अमनौर विधानसभा : जहां खेती खिलती है, सियासत उलझती है

वर्ष 2008 के परिसीमन के बाद अस्तित्व में आई अमनौर विधानसभा क्षेत्र पिछले ड़ेढ दशक में तीन विस चुनावों का गवाह बनी। हर बार अलग-अलग सियासी समीकरणों के साथ एनडीए ने बाजी मारी।

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मढ़ौरा: अमनौर विधानसभा एक ऐसा विधानसभा क्षेत्र है जहां खेती खिलती है और सियासत उलझती है। गंडक, मही और डबरा नदियों की गोद में बसा अमनौर विधानसभा क्षेत्र भले ही खेती-किसानी की उर्वर जमीन के लिए जाना जाता हो, लेकिन इसका सियासी मैदान उतना ही पेंचीदा है। वर्ष 2008 के परिसीमन के बाद अस्तित्व में आई यह सीट पिछले ड़ेढ दशक में तीन बार विधानसभा चुनावों का गवाह बनी और हर बार अलग-अलग सियासी समीकरणों के साथ एनडीए ने बाजी मारी, लेकिन जीत का अंतर हर बार सिमटता गया, जिसने इस सीट को सियासी दंगल का रोमांचक अखाड़ा बना दिया है।

सियासी रण का रोमांच

वर्ष 2010 में जदयू के टिकट पर कृष्ण कुमार मंटू ने निर्दलीय सुनील कुमार राया को 10 हजार से ज्यादा वोटों से धूल चटाइ थी। लेकिन 2015 में एनडीए गठबंधन टूटने के बाद माहौल बदला। भाजपा के शत्रुघ्न तिवी उर्फ चोकर बाबा ने मंटू को 5368 वोटों के अंतर से पटखनी दी। वर्ष 2020 में भाजपा ने चोकर बाबा का टिकट काटकर फिर से मंटू को मौका दिया। मंटू ने कांटे की टक्कर में राजद के सुनील कुमार राय को 5368 वोटों से हराया जबिक चोकर बाबा तीसरे पायदान पर खिसक गए।

क्यों खास है अमनौर

यह सीट एनडीए के लिए दो कारणों से सोने की खान है। पहला वर्तमान में विधायक मंटू राज्य सरकार में सूचपस प्रौद्योगिकी मंत्री हैं। दूसरा यह क्षेत्र भाजपा सांसद राजीव प्रताप रूडी का गृहक्षेत्र है। ऐसे में इस सीट पर एनडीए की प्रतिष्ठा दांव पर रही है।

चुनावी सरगर्मी

चुनवी बिगुल बजने से पहले ही सभी दल मैदान में डट गए हैं। एनडीए सड़क, बिजली और शिक्षा के साथ विकास कार्यों का ढोल पीट रहा है। राजद अपने परंपरागत वोट बैंक को और मजबूत करने की जुगत में है। टिकट के दावेदारों की लंबी फेहरिस्त भी चर्चा में है। उधर प्रशांत किशोर की जनसुराज पार्टी पंचायतों में जनसंवाद के जरिए हर वर्ग को साधने की कोशिश कर रही है। किशोर की सभा ने भी यहां सियासी हलचल बढ़ा दी है।

खेती किसानी का गढ़

अमनौर की अर्थव्यवस्था खेती पर टिकी है। धान, गेहूं, सरसों और मक्का यहां की प्रमुख फसलें हैं। वैष्णव देवी गुफा और लेजर शो वाला बड़ा तालाब इस क्षेत्र की सांस्कृतिक शान हैं।

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आने वाला दंगल

जैसे-जैसे चुनाव नजदीक आ रहा है, अमनौर का सियासी तापमान बढ़ता जा रहा है। उपजाऊ जमीन पर सियासी फसल कौन काटेगा, यह तो समय और वोटर तय करेंगे लेकिन इतना तय है कि इस बार का रण हर बार की तरह रोमांच से भरा होगा।

वादे जो पूरे नहीं हुए

मुजफ्फरपुर से मकेर, सोनहो, भेल्दी होते छपरा तक रेल लाइन का निर्माण पूरा नहीं। ग्रामीण् क्षेत्रों में बिजली की अनियमित आपूर्ति। किसानों के लिए सरकारी सिंचाई व्यवस्था नदारत। ग्रामीण जर्जर सड़कों की स्थिति जस की जस। ग्रामीण क्षेत्र के स्कूलों में भवन व शिक्षकों की कमी और गांव के स्वास्थ्य उपकेंद्रों की स्थिति सुधार नहीं

Sanjay Rai

sanjayrai.dj@gmail.com

संजय राय ने बीते 25 साल के प्रोफेशनल कैरियर में स्वास्थ्य, अपराध, शिक्षा, विकास समेत सभी बीट की कवरेज की है। दिल्ली सरकार, विधानसभा की कार्यवाही, भाजपा, कांग्रेस, आप सरीखे राजनीतिक दलों के साथ सामाजिक-सांस्कृतिक व आंदोलनात्मक गतिविधियों को भी कवर किया है। कई सत्रों में संसद की कार्यवाही पर भी कलम चलाई है। फिलवक्त NewG India में बतौर सीनियर स्पेशल काॅरेस्पोंडेंट अपनी जिम्मेदारी निभा रहे हैं।

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