नई दिल्ली: भारतीय भाला फेंक (Javelin Throw) एथलीट सचिन यादव (Sachin Yadav) ने टोक्यो में चल रही अपनी पहली विश्व चैंपियनशिप (World Championship) में बेहतरीन प्रदर्शन कर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कराई। हालांकि कांस्य पदक हाथ से फिसल जाने की निराशा उनके चेहरे पर साफ झलक रही थी। सचिन का यह केवल दूसरा अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट था, फिर भी उन्होंने दुनिया के दिग्गज एथलीटों को पछाड़ते हुए शानदार शुरुआत की।
दिग्गजों से आगे निकले सचिन
गुरुवार को हुए मुकाबले में सचिन यादव ने पहले ही प्रयास में 86.27 मीटर का भाला फेंका। यह उनके करियर का अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन रहा। इस थ्रो के दम पर उन्होंने दो बार के ओलंपिक पदक विजेता नीरज चोपड़ा (Neeraj Chopra) (84.03 मीटर), मौजूदा ओलंपिक चैंपियन अरशद नदीम (82.75 मीटर) और डायमंड लीग विजेता जूलियन वेबर (86.11 मीटर) जैसे खिलाड़ियों को पीछे छोड़ दिया। सचिन ने बताया कि जब उन्होंने अपना भाला गिरते हुए देखा तो उन्हें लगा कि इस बार पदक जरूर मिलेगा। उन्हें भरोसा था कि 87 मीटर का थ्रो भी किया जा सकता है। लेकिन शुरुआती बढ़त के बावजूद अगले पांच प्रयासों में वह अपने पहले थ्रो से आगे नहीं निकल सके।
पदक हाथ से निकलने का मलाल
सचिन का कहना था कि शुरुआती थ्रो के बाद उन्हें पदक की उम्मीद पक्की लग रही थी। लेकिन बार-बार प्रयास करने के बावजूद वे बेहतर प्रदर्शन नहीं कर सके। उन्होंने कहा, “मुझे लगता है कि मैंने अपनी पूरी कोशिश के बावजूद विश्व चैंपियनशिप का पदक अपने हाथ से जाने दिया। यह निराशाजनक है।”
नीरज चोपड़ा के लिए भी जताया अफसोस
सचिन ने इस मौके पर नीरज चोपड़ा के लिए भी दुख जताया। उन्होंने कहा कि यह पहली बार था जब नीरज पोडियम पर नहीं दिखे। पीठ दर्द के कारण नीरज को पांचवें दौर के बाद प्रतियोगिता से हटना पड़ा। सचिन ने कहा कि देश की उम्मीद नीरज से जुड़ी थी, लेकिन पदक न मिलने से उन्हें भी बुरा लगा।
किसान परिवार से अंतरराष्ट्रीय मंच तक
उत्तर प्रदेश के बागपत जिले के खेकड़ा गांव के एक किसान परिवार से आने वाले सचिन यादव के लिए यह सफर आसान नहीं रहा। उन्होंने बताया कि उनके माता-पिता को खेल या विश्व चैंपियनशिप की अधिक जानकारी नहीं है। वे बस यही चाहते थे कि सचिन को एक स्थायी नौकरी मिल जाए। सचिन ने हंसते हुए कहा कि उनके गांव में पहली बार मीडिया पहुंचा। उनकी मां ने उन्हें बताया कि कुछ पत्रकार उनके घर आए और तस्वीरें लीं।
सचिन यादव का यह प्रदर्शन बताता है कि भारत को एक और बड़े भाला फेंक खिलाड़ी का उदय देखने को मिल रहा है। हालांकि पदक से चूकने का मलाल उन्हें है, लेकिन अपने पहले ही प्रयास में उन्होंने दुनिया के दिग्गजों को कड़ी टक्कर देकर साबित कर दिया कि आने वाले वर्षों में वे भारत के लिए बड़ी उपलब्धियां ला सकते हैं। नीरज चोपड़ा के बाद अब सचिन यादव से भी भारतीय खेल प्रेमियों की उम्मीदें और बढ़ गई हैं।



