नई दिल्ली: भारत की नवीकरणीय ऊर्जा यात्रा अब मात्र संख्या से आगे निकलकर मजबूत बुनियाद बनाने की ओर बढ़ रही है। नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (MNRE) के अनुसार, देश ने पिछले दशक में रिकॉर्ड वृद्धि दर्ज की है। 2014 में जहां क्षमता 35 जीडब्ल्यू से कम थी, वहीं आज यह 197 जीडब्ल्यू से अधिक हो चुकी है (बड़ी जलविद्युत को छोड़कर)। यह वृद्धि सौर, पवन और बायोमास जैसे स्रोतों से आई है, लेकिन अब चुनौती है इस ऊर्जा को ग्रिड में स्थिर रूप से जोड़ना। 2030 तक 500 जीडब्ल्यू गैर-जीवाश्म क्षमता का लक्ष्य हासिल करने के लिए भारत प्रणाली की मजबूती पर फोकस कर रहा है, जो विकासशील अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ा कदम है।
मात्रा से गुणवत्ता की ओर बदलाव
पिछले वर्षों में क्षमता बढ़ाने की रफ्तार ने भारत को दुनिया के सबसे तेज बढ़ते नवीकरणीय बाजारों में शुमार कर दिया। 2025 में केंद्रीय एजेंसियों ने 5.6 जीडब्ल्यू की बोलियां लगाईं, राज्यों ने 3.5 जीडब्ल्यू, जबकि वाणिज्यिक और औद्योगिक उपभोक्ता लगभग 6 जीडब्ल्यू जोड़ेंगे। सालाना 15-25 जीडब्ल्यू नई क्षमता जुड़ रही है, जो वैश्विक स्तर पर सबसे तेज दरों में से एक है। लेकिन अब फोकस क्षमता अवशोषण पर है। वैश्विक चुनौतियां जैसे सप्लाई चेन की दिक्कतें और वित्तीय बाधाएं कमीशनिंग को धीमा कर रही हैं, इसलिए नीतियां अब ग्रिड एकीकरण, भंडारण और बाजार सुधारों पर केंद्रित हैं।
नीतिगत सुधार: घरेलू विनिर्माण और भंडारण पर जोर
सरकार ने नीतियों को रणनीतिक मोड़ दिया है। उत्पादन-संबद्ध प्रोत्साहन (PLI) योजना, घरेलू सामग्री आवश्यकता (ALMM) और शुल्क छूट से सौर विनिर्माण को बढ़ावा मिला है, जो आयात निर्भरता कम कर रहा है। बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणालियां (BESS) अब ग्रिड स्तर पर एकीकृत हो रही हैं, जो हाइब्रिड और राउंड-द-क्लॉक (RTC) प्रोजेक्ट्स को मजबूत बनाएंगी। GST संरचनाओं का पुनर्मूल्यांकन लागत स्थिरता सुनिश्चित करेगा। ये कदम न केवल क्षमता बढ़ाएंगे, बल्कि प्रेषण योग्य हरित ऊर्जा सुनिश्चित करेंगे।
ट्रांसमिशन नेटवर्क: 200 जीडब्ल्यू क्षमता का आधार
ट्रांसमिशन अब नवीकरणीय विकास का नया इंजन है। 2.4 लाख करोड़ रुपये की योजना से ग्रिड को नवीकरणीय-समृद्ध राज्यों जैसे राजस्थान, गुजरात और लद्दाख से जोड़ा जा रहा है। हरित ऊर्जा गलियारों के चरण III को मजबूत करने से 200 जीडब्ल्यू से अधिक क्षमता विकसित होगी। अंतर-राज्यीय ट्रांसमिशन क्षमता 2027 तक 143 जीडब्ल्यू और 2032 तक 168 जीडब्ल्यू हो जाएगी। CERC के जनरल नेटवर्क एक्सेस (GNA) विनियमों में संशोधन से ‘सौर-घंटे’ और ‘गैर-सौर-घंटे’ का समय-खंडित एक्सेस संभव हुआ है, जो भीड़भाड़ कम करेगा और निष्क्रिय क्षमता का बेहतर उपयोग करेगा।
आकर्षक निवेश गंतव्य: स्वच्छ ऊर्जा में वैश्विक रुचि
अल्पकालिक देरी के बावजूद, भारत स्वच्छ ऊर्जा निवेश का हॉटस्पॉट बना हुआ है। नवीकरणीय टैरिफ वैश्विक न्यूनतम स्तर पर हैं, जो लंबी अवधि की प्रतिस्पर्धा सुनिश्चित करते हैं। 40 जीडब्ल्यू से अधिक परियोजनाएं PPA, PSA या ट्रांसमिशन कनेक्टिविटी के उन्नत चरणों में हैं। वर्चुअल पावर परचेज एग्रीमेंट (VPPA) जैसे बाजार उपकरण कॉर्पोरेट खरीदारों को नवीकरणीय ऊर्जा से जोड़ेंगे, जो मांग बढ़ाएंगे और प्रोजेक्ट्स को तेजी देंगे।
भविष्य के कदम: हाइब्रिड, हाइड्रोजन और वितरित सौर
अगला चरण पहले से आकार ले रहा है। राजस्थान, गुजरात और कर्नाटक में हाइब्रिड और RTC प्रोजेक्ट्स क्रियान्वित हो रहे हैं। अपतटीय पवन, पंपयुक्त जलविद्युत भंडारण गति पकड़ रहे हैं। PM कुसुम और PM सूर्य घर योजनाओं से वितरित सौर और कृषि-वोल्टेइक सिस्टम ग्रामीण क्षेत्रों में फैल रहे हैं। राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन औद्योगिक डीकार्बोनाइजेशन को बढ़ावा देगा। हरित ऊर्जा गलियारों के चरण III से एकीकरण मजबूत होगा।
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टिकाऊ विकास की नींव
भारत का नवीकरणीय ऊर्जा परिवर्तन अब संस्थागत मजबूती और स्थिरता से परिभाषित हो रहा है। दशक भर की तेजी के बाद यह समेकन का दौर है, जो सुनिश्चित करेगा कि अगली छलांग और मजबूत हो। 2030 के लक्ष्य न केवल गति से, बल्कि रणनीतिक सहनशक्ति से हासिल होंगे। यह यात्रा विकसित भारत @2047 के विजन की आधारशिला बनेगी, जहां स्वच्छ ऊर्जा आर्थिक आत्मनिर्भरता का इंजन होगी।



