CM की सुरक्षा बढ़ी, जानिए Z और Z+ श्रेणी में कितना अंतर?

हमले के बाद सीएम रेखा गुप्ता की सुरक्षा Z श्रेणी से बढ़ाकर सीआरपीएफ की निगरानी में दे दी गई है। आइए जानते हैं कि सुरक्षा की इन श्रेणियों में फर्क कितना है।

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नई दिल्ली: दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता पर हमले के दूसरे दिन बृहस्पतिवार उनकी सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई है। पहले उन्हें दिल्ली पुलिस के जवानों द्वारा Z श्रेणी की सुरक्षा दी गई थी, लेकिन अब केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के जवान उनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी संभालेंगे। गुरुवार को सीआरपीएफ ने अपनी ड्यूटी शुरू कर दी। हमलावर, राजेश खिमजी, जिसे पुलिस ने तुरंत हिरासत में ले लिया, एक“सीरियल ऑफेंडर”बताया जा रहा है, जिसके खिलाफ गुजरात में कई मामले दर्ज हैं। इस हमले में मुख्यमंत्री को मामूली चोटें आईं, लेकिन उनकी स्थिति स्थिर है। गृह मंत्रालय ने इस घटना को गंभीरता से लेते हुए तत्काल प्रभाव से सीआरपीएफ की Z श्रेणी सुरक्षा लागू की। यह कदम मुख्यमंत्री की सुरक्षा को और मजबूत करने के लिए उठाया गया है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।  

Z और Z+ श्रेणी की सुरक्षा: क्या है अंतर?

भारत में सुरक्षा व्यवस्था को खतरे के स्तर के आधार पर विभिन्न श्रेणियों में बांटा गया है, जैसे X, Y, Y+, Z, और Z+। इनमें Z और Z+ उच्चतम स्तर की सुरक्षा मानी जाती हैं, लेकिन इनके बीच कुछ खास अंतर हैं:  

Z श्रेणी की सुरक्षा

इसमें 22 सुरक्षाकर्मी प्रदान किए जाते हैं, जिनमें 4-5 एनएसजी या सीआरपीएफ कमांडो और अन्य पुलिसकर्मी शामिल होते हैं। वहीं, इसमें एक एस्कॉर्ट वाहन भी होता है। ऐसे में यह सुरक्षा उन लोगों को दी जाती है जिन्हें मध्यम से उच्च स्तर का खतरा हो। उदाहरण के तौर पर, योग गुरु बाबा रामदेव जैसे कुछ प्रमुख व्यक्तियों को यह सुरक्षा दी गई है। Z श्रेणी की सुरक्षा दिल्ली पुलिस, आईटीबीपी या सीआरपीएफ द्वारा प्रदान की जा सकती है।  

Z+ श्रेणी की सुरक्षा

यह भारत में सबसे उच्च स्तर की सुरक्षा है (एसपीजी को छोड़कर)। इसमें 55 सुरक्षाकर्मी शामिल होते हैं, जिनमें 10 से ज्यादा एनएसजी कमांडो और अन्य पुलिसकर्मी होते हैं। इस सुरक्षा में बुलेटप्रूफ गाड़ियां, तीन शिफ्टों में एस्कॉर्ट, और अत्याधुनिक हथियारों से लैस कमांडो शामिल होते हैं। यह उन लोगों को दी जाती है जिन्हें गंभीर और जानलेवा खतरा हो, जैसे प्रधानमंत्री, गृह मंत्री, और कुछ प्रमुख मुख्यमंत्री।

सुरक्षा का निर्धारण कैसे होता है?

सुरक्षा श्रेणी का फैसला खुफिया ब्यूरो (आईबी) और रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (रॉ) की खतरे की आकलन रिपोर्ट के आधार पर होता है। ये एजेंसियां व्यक्ति को होने वाले संभावित खतरों का विश्लेषण करती हैं और उसी के अनुसार सुरक्षा का स्तर तय करती हैं। समय-समय पर खतरे की समीक्षा की जाती है, जिसके आधार पर सुरक्षा को बढ़ाया या घटाया जा सकता है। 

मुख्यमंत्री की स्थिति और भविष्य की योजनाएं

वर्तमान में, सीएम रेखा गुप्ता की सुरक्षा को सीआरपीएफ के जवान 24 घंटे सुनिश्चित कर रहे हैं। यह व्यवस्था उन्हें अपने सार्वजनिक और प्रशासनिक कार्यों को बिना किसी डर के जारी रखने में मदद करेगी। बीजेपी सांसद प्रवीण खंडेलवाल ने सीएम से मुलाकात के बाद बताया कि वह पूरी तरह स्वस्थ हैं और दिल्ली के लोगों के लिए अपने कार्यों में पहले की तरह सक्रिय हैं।

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