बेलेम (ब्राजील): केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने औद्योगिक परिवर्तन में तेजी लाने के लिए मजबूत वैश्विक साझेदारी का आह्वान किया। साथ ही पेरिस समझौते के तहत सहयोगात्मक, प्रौद्योगिकी-संचालित और औद्योगिक बदलावों के प्रति भारत की प्रतिबद्धता पर जोर दिया। भूपेंद्र यादव सोमवार को ब्राजील के बेलेम में यूएनएफसीसीसी COP-30 के दौरान लीडआईटी उद्योग के नेताओं के गोलमेज सम्मेलन में यह बात कही। मंत्री ने वैश्विक साझेदारों, देशों और उद्योगों को औद्योगिक परिवर्तन को गति देने में साथ देने का बुलावा दिया। उन्होंने कहा कि सामूहिक प्रयास पेरिस समझौते के लक्ष्यों को प्राप्त करने और आने वाली पीढ़ियों के लिए एक स्थायी भविष्य बनाने में मदद करेंगे।
दुनिया पेरिस समझौते की 10वीं वर्षगांठ मना रही
उद्योग परिवर्तन के लिए नेतृत्व समूह (लीडआईटी) के सह-अध्यक्ष के रूप में सत्र की शुरुआत करते हुए, यादव ने कहा कि यह गोलमेज सम्मेलन वैश्विक जलवायु परिवर्तन के एक निर्णायक क्षण में आयोजित किया जा रहा है। उन्होंने कहा, यह गोलमेज सम्मेलन एक महत्वपूर्ण समय पर हो रहा है, क्योंकि दुनिया पेरिस समझौते की 10वीं वर्षगांठ मना रही है और अब हमें लक्ष्य निर्धारण से कार्यान्वयन की ओर बढ़ना होगा।
केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने 17 नवंबर को ब्राजील के बेलेम में यूएनएफसीसीसी कॉप-30 के दौरान लीडआईटी उद्योग जगत के नेताओं के गोलमेज सम्मेलन को संबोधित किया। उन्होंने पेरिस समझौते के तहत सहयोगात्मक, प्रौद्योगिकी-संचालित और सतत औद्योगिक बदलावों के प्रति भारत की प्रतिबद्धता पर जोर दिया।
- भारत ने सीओपी30 को कार्यान्वयन और वादों को पूरा करने वाले सीओपी के रूप में अपनाने का आह्वान किया है
- विकसित देशों को नेट-जीरो तक पहुंचना चाहिए और अरबों में नहीं, बल्कि खरबों में जलवायु वित्त प्रदान करना चाहिए
- यादव ने कहा कि भारत वर्ष 2035 तक अपनी संशोधित राष्ट्रीय विकास परिषद (एनडीसी) की घोषणा करेगा और पहली द्विवार्षिक पारदर्शिता रिपोर्ट प्रकाशित करेगा
उद्योग परिवर्तन के लिए नेतृत्व समूह (लीडआईटी) के सह-अध्यक्ष के रूप में सत्र की शुरुआत करते हुए, यादव ने कहा कि यह गोलमेज सम्मेलन वैश्विक जलवायु परिवर्तन के एक निर्णायक क्षण में आयोजित किया जा रहा है। गोलमेज सम्मेलन एक महत्वपूर्ण समय पर हो रहा है, क्योंकि दुनिया पेरिस समझौते की 10वीं वर्षगांठ मना रही है और अब हमें लक्ष्य निर्धारण से कार्यान्वयन की ओर बढ़ना होगा। मंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत अक्षय ऊर्जा, आपदा प्रतिरोधक क्षमता, जैव विविधता संरक्षण और औद्योगिक क्षेत्र में हस्तक्षेप जैसे महत्वाकांक्षी घरेलू, क्षेत्रीय और वैश्विक जरूरतों को बढ़ा रहा है।
मंत्री ने LeadIT को कम-कार्बन औद्योगिक मार्गों को आगे बढ़ाने में सबसे सार्थक वैश्विक सहयोगों में से एक बताया। उन्होंने कहा, “भारत दृढ़ता से मानता है कि वैश्विक साझेदारियाँ अनिवार्य हैं और 2019 में भारत और स्वीडन द्वारा संयुक्त रूप से प्रारंभ किया गया LeadIT ऐसे सहयोग का एक आदर्श मॉडल है।” उन्होंने आगे कहा कि यह सरकारों, उद्योगों और अंतरराष्ट्रीय साझेदारों को एकजुट करता है, जो कम-कार्बन और प्रतिस्पर्धी औद्योगिक मूल्य शृंखलाओं को आगे बढ़ाने के लिए समर्पित हैं।
यादव ने बताया कि अपने शुभारंभ के बाद से लीडआईटी 18 सदस्य देशों और 27 कंपनियों तक बढ़ गया है, जिसने वैश्विक जलवायु एजेंडे पर औद्योगिक परिवर्तन को सफलतापूर्वक आगे बढ़ाया है, परिवर्तन रोडमैप का समर्थन किया है, वैश्विक डीकार्बोनाइजेशन प्रयासों में पारदर्शिता बढ़ाई है और ज्ञान के आदान-प्रदान के लिए मंच तैयार किया है।
भारत अपने विकास को उत्सर्जन से अलग करने सफल है
विकास और स्थायित्व के प्रति भारत के संतुलित दृष्टिकोण पर जोर देते हुए, मंत्री महोदय ने भारत के आर्थिक विस्तार के साथ-साथ की जा रही उत्सर्जन में कमी पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने बताया, “चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था और सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था के रूप में भारत अपने विकास को उत्सर्जन से अलग करने में सफल रहा है। भारत ने 2005 और 2020 के बीच सकल घरेलू उत्पाद की उत्सर्जन तीव्रता में 36% की कमी की है, जो पर्यावरणीय स्थिरता के साथ विकास के सामंजस्य के प्रति देश की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
यादप ने भारत और स्वीडन के संयुक्त वित्त पोषण से स्थापित उद्योग परिवर्तन मंच (आईटीपी) के अंतर्गत हुई प्रगति का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि भारत और स्वीडन के 18 उद्योग और अनुसंधान संस्थान जल्द ही औद्योगिक सह-उत्पादों और गैसों से मूल्य सृजन, कार्बन कैप्चर और उपयोग, प्रक्रिया अनुकूलन के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता, विद्युतीकरण और हाइड्रोजन-आधारित औद्योगिक तापन से जुड़ी परियोजनाएँ शुरू करेंगे।
मंत्री ने टाटा मोटर्स और वोल्वो समूह के बीच भारी-भरकम परिवहन को कार्बन-मुक्त बनाने के लिए लीडआईटी द्वारा सुगम किए गए सहयोग पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा, “यह साझेदारी दर्शाती है कि साझा महत्वाकांक्षाएँ कैसे सामूहिक कार्रवाई में तब्दील हो सकती हैं। उन्होंने यह भी कहा कि इस तरह के सहयोग वैश्विक औद्योगिक परिवर्तन के रास्ते तैयार कर रहे हैं। लीडआईटी के विस्तार की घोषणा करते हुए, मंत्री ने कहा, आज, हमें इस प्लेटफार्म के नए सदस्य के रूप में एसकेएफ का स्वागत करते हुए खुशी हो रही है। वैश्विक सतत विकास लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए प्रौद्योगिकी साझाकरण केंद्रीय भूमिका में रहेगा।
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अंतर्राष्ट्रीय साझेदारों से सहयोग बढ़ाने का अनुरोध
यादव ने देशों, उद्योगों और अंतर्राष्ट्रीय साझेदारों से सहयोग बढ़ाने का आग्रह किया। उन्होंने वैश्विक साझेदारों, देशों और उद्योगों को औद्योगिक परिवर्तन को गति देने में साथ देने के लिए आमंत्रित किया। उन्होंने कहा कि सामूहिक प्रयास पेरिस समझौते के लक्ष्यों को प्राप्त करने और आने वाली पीढ़ियों के लिए एक स्थायी भविष्य बनाने में मदद करेंगे।
UNFCCC COP 30
जलवायु परिवर्तन के दुष्प्रभाव दुनिया के कई देशों में महामारी या फिर किसी ना किसी आपदा के रूप में आज हमारे सामने आ रहे हैं। ग्लोबल वार्मिंग के जड़ में भी यही है। पृथ्वी की तेजी से बदलती जलवायु को नियंत्रित करने और इसे जीवन के अनुकूल बनाए रखने के लिए दुनिया के सभी देशों के एक्सपर्ट्स ब्राजील में एकत्र हो रहे हैं। संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन शिखर सम्मेलन (COP 30) में वर्ष 2025 तक जलवायु में बदलाव की गति पर नियंत्रण के लिए सभी देश अपनी योजनाओं पर चर्चा करेंगे। इस समिट के जरिए संयुक्त रूप से दुनियाभर में जलवायु परिवर्तन को नियंत्रित करने के उपायों का एक संदेश जाएगा। पृथ्वी पर तेजी से बदलती जलवायु जीवन पर बुरा असर डाल रही है। ऐसे में दुनिया देश तबाही के मुहाने हैं। जलवायु परिवर्तन पिछले कुछ दशकों के भीतर वैश्विक स्तर पर गंभीर समस्या बन चुकी है। जिससे निपटने के लिए दुनिया के तमाम देश राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर प्रयास कर रहे हैं। सीओपी समिट इसके लिए एक अहम वैश्विक मंच है।



