बिहार में ​भारतमाला परियोजना को लेकर किसानों और प्रशासन में झड़प

बिहार में मुआवजे की मांग कर रहे किसानों का आरोप है कि बिना उचित मुआवजा दिए उनकी खड़ी धान की फसल को बर्बाद किया जा रहा है। इस दौरान लाठी और पत्थर चले।

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रोहतास: बिहार के रोहतास जिले के चेनारी थाना क्षेत्र के बरताली गांव में बुधवार को केंद्र सरकार की भारतमाला परियोजना का विरोध कर रहे किसानों और प्रशासन के बीच तनाव बढ़ गया। मुआवजे की मांग कर रहे किसानों ने आरोप लगाया कि प्रशासन और निर्माण कंपनी, पीएनसी, उनकी खड़ी धान की फसल को बिना उचित मुआवजे के ही नष्ट कर रही है।

​घटना का विवरण

प्रशासन की टीम, जिसमें पुलिस और कंपनी के कर्मचारी शामिल थे, जमीन पर कब्जा लेने और काम शुरू करने के लिए जेसीबी और पोकलेन मशीनों के साथ गांव पहुंची।
​किसानों का कहना है कि उन्हें अभी तक उनकी अधिग्रहित जमीन का मुआवजा नहीं मिला है। इसके बावजूद उनकी फसल को बर्बाद किया जा रहा था।
​इस बात से गुस्साए ग्रामीणों ने विरोध प्रदर्शन किया, जिसके बाद प्रशासन और किसानों के बीच झड़प शुरू हो गई। ​इस झड़प में लाठी-पत्थर भी चले, जिसमें जेसीबी और पोकलेन के दो ड्राइवर घायल हो गए। घटना के बाद हालात और बिगड़ गए, और आसपास के गांवों से भी सैकड़ों किसान मौके पर जमा हो गए।

​प्रशासन और पुलिस का रुख

घटना की सूचना मिलते ही बड़ी संख्या में पुलिस बल मौके पर पहुंचा। डीएसपी दिलीप कुमार सहित कई वरिष्ठ अधिकारी किसानों को शांत करने की कोशिश में जुटे रहे। खबर लिखे जाने तक, हालात तनावपूर्ण बने हुए थे, और किसानों का विरोध प्रदर्शन जारी था। अधिकारी फिलहाल इस मामले पर कोई भी बयान देने से बच रहे हैं।

​भारतमाला परियोजना क्या है

भारतमाला परियोजना भारत सरकार की एक बड़ी योजना है, जिसका मकसद पूरे देश में राजमार्गों (highways) और सड़कों का एक मजबूत नेटवर्क बनाना है। इस प्रोजेक्ट के तहत, सड़कों को अपग्रेड किया जाता है, नए एक्सप्रेसवे बनाए जाते हैं, और लॉजिस्टिक्स को बेहतर बनाने पर ज़ोर दिया जाता है। इस परियोजना का उद्देश्य देश में आर्थिक विकास को बढ़ावा देना और आवागमन को सुगम बनाना है।
​इस तरह के बड़े प्रोजेक्ट्स को पूरा करने के लिए, सरकार को निजी जमीनों का अधिग्रहण करना पड़ता है। इसी ज़मीन अधिग्रहण की प्रक्रिया के दौरान अक्सर किसानों और सरकार के बीच विवाद पैदा होता है।

​विवाद की वजह

इस मामले में, किसानों का मुख्य आरोप है कि उनकी ज़मीन का अधिग्रहण तो कर लिया गया है, लेकिन उन्हें अभी तक उचित मुआवजा नहीं मिला है। भारत में भूमि अधिग्रहण कानून (Right to Fair Compensation and Transparency in Land Acquisition, Rehabilitation and Resettlement Act, 2013) के तहत, सरकार को किसानों को उनकी ज़मीन के बदले में बाज़ार मूल्य से कई गुना ज़्यादा मुआवजा देना होता है, साथ ही, विस्थापित होने वाले परिवारों को पुनर्वास और पुनर्व्यवस्थापन की सुविधा भी देनी होती है।
​रोहतास में किसानों का कहना है कि प्रशासन ने इन नियमों का पालन नहीं किया है। बिना मुआवजा दिए ही उनकी जमीन पर निर्माण कार्य शुरू कर दिया गया, जिससे उनकी खड़ी धान की फसल बर्बाद हो गई।

​मौजूदा स्थिति

विरोध प्रदर्शन: मुआवज़ा न मिलने और फसल बर्बाद होने से नाराज़ किसानों ने विरोध प्रदर्शन किया, जिसके बाद प्रशासन और किसानों के बीच झड़प हो गई।
​तनावपूर्ण माहौल: घटना के बाद से माहौल तनावपूर्ण बना हुआ है और किसान अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं।
​यह घटना दिखाती है कि भले ही बड़े सरकारी प्रोजेक्ट्स देश के विकास के लिए ज़रूरी हों, लेकिन अगर भूमि अधिग्रहण और मुआवज़े की प्रक्रिया में पारदर्शिता और fairness न हो, तो किसानों में गुस्सा बढ़ना तय है। जब तक किसानों की चिंताओं को दूर नहीं किया जाता, इस तरह के विरोध प्रदर्शन जारी रह सकते हैं।

Usha Mehta

ushamehta0013@gmail.com

NewG India का सबसे युवा चेहरा, दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता में स्नातक की डिग्री हासिल की। ग्रेजुएशन के बाद IGNOU और ABP न्यूज़ नेटवर्क जैसे संस्थानों में इंटर्नशिप की। सोशल और कॉमर्स विषयों की गहरी समझ हैं कलम के साथ आवाज में भी धार हैं। NewG India में बतौर कंटेंट डेवलपर व एंकर अपनी जिम्मेदारी उषा मेहता बखूबी निभा रही हैं ।

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