नई दिल्ली: इंग्लैंड के खिलाफ पांच मैचों की टेस्ट सीरीज (IND vs ENG) में एक-एक की बराबरी के बाद अब भारतीय क्रिकेट टीम (Indian Cricket Team) तीसरे टेस्ट के लिए ऐतिहासिक लॉर्ड्स मैदान पहुंच चुकी है। सीरीज का यह तीसरा मुकाबला गुरुवार से शुरू होगा। लीड्स में हार और एजबेस्टन में दमदार वापसी के बाद अब टीम इंडिया (Team India) प्रतिष्ठा और बढ़त दोनों के लिए मैदान पर उतरेगी।
इस मैच से पहले सबसे बड़ी खबर तेज गेंदबाज जसप्रीत बुमराह (Jasprit Bumrah) की वापसी को लेकर है, जिन्होंने दूसरे टेस्ट में विश्राम लिया था। बुमराह ने मंगलवार को अभ्यास सत्र में हिस्सा भी लिया। हालांकि, पिछले मैच के सितारे आकाश दीप, मोहम्मद सिराज, शुभमन गिल और ऋषभ पंत ने प्रैक्टिस से ब्रेक लिया। टीम प्रबंधन का संकेत है कि तेज गेंदबाजी की कमान बुमराह, सिराज और आकाशदीप के हाथों में होगी, वहीं प्रसिद्ध कृष्णा को टीम से बाहर बैठना पड़ सकता है।
लॉर्ड्स की ढलान बनेगी चुनौती
लॉर्ड्स का मैदान सिर्फ अपनी ऐतिहासिक विरासत के लिए नहीं जाना जाता, बल्कि इसकी अनोखी ढलान (स्लोप) भी खिलाड़ियों के लिए खासा मायने रखती है। मैदान की पिच लगभग आठ फीट की ढलान के साथ पवेलियन एंड से नर्सरी छोर तक झुकी हुई है। यह ढलान गेंदबाजों के लिए वरदान भी हो सकती है और सिरदर्द भी। पवेलियन एंड से तेज गेंदबाजों को स्विंग में मदद मिलती है, लेकिन अनुभव के बिना वहां सटीक लेंथ पाना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
पूर्व भारतीय गेंदबाज चेतन शर्मा (Chetan Sharma) ने लॉर्ड्स में अपनी गेंदबाजी के अनुभव को साझा करते हुए बताया कि पवेलियन एंड से गेंदबाजी करना कठिन था, इसलिए उन्होंने शुरुआत नर्सरी छोर से की और बाद में पवेलियन छोर से अटैक किया। उनके मुताबिक, कम अनुभव वाले गेंदबाजों को शुरुआत में नर्सरी छोर से गेंदबाजी करनी चाहिए ताकि वे ढलान के प्रभाव से सामंजस्य बैठा सकें।
ढलान से बल्लेबाज भी नहीं है अछूते
जहां गेंदबाजों को ढलान से स्विंग मिलती है, वहीं बल्लेबाजों को भी इस पिच पर खुद को ढालने में समय लगता है। लॉर्ड्स में मिडिल स्टंप पर गार्ड लेकर खेलने की परंपरा इसलिए विकसित हुई है क्योंकि इससे गेंद को लेट खेलने और सटीक आकलन में मदद मिलती है। ऋषभ पंत (Rishabh Pant) की बल्लेबाजी इस टेस्ट में खास नजरों में होगी क्योंकि वे अपनी आक्रामक शैली को इस तकनीकी चुनौती के साथ कैसे जोड़ते हैं, यह देखने लायक होगा।
क्षेत्ररक्षण पर भी असर
लॉर्ड्स की ढलान का प्रभाव सिर्फ गेंदबाजी या बल्लेबाजी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह फील्डिंग पर भी असर डालता है। पहले टेस्ट में भारतीय फील्डरों की कुछ चूकें इसी कारण सामने आई थीं। ढलान के कारण गेंद की गति अचानक तेज हो जाती है जिससे मिस फील्डिंग और रन आउट की संभावनाएं बढ़ जाती हैं।
पिच और मौसम का हाल
मंगलवार को पिच पर घास थी, लेकिन दोपहर तक उसमें से काफी हिस्सा हटा दिया गया। बुधवार को इसे और भी कम किया जा सकता है। विशेषज्ञों की मानें तो यह पिच न तो लीड्स की तरह सपाट होगी और न ही बर्मिंघम जैसी मददगार। वहीं मौसम विभाग ने पूरे पांच दिनों तक धूप रहने और तापमान 15 से 30 डिग्री सेल्सियस के बीच बने रहने की संभावना जताई है, जिससे बल्लेबाजों को कुछ राहत मिल सकती है।



