नई दिल्ली: भारतीय क्रिकेट टीम (Indian Cricket Team) इन दिनों इंग्लैंड दौरे पर पांच मैचों की टेस्ट सीरीज खेल रही है। लॉर्ड्स में चल रहे तीसरे टेस्ट मैच के बीच टीम की कुछ सीनियर खिलाड़ियों की फॉर्म चिंता का विषय बन गई है। कप्तान रोहित शर्मा (Rohit Sharma) और विराट कोहली (Virat Kohli ) के टेस्ट क्रिकेट से संन्यास के बाद भारतीय टीम में कई पुराने चेहरों को फिर से मौका दिया गया, लेकिन अब तक का प्रदर्शन निराशाजनक रहा है।
गौतम गंभीर (Gautam Gambhir) की कोचिंग में नई शुरुआत करने वाली टीम इंडिया के लिए यह सीरीज कई खिलाड़ियों के लिए ‘करो या मरो’ जैसी साबित हो रही है। खासतौर पर तीन सीनियर खिलाड़ी ऐसे हैं जिनका प्रदर्शन अपेक्षा के मुताबिक नहीं रहा। अगर ये खिलाड़ी आगामी ओवल टेस्ट में भी प्रभाव नहीं छोड़ पाए, तो टीम में वापसी की राह मुश्किल हो सकती है।
1. शार्दुल ठाकुर
ऑलराउंडर शार्दुल ठाकुर (Shardul Thakur) को लंबे समय बाद टेस्ट टीम में जगह मिली। 2023 के बाद पहली बार उन्हें इंग्लैंड दौरे पर मौका मिला, लेकिन लीड्स टेस्ट में सिर्फ दो विकेट लेकर ही सीमित रह गए। इसके बाद उन्हें एजबेस्टन टेस्ट से बाहर कर दिया गया। 33 वर्षीय शार्दुल ने अब तक 12 टेस्ट में 336 रन और 33 विकेट लिए हैं। अगर उन्हें ओवल टेस्ट में मौका नहीं मिला या प्रदर्शन प्रभावी नहीं रहा, तो यह उनका आखिरी टेस्ट साबित हो सकता है।
2. करुण नायर
करुण नायर (Karun Nair) को लगभग आठ साल के लंबे अंतराल के बाद टेस्ट टीम में शामिल किया गया। गौतम गंभीर के नेतृत्व में उन्हें लीड्स और एजबेस्टन में खेलने का अवसर भी मिला, लेकिन दोनों मैचों में वे रन बनाने में नाकाम रहे। लीड्स में शून्य पर आउट होने के बाद, एजबेस्टन में भी उनका बल्ला शांत रहा। 8 टेस्ट में 451 रन बना चुके करुण को अगर लॉर्ड्स और ओवल में प्रभावशाली पारी नहीं खेली, तो वापसी की उम्मीदें क्षीण हो सकती हैं।
3. रवींद्र जडेजा
अनुभवी ऑलराउंडर रवींद्र जडेजा (Ravindra Jadeja) से हमेशा बड़ी उम्मीदें रहती हैं, लेकिन इंग्लैंड दौरे पर उनका प्रदर्शन औसत रहा है। लीड्स और एजबेस्टन दोनों मैचों में उन्होंने केवल एक-एक विकेट लिए हैं। बल्लेबाजी में हालांकि एजबेस्टन में दो अर्धशतक जरूर लगाए, लेकिन उनके स्तर के खिलाड़ी से इससे बेहतर की उम्मीद थी। अब तक 82 टेस्ट में 325 विकेट और 3564 रन बना चुके जडेजा पर भी प्रदर्शन का दबाव है।
ओवल टेस्ट निर्णायक साबित हो सकता है
31 जुलाई से लंदन के ओवल मैदान पर खेले जाने वाला अंतिम टेस्ट मैच इन खिलाड़ियों के लिए निर्णायक हो सकता है। अगर यहां भी उम्मीदों पर खरे नहीं उतर पाए, तो चयनकर्ता भविष्य की योजना बनाते समय इन्हें नजरअंदाज कर सकते हैं। युवा खिलाड़ियों की कतार और कड़ी प्रतिस्पर्धा को देखते हुए हर मैच अब मौके से ज्यादा चुनौती बनता जा रहा है।



