नई दिल्ली: वरिष्ठ नागरिकों को सम्मान और तीन पीढ़ियों को एक मंच पर लाने का शानदार नजारा 28 नवंबर 2025 को जनपथ स्थित भीम हॉल में देखने को मिला। सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय ने अंतर्राष्ट्रीय वृद्धजन दिवस-2025 की श्रृंखला में आराधना सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किया। कार्यक्रम का थीम अनुभव से ऊर्जा तक रहा।
वायुसेना बैंड ने जगाई देशभक्ति
कार्यक्रम की शुरुआत भारतीय वायुसेना के मशहूर बैंड ने की। वंदे मातरम, सारे जहां से अच्छा, सुजलाम सुफलाम जैसी धुनों से पूरा हॉल गूंज उठा। बुजुर्गों की आंखें चमक उठीं और बच्चे-युवा तालियां बजाने लगे। बैंड की हर धुन ने मातृभूमि के प्रति प्रेम और गर्व की भावना को फिर से जगा दिया।
पद्मश्री गीता चंद्रन ने बांधा समां
इसके बाद मंच पर आईं पद्मश्री गीता चंद्रन और उनकी टीम। भरतनाट्यम की शानदार प्रस्तुति में त्रिधारा, नमः शिवाय, ओंकार कारिणी और संकीर्तन ने सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया। नृत्य की हर मुद्रा में जीवन, श्रद्धा और ऊर्जा का संदेश साफ़ दिख रहा था। बुजुर्ग दर्शक भाव-विभोर हो गए।
तीन पीढ़ियां, एक मंच
कार्यक्रम की सबसे खास रही तीन पीढ़ियों का एक साथ होना। मंच पर बुजुर्गों का अनुभव, युवाओं की कला और बच्चों की मासूम हंसी-खुशी। केंद्रीय राज्य मंत्री बी.एल. वर्मा ने कहा कि हमारे बुजुर्ग ज्ञान और धैर्य के जीते-जागते प्रतीक हैं। उनकी हर कहानी युवाओं के लिए पाठशाला है। आज संगीत और नृत्य ने अनुभव को ऊर्जा में बदल दिया।
10 करोड़ से 22 करोड़ तक पहुंचेंगे बुजुर्ग
मंत्री ने याद दिलाया कि 2011 में देश में 10 करोड़ वरिष्ठ नागरिक थे, 2036 तक यह संख्या 22 करोड़ हो जाएगी। सरकार ने उनके लिए 2007 में भरण-पोषण कानून बनाया और कई कल्याण योजनाएं चला रही है। संविधान का अनुच्छेद-41 भी राज्य को बुजुर्गों की देखभाल का दायित्व देता है।
मंत्री का संदेश सम्मान और सुरक्षा सबसे ऊपर रहा। वर्मा ने कहा कि मंत्रालय का हर कार्यक्रम इसी संकल्प से चलता है कि हमारे बुजुर्ग सम्मान, सुरक्षा और सक्रिय जीवन जिएं। आज का यह आयोजन उसी संकल्प का सुंदर रूप है। हॉल में मौजूद वरिष्ठ नागरिक, स्कूली बच्चे, एनजीओ प्रतिनिधि और अधिकारी सबने एक स्वर में कहा कि आराधना सिर्फ कार्यक्रम नहीं, बल्कि भावनाओं का सेतु बन गया।



