कृषि मंत्रालय: धान की किस्मों में नाइट्रोजन उपयोग की भारी असमानता

मंत्रालय ने 14 अक्टूबर 2025 को नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) में दाखिल हलफनामे में स्वीकार किया कि मीडिया रिपोर्ट्स में उजागर मुद्दे पूरी तरह सही।

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नई दिल्ली: देश में उगाई जा रही प्रमुख धान की किस्मों के बीच नाइट्रोजन उर्वरक के इस्तेमाल की दक्षता में व्यापक फर्क देखा जा रहा है, जिसे कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय ने बड़ी समस्या करार दिया है। मंत्रालय ने 14 अक्टूबर 2025 को नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) में दाखिल हलफनामे में स्वीकार किया कि मीडिया रिपोर्ट्स में उजागर मुद्दे पूरी तरह सही हैं। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) लगातार ऐसी नई धान किस्में विकसित करने में जुटा है, जो कम नाइट्रोजन में बेहतर पैदावार दें और जलवायु परिवर्तन की मार झेल सकें। इन किस्मों को देश के अलग-अलग इलाकों में टेस्टिंग के बाद किसानों तक पहुंचाया जाता है।

फसल विविधीकरण कार्यक्रम

सरकार राज्य स्तर पर उर्वरकों के संतुलित प्रयोग और मिट्टी की सेहत सुधारने के लिए कई कार्यक्रम चला रही है। इनमें मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना अहम है, जिसमें किसानों को उनकी खेत की मिट्टी में पोषक तत्वों की मात्रा बताई जाती है और सही खाद की सलाह दी जाती है। फसल विविधीकरण कार्यक्रम के जरिए पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश जैसे इलाकों में पानी गटकने वाले धान की जगह दालें, तिलहन, मोटे अनाज, कपास और वन उत्पादों की खेती को प्रोत्साहन मिल रहा है, ताकि मिट्टी की उर्वरता बनी रहे और भूजल स्तर गिरने से बचा जा सके। परंपरागत कृषि विकास योजना और उत्तर-पूर्वी क्षेत्र के लिए ऑर्गेनिक वैल्यू चेन मिशन जैविक खेती को बढ़ावा देकर यूरिया जैसे नाइट्रोजन उर्वरकों की अंधाधुंध खपत पर लगाम लगा रहे हैं।

उत्तराखंड में नियंत्रित आग से जंगल प्रबंधन, वन विभाग की रिपोर्ट से एनजीटी को मिली राहत

देहरादून: उत्तराखंड के बड़कॉट वन क्षेत्र में देहरादून-ऋषिकेश हाईवे किनारे सूखी पत्तियों को जंगल की आग रोकने के लिए अधिकारी की देखरेख में सुरक्षित ढंग से जलाया गया। भारतीय वन सर्वेक्षण (एफएसआई) ने 16 अक्टूबर 2025 को एनजीटी में सौंपी रिपोर्ट में यह खुलासा किया। यह कदम ट्रिब्यूनल के 21 अक्टूबर 2024 और 10 सितंबर 2025 के निर्देशों पर उठाया गया। पिछले साल 11 नवंबर को एफएसआई ने उत्तराखंड वन विभाग से विस्तृत जानकारी मांगी थी, जिसके जवाब में 24 दिसंबर 2024 को विभाग ने रिपोर्ट दी कि हाईवे को अग्नि रेखा मानकर संवेदनशील जोन में सतर्कता से नियंत्रित जलाने की रणनीति अपनाई गई।

पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय संरक्षित इलाकों के बेहतर प्रबंधन के लिए नई गाइडलाइंस तैयार कर रहा है। 9 अक्टूबर 2025 को एनजीटी को दी जानकारी में मंत्रालय ने बताया कि अन्य विभागों से सलाह ली जा रही है। लद्दाख को पक्षियों पर वैज्ञानिक रिसर्च की पूरी छूट है, जिस पर ट्रिब्यूनल ने 16 नवंबर 2024 की एक मीडिया रिपोर्ट के आधार पर स्वतः संज्ञान लिया था। ये कदम जंगल आग और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में ठोस प्रयास दर्शाते हैं।

Usha Mehta

ushamehta0013@gmail.com

NewG India का सबसे युवा चेहरा, दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता में स्नातक की डिग्री हासिल की। ग्रेजुएशन के बाद IGNOU और ABP न्यूज़ नेटवर्क जैसे संस्थानों में इंटर्नशिप की। सोशल और कॉमर्स विषयों की गहरी समझ हैं कलम के साथ आवाज में भी धार हैं। NewG India में बतौर कंटेंट डेवलपर व एंकर अपनी जिम्मेदारी उषा मेहता बखूबी निभा रही हैं ।

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