जरा सोचिये सुबह उठते ही आपके फोन पर एक मेसेज आ जाये, जिसमें दिन भर के मौसम की सटीक जानकारी हो, तो कई आपदाओं से निजात मिल जाये। ऐसी ही एक परियोजना केरल के कन्नूर जिले के कांचीकर गाँव में शुरू हुई है। कांचीकर, भारत की पहली पंचायत है जहाँ “लिविंग लैब” प्रणाली अपनाई गई है। इस प्रणाली के द्वारा लोगों को जलवायु संवेदनशीलता और आपदाओं से बचाया जा सकता है। यह परियोजना कुछ समय पहले केरल स्टेट डिज़ास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी (KSDMA) द्वारा लागू की गई थी। KSDMA के सचिव शेखर कुरियाकोस कहते हैं- “पहली बार भारत में और विशेष रूप से केरल में, लिविंग लैब का प्रयोग भूस्खलन थीम पर किया गया है।”
क्या है लिविंग लैब
“लिविंग लैब” की शुरुआत नीदरलैंड्स में हुई थी। इसमें सरकार, विशेषज्ञ, निजी एजेंसियाँ और सिविल सोसाइटी की भागीदारी होती है। यह एक ऐसी वैज्ञानिक परियोजना है जिसमें रिसर्च को स्थानीय स्तर की वास्तविक परिस्थितियों से जोड़ा जाता है। जिससे स्थानीय स्तर पर मौसम की भविष्यवाणी हो पाती है।

केरल के इस गाँव में कैसे हुई लिविंग लैब की शुरुआत
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, कांचीकर गाँव में 2022 में प्राकृतिक आपदा से तीन लोगों की मौत और कई हेक्टेयर कृषि भूमि भूस्खलन से चौपट हो गई थी, जिसके बाद यह परियोजना स्थापित की गई है। कांचीकर गाँव के लोगों का कहना है कि “अब हर दिन हमें बारिश और हवा का डेटा यहाँ लगे ऑटोमैटिक वेदर स्टेशन से मिलता है। जब भी तेज़ बारिश होती है, हमें तुरंत अलर्ट और अपडेट मिल जाते हैं।” इसके अलावा यहाँ IIT-रुड़की द्वारा एक शुरुआती भूस्खलन चेतावनी प्रणाली के स्थापित होने की भी सम्भावना है। यह भारत में पहली बार है जब किसी पंचायत में ‘लिविंग लैब’ पद्धति अपनाई गई है। नीदरलैंड्स ने सबसे पहले इस पद्धति को भूस्खलन जैसी समस्याओं के समाधान के लिए आज़माया था।




