पटना: बिहार की राजधानी पटना में मंगलवार को शिक्षा व्यवस्था की पारदर्शिता को लेकर छात्र एकजुट हुए। STET के आयोजन की मांग को लेकर हो रहे इस आंदोलन ने राज्य सरकार की नीतियों पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। उनका कहना है कि बिहार में BPSC TRE-4 परीक्षा के आयोजन से पहले STET (माध्यमिक शिक्षक पात्रता परीक्षा) कराई जाए। उन्होंने कहा कि बिना STET परीक्षा के ट्रांसफर रिक्रूटमेंट एग्जामिनेशन-4 (TRE-4) शिक्षक भर्ती प्रक्रिया एक छलावा साबित होगी
प्रदर्शन की जानकारी
प्रदर्शनकारियों ने आंदोलन की शुरुआत पटना के भिखना पहाड़ी इलाके से की। वे गांधी मैदान, डाक बंगला चौराहा होते हुए मुख्यमंत्री आवास तक गए। छात्र हाथों में तख्तियां लेकर सड़क पर उतरे और नारेबाजी की। इस दौरान, पुलिस-प्रशासन द्वारा सख्त सुरक्षा व्यवस्था भी की गई थी।
मूल मांगें
1. छात्रों की मुख्य मांग है कि TRE-4 से पहले STET परीक्षा का आयोजन हो ताकि बीएड सेशन 2022-24, 2023-25 वाले सभी योग्य अभ्यर्थी शिक्षक भर्ती में शामिल हो सकें।
2. वे शिक्षा विभाग में पारदर्शिता और समय से सभी परीक्षा कराने की मांग कर रहे हैं।
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पृष्ठभूमि और सरकार की घोषणा
बिहार सरकार (मुख्यमंत्री नीतीश कुमार) ने स्पष्ट किया कि TRE-4 परीक्षा से पहले STET परीक्षा नहीं होगी। इससे लाखों छात्र निराश हैं क्योंकि शिक्षक भर्ती के लिए STET प्रमाणपत्र अनिवार्य है।
छात्रों के अनुसार चुनावी साल में सरकार TRE-4 के जरिए नियुक्तियां दिखाना चाहती है, जबकि STET वाले अभ्यर्थियों के साथ अन्याय हो रहा है।
सोशल मीडिया पर भी इस मांग को लेकर कैंपेन तेज है, पर सरकार ने छात्रों की मांग नहीं मानी है।
छात्रों का कहना है कि TRE-4 बिना STET के सिर्फ औपचारिकता बनकर रह जाएगा। लगातार प्रदर्शन और ज्ञापन के बाद भी सरकार अभी तक अपने फैसले पर टिकी है।
अगर सरकार जल्द समाधान नहीं निकालती, तो छात्रों में असंतोष और बढ़ सकता है। छात्रों के आंदोलन ने बिहार में शिक्षक भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और योग्यता परीक्षा की महत्ता को फिर से राष्ट्रीय विमर्श में ला दिया है।



