पटना: एक समय था जब बिहार की छवि पिछड़े और राजनीतिक अस्थिरता वाले राज्य की थी। यहाँ गरीबी, पलायन और कानून-व्यवस्था की खराब स्थिति को लेकर अक्सर चर्चा होती थी। लेकिन, पिछले कुछ सालों से सरकार ने बुनियादी ढांचे (सड़कें, बिजली) और नीतियों में सुधार पर जोर दिया है। इस रिपोर्ट के माध्यम से यह संदेश दिया जा रहा है कि बिहार अब केवल एक कृषि प्रधान राज्य नहीं रहा, बल्कि यह निवेश और औद्योगिक विकास का एक नया केंद्र बन रहा है। यहां की अर्थव्यवस्था में अगले पांच सालों में भारी उछाल आने की उम्मीद है। भारतीय उद्योग परिसंघ (CII) की एक रिपोर्ट के अनुसार, राज्य की अर्थव्यवस्था 2030-31 तक दोगुनी से भी ज्यादा हो जाएगी, जो एक बेहद सकारात्मक संकेत है। रिपोर्ट के अनुसार, 2030-31 तक राज्य की अर्थव्यवस्था $21.9 अरब तक पहुंच सकती है।
अर्थव्यवस्था में उछाल के मुख्य कारण
CII की रिपोर्ट बिहार की आर्थिक क्षमता को दर्शाती है और बताती है कि कैसे यह राज्य भारत में सबसे तेजी से बढ़ते राज्यों में से एक बन रहा है।
तेज विकास दर: 2023-24 में बिहार का सकल राज्य घरेलू उत्पाद (GSDP) ₹8.54 लाख करोड़ रहा, जो 14.4% की दर से बढ़ रहा है। यह इसी साल भारत की राष्ट्रीय वृद्धि दर (12%) से भी ज्यादा है। यह वृद्धि दर राज्य के निरंतर सुधारों और बुनियादी ढांचे के विस्तार का नतीजा है।
नीतियों का असर: बिहार सरकार की औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन नीति (2016 और 2020) ने औद्योगिक विकास को बढ़ावा दिया है। यह नीति पूंजी सब्सिडी, बिजली और किराए में छूट, और जीएसटी वापसी जैसे कई प्रोत्साहन देती है।
व्यापार में सुगमता: रिपोर्ट के अनुसार, ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ में भी सुधार हुआ है। सिंगल विंडो क्लीयरेंस, डिजिटल भूमि रिकॉर्ड और स्टार्टअप्स को बढ़ावा देने वाली नीतियों ने निवेशकों को आकर्षित किया है।
बिहार के लिए सकारात्मक पहलू
रिपोर्ट में बिहार के कुछ खास लाभों को उजागर किया गया है जो इसकी आर्थिक वृद्धि में मदद करेंगे।
प्राकृतिक संसाधन: बिहार के पास उपजाऊ भूमि, खनिज और पानी के प्रचुर भंडार हैं।
कृषि से उद्योग तक: पारंपरिक रूप से कृषि प्रधान राज्य होने के बावजूद, बिहार अब कृषि-आधारित उद्योगों, आईटी, कपड़ा, चमड़ा और स्वास्थ्य सेवा जैसे क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित कर रहा है।
युवा आबादी और उपभोक्ता बाजार: बिहार की 58% आबादी 25 वर्ष से कम आयु की है, जो इसे सबसे युवा राज्यों में से एक बनाती है। यह विशाल युवा कार्यबल उद्योगों के लिए एक बड़ा अवसर है। इसके अलावा, राज्य का बढ़ता हुआ ग्रामीण उपभोक्ता बाजार भी आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
CII की रिपोर्ट का महत्व
भारतीय उद्योग परिसंघ (CII) देश के प्रमुख उद्योग निकायों में से एक है। जब CII जैसी संस्था किसी राज्य की अर्थव्यवस्था पर सकारात्मक रिपोर्ट जारी करती है, तो इसका सीधा असर निवेशकों के आत्मविश्वास पर पड़ता है। यह रिपोर्ट बिहार सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयासों को मान्यता देती है और संभावित निवेशकों को यह भरोसा दिलाती है कि बिहार में निवेश करना सुरक्षित और फायदेमंद हो सकता है। यह रिपोर्ट केवल बिहार के लिए नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए एक सकारात्मक संकेत है।
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मौजूदा सुधार और भविष्य की संभावनाएं
यह रिपोर्ट हवा में नहीं आई है, बल्कि यह सरकार की नीतियों और जमीन पर हो रहे बदलावों पर आधारित है।
औद्योगिक नीति: सरकार ने बिहार औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन नीति जैसे कदम उठाए हैं, जो निवेशकों को सब्सिडी और टैक्स में छूट देकर आकर्षित करते हैं।
डिजिटल गवर्नेंस: ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ के तहत सिंगल-विंडो सिस्टम और डिजिटल भूमि रिकॉर्ड जैसे कदम उठाए गए हैं, जिससे नौकरशाही की बाधाएं कम हुई हैं।
CII की यह रिपोर्ट बिहार के भविष्य के लिए एक बहुत ही सकारात्मक तस्वीर पेश करती है, जो राज्य के लोगों और निवेशकों के लिए उम्मीद जगाती है।यह खबर सिर्फ एक आर्थिक रिपोर्ट के बारे में नहीं है, बल्कि यह बिहार की बदलती आर्थिक और राजनीतिक छवि, सरकारी नीतियों की सफलता, और निवेशकों को आकर्षित करने के प्रयासों को दर्शाती है। यह दिखाता है कि बिहार अब ‘बीमारू’ राज्य की पुरानी पहचान से बाहर निकलकर विकास की राह पर चल पड़ा है।



