जहानाबाद: बिहार विधानसभा चुनाव को लेकर अब तक किसी भी गठबंधन या दल की ओर से प्रत्याशियों की आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। हालांकि, संभावित उम्मीदवार जमीनी स्तर पर सक्रिय दिखाई दे रहे हैं। इस बार का चुनाव जन सुराज की एंट्री से काफी दिलचस्प हो सकता है। परंपरागत रूप से एनडीए और महागठबंधन जिस जातीय समीकरण के आधार पर अपने उम्मीदवार मैदान में उतारते रहे हैं, उसमें जन सुराज सेंधमारी की कोशिश कर रहा है।
जन सुराज की रणनीति, दोनों प्रमुख गठबंधनों एनडीए और महागठबंधन के चुनावी गणित को बिगाड़ने की दिशा में नजर आ रही है। ऐसे में पहले जैसा समीकरण बनाए रखना अब इन दोनों ही गठबंधनों के लिए एक कड़ी चुनौती बनता जा रहा है।
अरवल विधानसभाः यादव समाज की नाराजगी से बिगड़ सकता है समीकरण
अगर अरवल विधानसभा सीट की बात करें तो यहां एनडीए की ओर से भाजपा भूमिहार समाज के उम्मीदवार को चुनाव मैदान में उतारती रही है। वहीं, वर्तमान विधायक महागठबंधन के घटक दल भाकपा (माले) से महानंद सिंह हैं, जो एक बार फिर मैदान में उतरने की तैयारी कर रहे हैं। उनका टिकट लगभग तय माना जा रहा है।
महानंद सिंह कुशवाहा जाति से आते हैं। पिछले चुनाव में उन्हें महागठबंधन के आधार वोटों के साथ-साथ कुशवाहा समुदाय का भी भरपूर समर्थन मिला था, जिससे वे भाजपा के दीपक शर्मा को भारी अंतर से हराने में सफल रहे थे। हालांकि, विधायक रहते हुए उनके कार्यकाल में यादव समाज के बीच असंतोष की स्थिति उभरी है, जबकि अरवल में यादव मतदाता सबसे बड़ी संख्या में हैं। इस नाराजगी को जन सुराज ने पहचान लिया है, जिसके चलते इसके संभावित उम्मीदवारों में यादव समाज की सक्रिय भागीदारी देखी जा रही है। अगर जन सुराज यादव उम्मीदवार को मैदान में उतारती है, तो यह महागठबंधन के लिए सीधी चुनौती बन सकती है।
कुर्था विधानसभा: एनडीए को नुकसान की आशंका
कुर्था विधानसभा में अब तक दोनों गठबंधनों की ओर से अधिकतर कुशवाहा समाज के उम्मीदवार मैदान में रहे हैं। वर्तमान विधायक कुशवाहा समाज के कुमार वर्मा हैं, जो राजद से निर्वाचित होकर पहुंचे हैं। एनडीए की ओर से भी इस बार कुशवाहा उम्मीदवार को उतारने की तैयारी है। इसी बीच, जन सुराज की योजना अति पिछड़ा या भूमिहार समाज से उम्मीदवार उतारने की है। ये जातियां आमतौर पर एनडीए के कोर वोट बैंक मानी जाती हैं। यदि ऐसा होता है, तो यहां एनडीए को प्रत्यक्ष नुकसान हो सकता है।
जहानाबाद विधानसभा: NDA का परंपरागत समीकरण टूट सकता है
जहानाबाद विधानसभा क्षेत्र में जन सुराज की ओर से एक प्रमुख स्कूल संचालक, जो भूमिहार समाज से आते हैं, संभावित उम्मीदवार के रूप में सक्रिय हैं। यहां से एनडीए भी परंपरागत रूप से भूमिहार समाज के उम्मीदवार को टिकट देती रही है (2020 को छोड़कर)। ऐसे में जन सुराज का उम्मीदवार एनडीए के वोट बैंक में सेंध लगा सकता है।
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घोसी विधानसभा: यादव उम्मीदवार उतार सकती है जन सुराज
घोसी विधानसभा की बात करें तो यहां जन सुराज से दिवंगत चार बार के सांसद रामाश्रय प्रसाद की पुत्रवधू मैदान में उतरने तैयारी में हैं, जो यादव समाज से आती हैं। उनका टिकट लगभग तय माना जा रहा है। इस सीट से राजद की ओर से जगदीश शर्मा के पुत्र राहुल कुमार मैदान में उतरने की कोशिश कर रहे हैं, जो भूमिहार समाज से हैं। एनडीए भी इसी जाति से उम्मीदवार उतारने की तैयारी में है। ऐसे में जन सुराज ही एकमात्र पार्टी हो सकती है जो यहां से यादव उम्मीदवार उतारेगी, जिससे महागठबंधन के लिए मुश्किलें खड़ी हो सकती हैं।
मखदुमपुर सीट: फिलहाल जन सुराज का प्रभाव नहीं
मखदुमपुर, जो एक सुरक्षित सीट है, वहां जन सुराज का कोई विशेष प्रभाव फिलहाल नजर नहीं आ रहा है।
जन सुराज की रणनीतिक एंट्री ने जहानाबाद, अरवल, कुर्था और घोसी जैसे विधानसभा क्षेत्रों में परंपरागत राजनीतिक समीकरणों को बिगाड़ने का काम किया है। जातीय आधार पर वोट बैंक में नई खींचतान शुरू हो चुकी है और प्रत्याशियों की घोषणा से पहले ही यह स्पष्ट हो गया है कि यह चुनाव तीर और तीरछे चलने वाला है। अब देखना यह होगा कि जन सुराज की यह सेंधमारी किस गठबंधन को भारी पड़ती है, एनडीए या महागठबंधन?



