Clutch Chess: कास्पारोव ने आनंद को हराकर फिर दिखाया पुराना जादू

तीन दशकों बाद शतरंज के दो दिग्गज आमने-सामने हुए और नतीजा वही रहा — गैरी कास्पारोव ने विश्वनाथन आनंद को कड़े मुकाबले में 13-11 से हराया।

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नई दिल्ली: रूस के महान ग्रैंडमास्टर गैरी कास्पारोव (Garry Kasparov) ने एक बार फिर साबित किया कि उम्र केवल एक संख्या है। उन्होंने भारत के दिग्गज खिलाड़ी विश्वनाथन आनंद (Viswanathan Anand) को क्लच शतरंज लीजेंड्स मैच (Chess Legends Match) में 13-11 से हराकर खिताब अपने नाम किया। कास्पारोव ने यह जीत दो गेम शेष रहते ही सुनिश्चित कर ली थी, जिससे एक बार फिर 30 साल पुराना इतिहास दोहराया गया।

30 साल पुरानी यादें हुईं ताजा

10 अक्टूबर 1995 को न्यूयॉर्क के वर्ल्ड ट्रेड सेंटर की 107वीं मंजिल पर खेले गए विश्व शतरंज चैंपियनशिप मुकाबले में भी यही जोड़ी आमने-सामने थी। उस समय आनंद ने 20 गेम वाले क्लासिकल मैच के 18वें गेम में ड्रॉ खेला था, लेकिन कुल स्कोर 7.5-10.5 से हार गए थे। अब लगभग तीन दशकों बाद इतिहास खुद को दोहराता दिखा, जब कास्पारोव फिर विजेता बने।

नियम और मुकाबले का रोमांच

क्लच शतरंज लीजेंड्स टूर्नामेंट में कुल 24 गेम खेले गए। प्रत्येक गेम के अलग-अलग अंक थे, और अंतिम दो गेम ब्लिट्ज टाइम कंट्रोल के तहत खेले गए। इन तेज़-तर्रार बाजियों में आनंद ने दोनों जीत हासिल कीं, लेकिन तब तक देर हो चुकी थी। कास्पारोव पहले ही 13 अंकों के साथ अपनी जीत पक्की कर चुके थे। टूर्नामेंट में कास्पारोव को 78,000 अमेरिकी डॉलर की इनामी राशि मिली, जबकि आनंद ने 66,000 डॉलर अर्जित किए।

अंतिम दिन का रोमांच

मैच के आखिरी दिन से पहले कास्पारोव के पास पांच अंकों की बढ़त थी। अंतिम दिन कुल 12 अंक दांव पर थे, यानी आनंद के पास वापसी का अवसर था। पहले गेम में उन्होंने संघर्षपूर्ण ड्रॉ खेला, लेकिन अगला गेम हारने के बाद मुकाबला निर्णायक रूप से कास्पारोव के पक्ष में चला गया। हालांकि आनंद ने अंत के दोनों ब्लिट्ज गेम में शानदार प्रदर्शन करते हुए जीत दर्ज की, लेकिन यह केवल हार का अंतर कम करने तक ही सीमित रहा।

आनंद और कास्पारोव की प्रतिद्वंद्विता

शतरंज की दुनिया में आनंद और कास्पारोव की जोड़ी को ऐतिहासिक माना जाता है। दोनों खिलाड़ी दशकों तक एक-दूसरे के प्रतिद्वंद्वी रहे हैं। कास्पारोव ने जहां शतरंज को आक्रामक रणनीतियों के लिए नई दिशा दी, वहीं आनंद ने अपनी शांत शैली और सटीकता से खेल में नई पहचान बनाई। इस मुकाबले ने न सिर्फ पुरानी यादें ताज़ा कीं, बल्कि यह भी दिखाया कि इन दोनों दिग्गजों का जादू आज भी बरकरार है।

कास्पारोव की यह जीत सिर्फ एक टूर्नामेंट की सफलता नहीं, बल्कि उनके अदम्य जज्बे और शतरंज के प्रति जुनून का प्रतीक है। वहीं, आनंद की वापसी की कोशिशों ने दिखाया कि वे अभी भी किसी भी युवा खिलाड़ी के लिए प्रेरणा बने हुए हैं। क्लच शतरंज लीजेंड्स का यह मुकाबला आने वाले समय में शतरंज प्रेमियों के लिए एक क्लासिक रीमैच के रूप में याद किया जाएगा।

Sakshi Pal

sakshipal8700@gmail.com

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