नई दिल्ली: दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने IRCTC होटल टेंडर घोटाले में पूर्व रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव, उनकी पत्नी राबड़ी देवी, बेटे तेजस्वी यादव और 11 अन्य के खिलाफ भ्रष्टाचार, धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश के आरोप तय किए। यह फैसला बिहार चुनाव से महज कुछ हफ्ते पहले आया है, जहां RJD महागठबंधन का हिस्सा है। यह आरजेडी के लिए बड़ा झटका है। तेजस्वी यादव, जो युवा चेहरा और महागठबंधन के मुख्यमंत्री पद के दावेदार हैं, अब विपक्ष के निशाने पर होंगे।
सियासी बयानबाजी का दौर शुरू
अब जब अदालत ने आरोप तय कर दिए हैं, बिहार की सियासत में बयानबाजी का दौर शुरू हो गया है। जेडीयू और बीजेपी के नेताओं ने लालू परिवार पर जमकर निशाना साधा है। भारतीय जनता पार्टी और जनता दल (यूनाइटेड) गठबंधन ने इस फैसले को भ्रष्टाचार के खिलाफ अपनी जीत करार दिया है। बीजेपी के वरिष्ठ नेता रवि शंकर प्रसाद ने कहा, “लालू का भ्रष्टाचार अब कोर्ट में बेनकाब होगा। यह बिहार की जनता के लिए सुशासन की जीत है। जेडीयू प्रवक्ता नीरज कुमार ने कहा RJD का भ्रष्टाचार बिहार के विकास में बाधा रहा है। यह फैसला नीतीश सरकार की स्वच्छ छवि को और मजबूत करेगा।
आरजेडी ने इसे बीजेपी सरकार की राजनीतिक साजिश बताया
RJD ने इसे केंद्र की बीजेपी सरकार की “राजनीतिक साजिश” करार दिया है। तेजस्वी यादव ने सोशल मीडिया पर लिखा, “हम कोर्ट में सच साबित करेंगे। यह बीजेपी की डरपोक साजिश है, लेकिन बिहार की जनता हमारे साथ है। RJD प्रवक्ता मृत्युंजय तिवारी ने कहा कि यह फैसला लालू के कोर वोट बैंक, खासकर यादव और मुस्लिम समुदायों, को प्रभावित नहीं करेगा, क्योंकि वे इसे बीजेपी की बदले की कार्रवाई मानते हैं।
यह मामला शहरी और युवा मतदाताओं के बीच RJD की छवि को नुकसान पहुंचा सकता है, जो सुशासन और पारदर्शिता का हवाला देते हैं। इस फैसले से NDA को RJD पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाने का मजबूत हथियार मिल गया है। हालांकि, ग्रामीण इलाकों में लालू का कोर वोट बैंक यादव, मुस्लिम और कुछ पिछड़ा वर्ग अभी भी उनके साथ मजबूती से खड़ा है। ये समुदाय लालू को सामाजिक न्याय का प्रतीक मानते हैं, और उनके लिए यह मामला “राजनीति से प्रेरित” हो सकता है।
RJD इस संकट को भुनाने में सफल रही, तो यह कोर वोटरों को एकजुट कर सकता है
IRCTC घोटाले के साथ-साथ लैंड-फॉर-जॉब्स केस में भी सीबीआई और ईडी की जांच का दबाव RJD पर बढ़ रहा है। यह दोनों मामले मिलकर बिहार की सियासत को और गरमा सकते हैं। यदि RJD इस संकट को “विक्टिम कार्ड” के रूप में भुनाने में सफल रही, तो यह उनके कोर वोटरों को एकजुट कर सकता है। लेकिन अगर बीजेपी-जेडीयू इसे भ्रष्टाचार के खिलाफ नैरेटिव के रूप में स्थापित कर पाए, तो महागठबंधन के लिए शहरी सीटों पर नुकसान तय है।



