नई दिल्ली: भारतीय भारोत्तोलक प्रीतिस्मिता भोई (Preetismita Bhoi) ने एशियाई यूथ खेलों (Asian Youth Games) में शानदार प्रदर्शन करते हुए विश्व रिकॉर्ड के साथ स्वर्ण पदक अपने नाम किया। यह भारत का इस प्रतियोगिता में तीसरा गोल्ड मेडल है। महज 16 साल की प्रीतिस्मिता ने 44 किलोग्राम भार वर्ग में कुल 158 किलो वजन उठाते हुए इतिहास रच दिया। उन्होंने स्नैच में 66 किलो और क्लीन एंड जर्क में 92 किलो वजन उठाकर यूथ कैटेगरी का नया विश्व रिकॉर्ड बनाया।
रिकॉर्डतोड़ प्रदर्शन से भारत को तीसरा स्वर्ण
प्रीतिस्मिता के इस प्रदर्शन ने भारत को एशियाई यूथ खेलों में गौरव दिलाया है। उन्होंने राष्ट्रमंडल चैंपियनशिप में भी स्वर्ण पदक जीतकर अपनी क्षमता साबित की थी, जहां उन्होंने 150 किलो वजन उठाया था। इस बार एशियाई मंच पर उन्होंने अपने पिछले रिकॉर्ड को पीछे छोड़ते हुए शानदार प्रदर्शन किया।
हालांकि उनकी स्नैच की दो लिफ्ट असफल रही थीं, लेकिन उन्होंने अपनी गलती की भरपाई क्लीन एंड जर्क में कर ली। उन्होंने 87, 90 और 92 किलो की तीनों लिफ्ट्स में कमाल दिखाया और अंततः गोल्ड अपने नाम किया। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर स्नैच में उनकी लिफ्ट सफल होती, तो वह कुल स्कोर में 160 किलो का आंकड़ा भी पार कर सकती थीं।
संघर्ष और हौसले की कहानी
प्रीतिस्मिता की सफलता के पीछे एक भावनात्मक कहानी भी जुड़ी है। जब वह मात्र दो वर्ष की थीं, तब उनके पिता का निधन हो गया था। उनकी मां ने अकेले ही दोनों बेटियों — प्रीतिस्मिता और उनकी बड़ी बहन — का पालन-पोषण किया। शुरुआत में दोनों एथलेटिक्स में हिस्सा लेती थीं, लेकिन मोदीनगर स्थित भारतीय टीम के मुख्य प्रशिक्षक विजय शर्मा और कोच गोपाल दास ने उनकी प्रतिभा को पहचाना और उन्हें वेटलिफ्टिंग में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।
शुरुआत में उनकी मां इस खेल में उन्हें भेजने से हिचक रही थीं, लेकिन कोच के समझाने और बेटियों के उत्साह को देखकर उन्होंने अनुमति दे दी। इसके बाद से ही प्रीतिस्मिता ने वेटलिफ्टिंग को अपना जीवन बना लिया।
विश्व यूथ चैंपियनशिप की भी विजेता
प्रीतिस्मिता ने पिछले वर्ष विश्व यूथ चैंपियनशिप (Youth World Champion) में भी 40 किलोग्राम भार वर्ग में स्वर्ण पदक जीता था। अब एशियाई स्तर पर गोल्ड जीतकर उन्होंने एक बार फिर यह साबित किया है कि वह भारत की उभरती हुई स्टार वेटलिफ्टर हैं।
कोच विजय शर्मा के मार्गदर्शन में प्रशिक्षण ले रही प्रीतिस्मिता को अब ओलंपिक तैयारी योजना (TOPS) के तहत भी समर्थन मिलने की उम्मीद है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर वह इसी फॉर्म में रहीं, तो आने वाले वर्षों में भारत को ओलंपिक पदक दिलाने वाली प्रमुख दावेदारों में शामिल होंगी।



