नई दिल्ली। मौजूदा समय में भारत अपनी विकास यात्रा के एक महत्वपूर्ण चरण में है। कृत्रिम मेधा (एआई) इस विकास के एक अहम सहायक के रूप में उभर रही है। एआई भारत के लिए प्रौद्योगिकी के जनतंत्रीकरण, इसकी पहुंच सुनिश्चित करने तथा इसके समावेशन और वृहत समानता को आगे बढ़ाने के लिए रणनीतिक राष्ट्रीय साधन के तौर पर काम करता है। इस प्रौद्योगिकीय क्रांति ने मानवीय प्रयासों के हर क्षेत्र में प्रगति के लिए विस्तृत अवसरों के द्वार खोले हैं। वैश्विक प्रौद्योगिकी और प्रशासनिक मंचों पर भारत की भूमिका का लगातार विस्तार हो रहा है। इससे उभरती प्रौद्योगिकियों पर अंतरराष्ट्रीय नीति विमर्श को आकार देने में उसकी बढ़ती भागीदारी का पता चलता है। इसी कड़ी में मेघालय, गुजरात, ओडिशा, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, राजस्थान और केरल में आयोजित सात क्षेत्रीय एआई सम्मेलनों के माध्यम से देश की इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 की तैयारियां राष्ट्रव्यापी स्तर पर तेज हो गई हैं।
इंडिया एआई मिशन के तहत, राज्य सरकारों, प्रमुख शैक्षणिक संस्थानों और सम्बंधित केंद्रीय मंत्रालयों के साथ साझेदारी में आयोजित ये सम्मेलन, 16-20 फरवरी, 2026 को नई दिल्ली में आयोजित होने वाले इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट पहले उच्च स्तरीय, परिणाम-उन्मुख गतिविधियों के रूप में कार्य करते हैं।
अक्टूबर 2025 से जनवरी 2026 के बीच आयोजित प्रत्येक सम्मेलन में क्षेत्र-विशिष्ट प्राथमिकताओं पर चर्चा की गई। इसके साथ ही प्रत्येक सम्मेलन में सुशासन, आर्थिक विकास, सामाजिक सशक्तिकरण और बेहतर सार्वजनिक सेवा वितरण के लिए एआई के उपयोग की राष्ट्रीय दृष्टि को भी ध्यान में रखा गया। चर्चाओं में शासन, स्वास्थ्य सेवा, कृषि, शिक्षा, भाषा प्रौद्योगिकी, कौशल विकास, नवाचार और डिजिटल अवसंरचना जैसे क्षेत्रों में व्यावहारिक एआई अनुप्रयोगों पर ध्यान केंद्रित किया गया। क्षेत्रीय सहभागिता की बदौलत नीति निर्माताओं, उद्योग जगत के नेताओं, स्टार्टअप्स, शोधकर्ताओं, शिक्षाविदों, नागरिक समाज और स्थानीय समुदायों को एक साथ आएं। इससे भारत का एआई रोडमैप क्षेत्रीय वास्तविकताओं और नागरिकों की आवश्यकताओं पर आधारित होना सुनिश्चित हुआ है। इन सम्मेलनों से प्राप्त अनुभव और विचार इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 के एजेंडा और परिणामों को सीधे तौर पर प्रभावित करेंगे।
दस लाख युवाओं को एआई कौशल में प्रशिक्षित करने का कार्यक्रम शुरू किया
इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा “प्रधानमंत्री का स्पष्ट लक्ष्य प्रौद्योगिकी का लोकतंत्रीकरण करना है ताकि एआई से संचालित ज्ञान कुछ चुनिंदा लोगों तक सीमित न रहकर हर व्यक्ति, हर घर और हर उद्यम तक पहुंचे। भारत के युवाओं को इस नए तकनीकी युग के लिए पूरी तरह से तैयार करने के इसी लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए, दस लाख युवाओं को एआई कौशल में प्रशिक्षित करने का कार्यक्रम शुरू किया गया है।”
इलेक्ट्रॉनिक्स एवं आईटी राज्य मंत्री, जितिन प्रसाद ने कहा “इंडिया एआई मिशन’ के तहत 10,000 करोड़ रुपये के निवेश की प्रतिबद्धता जताई है, इसका उद्देश्य एआई के जिम्मेदार और समावेशी उपयोग के माध्यम से नागरिकों की आय में वृद्धि करना, जीवन स्तर को सुगम बनाना और राष्ट्र की समग्र उत्पादकता को बढ़ावा देना है।” मेघालय के मुख्यमंत्री कॉनरैड के. संगमा ने कहा “मेघालय में प्रत्येक गर्भवती महिला की डिजिटल रूप से निगरानी की जाती है, इससे उच्च जोखिम वाले मामलों की शीघ्र पहचान और समय पर उपचार संभव हो पाता है। इस डेटा-आधारित दृष्टिकोण से मातृ मृत्यु दर में 50 प्रतिशत की कमी आई है।” –
गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र भाई रजनीकांत पटेल ने कहा “क्षेत्रीय एआई सम्मेलन यह सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण मंच हैं कि एआई-संचालित विकास हर जिले और हर भाषा के लोगों के लिए हो। ये मंच विचारों को कार्यों में बदलने और जमीनी स्तर पर लोगों के जीवन को बेहतर बनाने में मदद करते हैं।” मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा “मध्य प्रदेश सरकार का मानना है कि एआई से प्रशासन, नागरिकों और उद्योगों सभी को लाभ हो सकता है। हम ऐसी नीतिगत सहायता देने के लिए प्रतिबद्ध हैं जो सभी क्षेत्रों में दक्षता को अधिकतम करे और एआई के नेतृत्व में विकास को गति प्रदान करे।” उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा “उत्तर प्रदेश जैसे विशाल और संवेदनशील राज्य में, व्यापक चुनौतियों का समाधान करने के लिए एक समयबद्ध, प्रौद्योगिकी-आधारित और प्रतिक्रियाशील मॉडल की आवश्यकता है। इस परिवर्तन में एआई महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।”
क्षेत्रीय एआई सम्मेलन- मुख्य घोषणाएं
भविष्य के लिए तैयार कार्यबल का निर्माण के लिए राष्ट्रीय एआई कौशल विकास कार्यक्रम ‘युवा एआई फॉर ऑल’ के तहत दस लाख युवाओं को एआई कौशल में प्रशिक्षित किया जाएगा। देश में एआई डेटा और एआई प्रयोगशालाओं का विस्तार राज्यों भर में किया जा रहा है, इसमें व्यावहारिक एआई शिक्षा को मजबूत करने के लिए आईटीआई, पॉलिटेक्निक और तकनीकी संस्थानों में नई प्रयोगशालाएं स्थापित करना शामिल है।



