पटना: बिहार विधानसभा चुनाव से पहले महागठबंधन के भीतर सीट बंटवारे का मसला उलझता नजर आ रहा है। कांग्रेस पहले ही 100 सीटों की मांग रखकर समीकरण बिगाड़ चुकी है, वहीं अब भाकपा (माले) ने भी अपनी तरफ से 75 सीटों की लिस्ट आरजेडी (RJD) के सामने रख दी है। माले का दावा है कि इन सीटों पर उसने अपने संभावित उम्मीदवारों के नाम भी लगभग तय कर लिए हैं।
माले की प्रेस कॉन्फ्रेंस में बड़ा बयान
पटना में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में माले के राज्य सचिव रामनरेश पाण्डेय ने कहा,
"2020 विधानसभा चुनाव में हमने सीटों पर समझौता किया था, लेकिन इस बार हमारी प्राथमिकता है कि हम अधिक से अधिक सीटों पर चुनाव लड़ें। हमारी कोशिश है कि हम 40 लोकसभा क्षेत्रों के अंदर चिन्हित विधानसभा सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारें।"
हालांकि, माले के राष्ट्रीय सचिव दीपांकर भट्टाचार्य ने यह भी कहा है कि बंटवारे पर अंतिम निर्णय महागठबंधन की बैठक में विचार-विमर्श के बाद ही होगा।
लेफ्ट पार्टियों की रणनीति
महागठबंधन में फिलहाल तीन वामपंथी दल भाकपा माले, CPI और CPI(M) हैं। वर्तमान में इनके पास कुल 12 विधायक हैं। 2020 के विधानसभा चुनाव में वामपंथी दलों ने 29 सीटों पर चुनाव लड़ा था, जिनमें से 16 पर जीत दर्ज की थी। अब तीनों दल मिलकर 75 सीटों की मांग कर रहे हैं और इसकी लिस्ट RJD को सौंप चुके हैं।
2020 में सीट बंटवारे का फॉर्मूला
2020 विधानसभा चुनाव में महागठबंधन का सीट बंटवारा इस प्रकार हुआ था:-
| पार्टी का नाम | सीटें (2020) | जीती गई सीटें |
|---|---|---|
| RJD | 144 | 75 |
| कांग्रेस (INC) | 70 | 19 |
| CPI | 6 | 2 |
| CPI(M) | 4 | 2 |
| CPI(ML) | 19 | 12 |
इस बार समीकरण क्यों मुश्किल?
पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने हाल ही में अपनी बिहार अधिकार यात्रा समाप्त की है और अब पटना लौटकर सीट बंटवारे पर मंथन शुरू कर दिया है। सूत्रों के अनुसार, इस बार RJD खुद ज्यादा सीटों पर चुनाव लड़ने की रणनीति बना रही है, जबकि कांग्रेस और वाम दल भी सीटों की संख्या बढ़ाने के दबाव में हैं।
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राजनीतिक जानकार मानते हैं कि अगर महागठबंधन सीट बंटवारे के मसले पर समय रहते सहमति नहीं बना पायी, तो यह गठबंधन के लिए घातक साबित हो सकता है। ऐसी स्थिति में सभी दल एक-दूसरे के खिलाफ प्रत्याशी उतार सकते हैं, जिससे विपक्षी मतों का बिखराव तय है।



