबर बन चुकी है। दिल्ली वाले 24 घंटे स्लो पॉईजन प्रदूषण को सांसों के जरिए ग्रहण कर रहे है और जनता की चिंता किए बिना भाजपा और आम आदमी पार्टी आरोप प्रत्यारोप की राजनीति कर रहे है। प्रदूषण रोकथाम के नाम पर सरकारी तंत्र के छलावे में दिल्ली का आम नागरिक पिस रहा है।
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देवेन्द्र यादव ने कहा कि दिल्ली की रेखा गुप्ता सरकार प्रदूषण के विरुद्ध जंग का बखान कर रही है कि 271 स्प्रिंकलर, 386 एंटी स्मॉग गन, 76 मैकेनिकल स्वीपर, कंस्ट्रक्शन साईट पर 608 एंटी स्मॉग गन, इलेक्ट्रिक पोल पर 300 मिस्ट स्प्रे सिस्टम, रोजाना 30,000 मीटिक टन वेस्ट की बायो माईनिंग और 2088 प्रवर्तन टीमें काम कर रही है। उन्होंने कहा कि दिल्ली के इतने बड़े क्षेत्रफल में दिल्ली सरकार का यह प्रयास सिर्फ ऊंट के मुंह में जीरा जैसा है लेकिन जितनी गिनती गिनाई जा रही है वह कहीं दिखाई क्यों नही देती? यही नही वेस्ट की बायो माइनिंग की वास्तविकता यह है कि तीनों लैंडफिलों पर 58 ट्रॉमेल मशीनों का उपयोग करके प्रतिदिन 25000 टन होती है न कि 30000 मीट्रिक टन। भाजपा का दिल्ली की जनता को लगातार धोखा देने के बाद अब दिल्ली की जनता का विश्वास ही भाजपा से उठ चुका है।
प्रदूषण के कारकों पर की चर्चा
देवेन्द्र यादव ने कहा कि दिल्ली में प्रदूषण के कई मूल कारक हैं। जैसे पराली, वाहन प्रदूषण, कंस्ट्रक्शन, टूटी सड़कों से प्रदूषण, अनियमित और अपर्याप्त सफाई, गंदगी और कूड़े के ढेर, औद्योगिक इकाई और अवैध फैक्ट्री आदि। सरकार इन कारणों पर लगाम लगाने में पूरी तरह नाकाम साबित रही है।



