कटिहार: बिहार विधानसभा चुनाव की सरगर्मियां तेज होने के साथ ही महिलाओं के वोट बैंक को साधने की जंग छिड़ गई है। बिहार सरकार की ओर से घोषित मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना महिलाओं को छोटे-मोटे व्यापार शुरू करने के लिए 10 हजार रुपये की आर्थिक मदद देने का वादा कर रही है, जिसे नीतीश कुमार का ‘मास्टरस्ट्रोक’ कहा जा रहा है। लेकिन विपक्षी राष्ट्रीय जनता दल (RJD) इसे महज चुनावी हथकंडा बताकर अपनी ‘माई बहिन योजना’ को ज्यादा विश्वनीय होने का दमभर रही है, जो महिलाओं को 2,500 रुपये मासिक सहायता समेत कई स्थायी लाभ देने का दावा करती है।
ब्लैकबोर्ड पाठशाला अभियान
कटिहार के वार्ड नंबर एक में RJD ने अनोखा ‘ब्लैकबोर्ड पाठशाला अभियान’ चलाया, जो किसी वयस्क शिक्षा कार्यक्रम की तरह लग सकता है, लेकिन असल में यह महिलाओं को राजनीतिक जागरूकता का पाठ पढ़ाने का मंच था। RJD के प्रदेश महासचिव समरेंद्र कुणाल के नेतृत्व में आयोजित इस कार्यक्रम में दर्जनों महिलाओं ने शिरकत की। यहां महिलाओं को समझाया गया कि चुनाव के बाद RJD की सरकार बनने पर ‘माई बहिन योजना’ के जरिए उन्हें न सिर्फ आर्थिक सहायता मिलेगी, बल्कि अन्य कल्याणकारी योजनाओं से भी जोड़ा जाएगा। समरेंद्र कुणाल ने तीखे शब्दों में कहा, “महिलाओं को यह समझना जरूरी है कि नीतीश सरकार की योजना ब्याज की शर्तों पर आधारित है और यह BJP-JDU का वोट बैंक बनाने का चुनावी स्टंट मात्र है।
माई बहिन योजना
आरजेडी का दावा है कि उसकी मार महिलाओं की असली सशक्तिकरण पर फोकस करती है, जो स्थायी और व्यावहारिक है।
यह सियासी जंग बिहार चुनाव की दिशा तय कर सकती है, क्योंकि महिलाएं राज्य में वोटरों का बड़ा हिस्सा हैं। नीतीश की योजना को जहां ग्रामीण महिलाओं के बीच लोकप्रियता मिल रही है, वहीं RJD का अभियान शहरी और ग्रामीण दोनों इलाकों में जोर पकड़ रहा है। अब सवाल यह है कि चुनावी मैदान में इन योजनाओं का असर किस पार्टी के पक्ष में जाएगा? क्या नीतीश का ‘मास्टरस्ट्रोक’ कामयाब होगा या RJD की ‘माई बहिन’ महिलाओं का दिल जीतेगी? आने वाले दिन इसकी तस्वीर साफ करेंगे।



