नई दिल्ली : पाकिस्तान सुपर लीग (पीएसएल) 2026 के लिए मुसीबतों का पहाड़ टूट पड़ा है। एक तरफ जहां पीसीबी पहले ही खाली स्टेडियमों में मैच कराने के फैसले से करोड़ों के नुकसान की मार झेल रहा है, वहीं अब विदेशी खिलाड़ियों ने भी पीएसएल का साथ छोड़ आईपीएल का रुख करना शुरू कर दिया है।
ताजा मामला श्रीलंका के टी20 कप्तान दसुन शनाका का है, जिन्होंने लाहौर कलंदर्स का साथ छोड़कर आईपीएल 2026 में राजस्थान रॉयल्स के साथ जुड़ने का फैसला किया है। शनाका को चोटिल सैम करन के विकल्प के तौर पर टीम में शामिल किया जा रहा है।
शनाका अकेले ऐसे खिलाड़ी नहीं हैं जिन्होंने पीसीबी की उम्मीदों पर पानी फेरा है। उनसे पहले जिम्बाब्वे के तेज गेंदबाज ब्लेसिंग मुजरबानी और वेस्टइंडीज के गुडाकेश मोती भी पीएसएल को बीच में छोड़कर आईपीएल का दामन थाम चुके हैं। पीसीबी की वह रणनीति अब पूरी तरह फेल होती दिख रही है, जिसमें उन्होंने आईपीएल के साथ ही पीएसएल के आयोजन का रिस्क लिया था। बोर्ड का मानना था कि खिलाड़ी दोनों लीग संभाल लेंगे, लेकिन हकीकत में विदेशी प्लेयर्स आईपीएल की चकाचौंध और बड़े कॉन्ट्रैक्ट को प्राथमिकता दे रहे हैं।
खिलाड़ियों के इस तरह बीच सीजन में साथ छोड़ने से पीसीबी अध्यक्ष मोहसिन नकवी आगबबूला हो गए हैं। रविवार को मीडिया से बात करते हुए उन्होंने इसे ‘अनुबंध का उल्लंघन’ बताया और खिलाड़ियों को गीदड़भभकी देते हुए कड़ी कार्रवाई के संकेत दिए। नकवी ने याद दिलाया कि 2025 में भी कॉर्बिन बॉश पर मुंबई इंडियंस के लिए पीएसएल छोड़ने के कारण एक साल का प्रतिबंध लगाया गया था। नकवी के तेवरों से साफ है कि वे अब उन खिलाड़ियों पर कड़ा रुख अपनाएंगे जो पाकिस्तानी लीग को ‘बैकअप’ की तरह इस्तेमाल कर रहे हैं।
यह घटनाक्रम पाकिस्तान क्रिकेट के लिए एक बड़ा संकट बन गया है। एक तरफ आर्थिक तंगी और सुरक्षा कारणों से दर्शकों को स्टेडियम से दूर रखा गया है, और दूसरी तरफ बड़े सितारों का पलायन लीग की ‘ब्रांड वैल्यू’ को खत्म कर रहा है। अगर पीसीबी ने जल्द ही अपनी नीतियों में बदलाव नहीं किया, तो आगामी सीजन में पीएसएल से अंतरराष्ट्रीय स्तर के बड़े नामों का पूरी तरह से सफाया हो सकता है।



