नई दिल्ली: भारतीय क्रिकेट में प्रतिभा की कमी नहीं है, लेकिन चयन और मौके की राजनीति कई बार होनहार खिलाड़ियों के करियर पर भारी पड़ जाती है। राहुल द्रविड़ (Rahul Dravid) के बाद जब गौतम गंभीर (Gautam Gambhir) ने टीम इंडिया (Team India) के मुख्य कोच का पद संभाला, तो उम्मीद थी कि नए चेहरों को ज्यादा मौके मिलेंगे। उनके कार्यकाल में वाकई कुछ युवाओं को डेब्यू का मौका मिला, लेकिन इसके उलट 27 वर्षीय बल्लेबाज सरफराज खान (Sarfaraz Khan) का करियर ठहराव की कगार पर पहुंच गया है।
गंभीर के कार्यकाल में इंग्लैंड दौरे पर युवा बाएं हाथ के बल्लेबाज साई सुदर्शन (Sai Sudharsan) को टेस्ट डेब्यू कराया गया, लेकिन सरफराज खान (Sarfaraz Khan) को लगातार नजरअंदाज किया गया। यह स्थिति ऐसी है मानो हेड कोच ने उन्हें मौका न देने का मन बना लिया हो। यह फैसला तब और चौंकाने वाला लगता है जब उनके घरेलू क्रिकेट और अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शन पर नजर डाली जाए।
इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया दौरे पर न मिला अवसर
सरफराज खान (Sarfaraz Khan)को आखिरी बार 2024 में न्यूजीलैंड के खिलाफ टेस्ट सीरीज में देखा गया था। माना जा रहा था कि इंग्लैंड के खिलाफ 5 मैचों की टेस्ट सीरीज में उनकी वापसी होगी, लेकिन चयनकर्ताओं ने 8 साल बाद करुण नायर (Karun Nair) पर भरोसा जताया। नायर इस सीरीज में कुछ खास नहीं कर पाए और पूरे दौरे में फ्लॉप साबित हुए। इसके बावजूद सरफराज को मौका नहीं दिया गया।
ऑस्ट्रेलिया दौरे (Australia Tour) पर भी हालात बदले नहीं। उन्हें स्क्वाड में शामिल किया गया था, लेकिन कप्तान रोहित शर्मा और कोच गंभीर ने उन्हें प्लेइंग-11 का हिस्सा नहीं बनाया। सरफराज पूरे दौरे पर ड्रिंक्स सर्विस तक ही सीमित रहे।
रिकॉर्ड बोलते हैं सरफराज के पक्ष में
सरफराज खान ने 2024 में इंग्लैंड के खिलाफ राजकोट में टेस्ट डेब्यू किया था। वह फर्स्ट क्लास क्रिकेट में लगातार रन बनाने वाले बल्लेबाजों में शामिल हैं। उन्होंने 6 टेस्ट मैचों में 11 पारियों में 371 रन बनाए हैं, जिसमें एक शतक और तीन अर्धशतक शामिल हैं।
घरेलू क्रिकेट में उनके आंकड़े और भी दमदार हैं। प्रथम श्रेणी क्रिकेट में उन्होंने 65.98 की औसत से 4685 रन बनाए हैं, जिसमें 16 शतक और 15 अर्धशतक शामिल हैं। ऐसे प्रदर्शन के बावजूद टीम में लगातार नजरअंदाजी होना चयन नीति पर सवाल खड़े करता है।
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आगे क्या होगा?
अब निगाहें अक्टूबर में वेस्टइंडीज के खिलाफ होने वाली दो टेस्ट मैचों की सीरीज पर हैं। यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या चयनकर्ता और टीम प्रबंधन इस बार सरफराज खान को मौका देंगे या फिर उनका इंतजार और लंबा खिंचेगा।
भारतीय क्रिकेट में कई बार देखा गया है कि एक मौके की कमी से खिलाड़ी का करियर अचानक ढलान पर चला जाता है। सरफराज के मामले में भी यही खतरा मंडरा रहा है। अब फैसला चयनकर्ताओं और टीम मैनेजमेंट के हाथ में है कि वे एक प्रतिभाशाली बल्लेबाज को सही मंच देंगे या फिर उसे घरेलू क्रिकेट तक ही सीमित रखेंगे।



