पटना: बिहार सरकार अब अपनी पहुंच और पहचान को देश के प्रमुख शहरों तक पहुँचाने की तैयारी में है। उद्योग विभाग ने देश के 10 प्रमुख मेट्रो शहरों में ‘इंटीग्रेटेड सेंटर ऑफ बिहार’ स्थापित करने के लिए एक व्यापक कार्ययोजना बनाई है। इन केंद्रों का उद्देश्य न केवल प्रवासी बिहारियों को मदद पहुंचाना है, बल्कि स्थानीय लोगों को बिहार की संस्कृति, कला और विकास के बारे में विस्तृत जानकारी देना भी है।
देश के हर कोने में फैलेगी बिहार की चमक
यह योजना दिल्ली और मुंबई में पहले से चल रहे छोटे केंद्रों का विस्तार है, जिन्हें अब एक नए और एकीकृत स्वरूप में विकसित किया जाएगा। इन केंद्रों को इस तरह से स्थापित करने का प्रस्ताव है कि बिहार की पहुंच उत्तर, दक्षिण, पूर्व और पश्चिम भारत के हर हिस्से तक हो सके। इन केंद्रों का मकसद बिहार की लोक कला और संस्कृति को वहां के स्थानीय लोगों से सीधा जोड़ना है।
बिहार के उद्योग मंत्री नीतीश मिश्रा ने कहा कि यह सेंटर स्थानीय स्तर पर बिहार के लोगों के लिए एक महत्वपूर्ण केंद्र होगा। साथ ही यह स्थानीय लोगों को बिहार के बारे में जानकारी देने और यहां निवेश के इच्छुक लोगों के लिए सूचनाएं उपलब्ध कराने का एक अहम मंच बनेगा।
इन शहरों में खुलेंगे केंद्र
उद्योग विभाग के बिहार फाउंडेशन के तत्वावधान में तैयार किए गए इस खाके के अनुसार, इन केंद्रों की स्थापना के लिए जिन 10 शहरों का प्रस्ताव है। इनमें कोलकाता, बेंगलुरु, हैदराबाद, चेन्नई, सूरत, पुणे, चंडीगढ़, गुवाहाटी, कोयम्बटूर और लुधियाना शामिल हैं।
‘बिहारिका’ और ‘आहारिका’ होंगी मुख्य पहचान
ये केंद्र लगभग 4000 वर्ग फुट के क्षेत्र में स्थापित किए जाएंगे और इनमें कई विभागों के कार्यालय होंगे। इन केंद्रों का मुख्य आकर्षण इसकी विशेष व्यवस्था होगी।
बिहारिका
बिहार की कला, संस्कृति और हस्तकला के प्रचार-प्रसार के लिए एक विशेष उपकेंद्र होगा। यहां बिहार के पारंपरिक शिल्प को बढ़ावा दिया जाएगा और पर्व-त्योहारों का आयोजन किया जाएगा, जिसमें बिहारी और स्थानीय लोग मिलकर हिस्सा लेंगे।
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आहारिका
बिहारी व्यंजनों को बढ़ावा देने के लिए एक अलग व्यवस्था होगी, जो इस सेंटर का विशेष प्रक्षेत्र होगा।
इन केंद्रों में उद्योग, स्वास्थ्य, पर्यटन, श्रम संसाधन, सूचना एवं जनसंपर्क जैसे विभागों के कार्यालय भी होंगे। इसके अलावा, बिहार में निवेश के लिए एक इन्वेस्टमेंट सेल का भी दफ्तर होगा। दिल्ली के बिहार भवन और बिहार निवास की तर्ज पर इन केंद्रों में रहने की भी सुविधा मिलेगी। यह पहल बिहार की पहचान को राष्ट्रीय पटल पर और अधिक मजबूती से स्थापित करने का एक बड़ा कदम है।



