Donald Trump का सपना, Mount Rushmore पर हो उनकी छवि

राष्ट्रपति ट्रंप ने अपनी नोबेल पुरस्कार की चाहत तो कई बार जाहिर की है, लेकिन इसके अलावा एक और सपना है। यह उनके दिल के करीब है। और वह है माउंट रश्मोर की विशाल चट्टानों पर अपनी मूर्ति देखना।

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नई दिल्ली: अमेरिका के राष्ट्रपति के रूप में अपनी दूसरी पारी शुरू करने के बाद डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) की एक खास इच्छा फिर से चर्चा में है। नोबेल पुरस्कार की चाहत तो उनकी हमेशा रही, लेकिन इसके अलावा एक और सपना है जो उनके दिल के करीब है, माउंट रश्मोर की विशाल चट्टानों पर अपनी मूर्ति देखना। यह इच्छा ट्रंप ने अपने पहले कार्यकाल में भी जाहिर की थी, जब उन्होंने तत्कालीन होमलैंड सिक्योरिटी सेक्रेटरी क्रिस्टी नोएम के साथ इस बारे में बात की थी। क्रिस्टी ने तब ट्रंप को माउंट रश्मोर का एक छोटा मॉडल भेंट किया था, जिसमें उनका चेहरा भी शामिल था। अब, दोबारा राष्ट्रपति बनने के बाद, माउंट रश्मोर पर ट्रंप की मूर्ति की चर्चा फिर से जोर पकड़ रही है।
इस साल की शुरुआत में फ्लोरिडा की सांसद अन्ना पॉलिना लूना ने एक प्रस्ताव पेश किया, जिसमें सुझाव दिया गया कि ट्रंप का चेहरा माउंट रश्मोर पर उकेरा जाना चाहिए। उनका तर्क था कि ट्रंप ने अपने कार्यकाल में इतने महत्वपूर्ण काम किए हैं कि वे इस सम्मान के हकदार हैं। हालांकि, इस प्रस्ताव पर अभी तक कोई अंतिम निर्णय नहीं हुआ है। सवाल यह है कि क्या माउंट रश्मोर पर, जहां पहले से ही चार महान अमेरिकी राष्ट्रपतियों की मूर्तियां मौजूद हैं, ट्रंप का चेहरा जोड़ा जा सकता है? और क्या वहां इसके लिए जगह भी है? आइए, पहले माउंट रश्मोर के महत्व को समझते हैं और फिर इस सवाल का जवाब तलाशते हैं।

माउंट रश्मोर: अमेरिकी इतिहास का प्रतीक
माउंट रश्मोर, साउथ डकोटा के ब्लैक हिल्स क्षेत्र में स्थित एक ऐतिहासिक स्मारक है, जिसे “लोकतंत्र का मंदिर” भी कहा जाता है। इस स्मारक पर ग्रेनाइट की विशाल चट्टानों में चार अमेरिकी राष्ट्रपतियों-जॉर्ज वॉशिंगटन, थॉमस जेफरसन, थियोडोर रूजवेल्ट और अब्राहम लिंकन-के चेहरे नक्काशी किए गए हैं। इस स्मारक को गटजॉन बोर्गलम ने डिजाइन किया था, और इसे अमेरिकी इतिहास और कला का एक अनूठा नमूना माना जाता है।

चार राष्ट्रपतियों का चयन क्यों?
बोर्गलम ने इन चार राष्ट्रपतियों को उनके ऐतिहासिक योगदान के आधार पर चुना;
जॉर्ज वॉशिंगटन: अमेरिका के पहले राष्ट्रपति, जिन्होंने स्वतंत्रता संग्राम का नेतृत्व किया और देश में लोकतंत्र की नींव रखी।
थॉमस जेफरसन: तीसरे राष्ट्रपति, जिनके कार्यकाल में लुइसियाना खरीद ने अमेरिका का क्षेत्रफल दोगुना किया।
थियोडोर रूजवेल्ट: 26वें राष्ट्रपति, जिन्होंने पनामा नहर के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जिससे देश के पूर्वी और पश्चिमी हिस्से जुड़े।
अब्राहम लिंकन: 16वें राष्ट्रपति, जिन्होंने गृहयुद्ध के दौरान देश को एकजुट रखा और गुलामी के खात्मे में योगदान दिया।

इन चेहरों को उकेरने का मकसद अमेरिका के निर्माण, विस्तार, विकास और एकता के प्रतीकों को अमर करना था।

ट्रंप का चेहरा: क्या यह संभव है?
माउंट रश्मोर को अमेरिका की आजादी के 150वें साल के उपलक्ष्य में बनाया गया था। अब जब अमेरिका अपनी आजादी के 250वें साल की ओर बढ़ रहा है, इस स्मारक में बदलाव की चर्चा फिर से शुरू हो गई है। पहले भी कई बार नए चेहरों के लिए सुझाव आए थे, जैसे फ्रैंकलिन डी. रूजवेल्ट, जॉन एफ. केनेडी और रोनाल्ड रीगन, लेकिन ये विचार कभी फलीभूत नहीं हुए। कई लोग माउंट रश्मोर को एक पूर्ण कला कृति मानते हैं, जिसे बदलना उचित नहीं। उनका कहना है कि जैसे मशहूर पेंटिंग्स में बदलाव नहीं किया जाता, वैसे ही इस स्मारक को भी वैसे ही रहने देना चाहिए।

विशेषज्ञों की राय
भूगर्भशास्त्रियों और माउंट रश्मोर की देखरेख करने वाली नेशनल पार्क सर्विस के अनुसार, इस स्मारक पर नया चेहरा जोड़ना लगभग असंभव है। पहली वजह यह है कि चट्टानों की संरचना अब और नक्काशी के लिए उपयुक्त नहीं है। बोर्गलम को भी अपने समय में चट्टानों की कमजोरियों के कारण कई डिजाइनों को बदलना पड़ा था। दूसरी वजह यह है कि स्मारक को एक पूर्ण कला कृति माना जाता है, और वहां नया चेहरा जोड़ने के लिए पर्याप्त जगह भी नहीं बची है।

निष्कर्ष
डोनाल्ड ट्रंप की माउंट रश्मोर पर अपनी मूर्ति देखने की इच्छा उनके प्रशंसकों के बीच उत्साह पैदा करती है, लेकिन तकनीकी और सांस्कृतिक कारणों से यह संभव नहीं लगता। माउंट रश्मोर न केवल एक स्मारक है, बल्कि अमेरिकी इतिहास और मूल्यों का प्रतीक भी है। इसे बदलने का विचार विवादास्पद हो सकता है, और विशेषज्ञों की राय इसे और जटिल बनाती है। फिर भी, ट्रंप का यह सपना उनके व्यक्तित्व और महत्वाकांक्षा को दर्शाता है, जो हमेशा चर्चा का विषय बना रहता है।

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