नई दिल्ली: भारतीय वन सेवा के 2002 बैच के अधिकारी संजीव चतुर्वेदी की अर्जी पर एक बार फिर से केंद्र सरकार ने अपने 360 डिग्री अप्रेजल सिस्टम पर यू टर्न ले लिया है। सरकार की ओर से अदालत में हलफनामा दाखिल करके कहा गया है कि सरकार में ऐसी व्यवस्था तो है लेकिन इसे सार्वजनिक नहीं किया जा सकता है। जबकि इससे पहले अदालत में कहा था कि सरकार में 360 डिग्री अप्रेजल जैसी कोई व्यवस्था है ही नहीं। दरअसल केंद्र सरकार में संयुक्त सचिव और उससे ऊपर के पद पर इंपैनलमेंट के लिए 360 डिग्री अप्रेजल सिस्टम के आधार पर प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाली एसीसी किसी अधिकारी की प्रतिनियुक्ति पर निर्णय लेती है।
सरकार की ओर से दाखिल हलफनामा
भारतीय वन सेव के अधिकारी संजीव चतुर्वेदी की ओर से दाखिल अर्जी पर सेंट्रल एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल (कैट) के नैनीताल बेंच में कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी) की ओर से नवंबर में एक हलफनामा दाखिल किया है। जिसमें उनकी ओर से 360 डिग्री अप्रेजल सिस्टम पर नियम-शत्र्तों की जानकारी मांगी गई थी। सरकार की ओर से दाखिल हलफनामें में कहा गया है कि 360 डिग्री अप्रेजल सिस्टम को लेकर दिशा-निर्देश है लेकिन यह अप्यांटमेंट कमेटी ऑफ कैबिनेट (एसीसी) के अधिकार क्षेत्र में आता है, जिसकी अध्यक्षता प्रधानमंत्री करते हैं। ऐसे में इसे सार्वजनिक नहीं किया जा सकता है। इससे संबंधित नियम-कानून सिर्फ अदालत को दिखाई जा सकती है क्योंकि यह गोपनीय दस्तावेज है। इस मामले के याचिकाकर्ता (संजीव चतुर्वेदी) को भी नहीं दिखाई जा सकती है। यही नहीं डीओपीटी की ओर से दाखिल हलफनामें में यह भी कहा गया कि कैट की ओर से इस संबंध में जो आदेश पहले जारी किया गया था, जिसमें 360 डिग्री अप्रेजल सिस्टम से जुड़ी नियम-कानून को अदालत के रिकॉर्ड पर लाने के लिए कहा गया था उसे वापस कर लिया जाए। दरअसल पहले डीओपीटी ने सिलबंद लिफाफे में 360 डिग्री अप्रेजल की नियम-शत्र्तें अदालत में जमा की थी और कहा था कि इसे सार्वजनिक न किया जाए। लेकिन अदालत ने इसे रिकॉर्ड पर लाने के आदेश दिए थे।
डीओपीटी की ओर से दिए गए हलफनामा
इससे पहले अक्टूबर 2023 में कैट में ही एक मामले की सुनवाई के दौरान डीओपीटी की ओर से दिए गए हलफनामें में कहा गया था कि सरकार में 360 डिग्री अप्रेजल सिस्टम जैसी कोई व्यवस्था नहीं है और लिहाजा इससे जुड़ा कोई रिकॉर्ड भी नहीं है। डीओपीटी की ओर से पेश हलफनामे के आधार पर कैट की बेंच ने मई 2024 में आदेश भी जारी कर दिया था और कहा था कि डीओपीटी के हलफनामें से स्पष्ट है कि ऐसी कोई व्यवस्था नहीं है। लिहाजा सरकार के पास इससे संबंधित कोई रिकॉर्ड भी नहीं है। इसके बाद याचिकाकर्ता के आग्रह को अदालत ने अनावश्यक बता दिया था।
संसदीय समिति ने 360 डिग्री अप्रेजल की दी थी जानकारी
संसदीय समिति ने 360 डिग्री अप्रेजल की दी थी विस्तृत जानकारी इससे पहले वर्ष 2017 में संसद की स्थायी समिति के समक्ष डीओपीटी की ओर से 360 डिग्री अप्रेजल सिस्टम जिसे मल्टी सोर्स फीडबैक (एमएसएफ) भी कहा जाता है, इसके बारे में विस्तार से संसदीय समिति के सामने दी थी जो सार्वजनिक भी है। समिति को बताया गया था यह नियम क्यों बनाया गया और इससे फायदा और नुकसान है यह भी बताया था। केंद्र सरकार में अधिकारियों के इंपैनलमेंट से पहले उनके सीनियर, जूनियर, समकक्ष काम करने वाले अधिकारी, स्टेकहोल्डर और जिस विभाग में अधिकारी काम कर रहा है उसके सचिव से बातचीत की जाती है। इनसे मिले फिडबैक के आधार पर भी अधिकारी के इंपैनलमेंट का निर्णय लिया जाता है। संसदीय समिति ने भी कहा था कि यह सिस्टम पारदर्शी नहीं है, इसके साथ छेड़छाड़ संभव है और कानूनी रूप से भी स्टैंड नहीं करेगा।



