पटना: बिहार विधानसभा चुनाव की तारीखों के ऐलान के बाद NDA और महागठबंधन (INDIA ब्लॉक) में सीट बंटवारे को लेकर तनाव चरम पर है। दोनों गठबंधनों के भीतर सहयोगी दलों की मांगें और शर्तें नेताओं के लिए सिरदर्द बन गई हैं। जहां महागठबंधन में विकासशील इंसान पार्टी (VIP) के प्रमुख मुकेश साहनी की डिप्टी सीएम की मांग ने तेजस्वी यादव की मुश्किलें बढ़ा दी हैं, वहीं NDA में चिराग पासवान की 35 सीटों की जिद ने BJP के माथे पर बल ला दिए हैं।
महागठबंधन में ‘सहनी फैक्टर’ का संकट
महागठबंधन में सबसे बड़ी अड़चन मुकेश साहनी बने हुए हैं। साहनी न केवल अधिक सीटों की मांग कर रहे हैं, बल्कि उन्होंने साफ कह दिया है, जब सरकार बनेगी, तो तेजस्वी यादव मुख्यमंत्री होंगे और मैं डिप्टी सीएम बनूंगा। सूत्रों के अनुसार, सीट बंटवारे पर लगभग सहमति बन चुकी थी, लेकिन साहनी की डिप्टी सीएम की मांग ने मामला उलझा दिया है।
सूत्रों के मुताबिक, महागठबंधन के सीट बंटवारे पर लगभग सहमति बन चुकी है, लेकिन डिप्टी सीएम की दावेदारी को लेकर साहनी झुकने को तैयार नहीं हैं। उन्होंने पिछले तीन महीनों में 27 बार यह बयान दिया है कि वह उपमुख्यमंत्री बनेंगे।
मुख्य बयान तिथियां
- 13 सितंबर: हमारी पार्टी 60 सीटों पर लड़ेगी, मैं डिप्टी सीएम बनूंगा।
- 5 सितंबर, 10 अगस्त, 7 अगस्त, 30 जुलाई: हर मंच पर उन्होंने यही दोहराया।
तेजस्वी यादव की कोशिश है कि साहनी को किसी तरह संतुष्ट किया जाए ताकि गठबंधन में दरार न पड़े। हालांकि, अंदरखाने की खबर यह है कि साहनी एनडीए नेताओं से भी बैक-चैनल बातचीत कर रहे हैं, जिससे महागठबंधन की परेशानी और बढ़ गई है।
एनडीए में ‘चिराग की रोशनी’ ने बढ़ाई BJP की परेशानी
उधर एनडीए (NDA) में भी सीट बंटवारा फंसा हुआ है। लोजपा (रामविलास) के अध्यक्ष चिराग पासवान ने 35 से 40 सीटों की मांग कर दी है, जबकि भाजपा सिर्फ 20 सीटें देने के मूड में है। बीजेपी के चुनाव प्रभारी धर्मेंद्र प्रधान ने कल चिराग पासवान से करीब 40 मिनट तक मुलाकात की, लेकिन नतीजा शून्य रहा। चिराग ने न तो सोशल मीडिया पर तस्वीर साझा की, न ही कोई बयान दिया। बीजेपी ने अपनी ओर से मुलाकात की तस्वीरें जारी कर दीं, पर चिराग की ‘चुप्पी’ बहुत कुछ कह गई।
चुनावी सूत्रों के मुताबिक, चिराग पासवान की नाराजगी सीटों से ज्यादा मंत्रालय और क्षेत्रीय प्रभाव को लेकर है। वे बिहार में वैशाली, हाजीपुर, समस्तीपुर, खगड़िया और जमुई जैसे इलाकों में दो-दो सीटों की मांग कर रहे हैं। इसके अलावा गोविंदगंज सीट पर भी उनकी दावेदारी है, जो फिलहाल बीजेपी के खाते में है।
अंदरूनी सूत्रों की मानें तो-
- बीजेपी और जेडीयू के बीच 103-103 सीटों पर सहमति बनी है।
- HAM (जीतन मांझी) को 25 से 30 सीटें देने पर चर्चा चल रही है।
- जबकि लोजपा (रामविलास) को 20–25 सीटों से ज्यादा देने पर मतभेद जारी है।
धर्मेंद्र प्रधान और अमित शाह की टीम लगातार बैकडोर मीटिंग कर रही है ताकि चिराग को मनाया जा सके, क्योंकि उनकी नाराजगी का सीधा असर पासवान वोट बैंक और युवा मतदाताओं पर पड़ सकता है।
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दोनों गठबंधनों में एक जैसी स्थिति
सहनी और चिराग दोनों अपने-अपने गठबंधन के लिए ‘सिरदर्द’ बने हुए हैं, एक डिप्टी सीएम चाहता है, दूसरा 40 सीटें। ऐसे में बिहार की राजनीति फिलहाल “सीट बंटवारे के संकट” में फंसी हुई है। मतदान की तारीख नजदीक है, लेकिन न महागठबंधन में सहमति बन पाई है, न एनडीए के भीतर तालमेल।
अगले 48 घंटे होंगे निर्णायक
राजनीतिक जानकारों का कहना है कि अगर अगले 48 घंटे में सीट बंटवारे का फॉर्मूला तय नहीं हुआ, तो टिकट वितरण में देरी और बगावत दोनों बढ़ेंगे। अब सबकी नज़रें तेजस्वी यादव और अमित शाह की रणनीति पर टिकी हैं, कौन पहले अपने घर की आग बुझाता है, और कौन बिहार की सियासत में नया समीकरण बनाता है?



