नयी दिल्ली: क्या आप जानते हैं कि जिम जाने या दौड़ने का सबसे सही समय क्या है? अक्सर लोग सुबह जल्दी उठकर कसरत करने को सबसे बेहतर मानते हैं, लेकिन हालिया रिसर्च एक अलग ही कहानी बयां कर रही है। ‘ओपन हार्ट’ पत्रिका में प्रकाशित एक नए शोध के अनुसार, व्यायाम का पूरा लाभ उठाने के लिए आपको अपनी ‘बॉडी क्लॉक’ (Circadian Rhythm) को सुनना चाहिए।
रिसर्च के मुख्य नतीजे: समय का सेहत पर असर
पाकिस्तान में 40 से 50 वर्ष की आयु के 134 लोगों पर किए गए इस अध्ययन में चौंकाने वाले परिणाम सामने आए हैं। शोधकर्ताओं ने पाया कि:
- नेचुरल तालमेल: जो लोग सुबह जल्दी उठना पसंद करते हैं (Morning People), उन्हें सुबह कसरत करने से ज्यादा फायदा हुआ।
- नाइट आउल्स: जो लोग देर रात तक जागते हैं (Night Owls), उनके लिए शाम की ट्रेनिंग दिल की सेहत के लिए अधिक लाभकारी रही।
- स्वास्थ्य लाभ: जिन लोगों ने अपनी बॉडी क्लॉक के अनुसार व्यायाम किया, उनके ब्लड प्रेशर और ब्लड शुगर के स्तर में सुधार देखा गया, साथ ही उनकी नींद की गुणवत्ता भी बेहतर हुई।
क्या है ‘सोशल जेटलैग’ का खतरा?
रिसर्च के लेखकों का मानना है कि ‘एक ही नियम सब पर लागू होता है’ (One size fits all) वाला नजरिया गलत है। जब हम अपनी जैविक घड़ी (Biological Clock) के खिलाफ जाकर जबरदस्ती सुबह जल्दी उठकर एक्सरसाइज करते हैं, तो इसे ‘सोशल जेटलैग’ कहा जाता है। यह स्थिति दिल की बीमारियों के खतरे को बढ़ा सकती है।
“रात में जागने वाले लोगों को जबरदस्ती सुबह जल्दी उठकर कसरत करने की आदत नहीं अपनानी चाहिए, क्योंकि इससे उनके शरीर पर विपरीत प्रभाव पड़ सकता है।”
विशेषज्ञों की राय और NHS की गाइडलाइंस
ब्रिटिश कार्डियोवैस्कुलर सोसाइटी के डॉक्टर राजीव शंकरनारायणन के अनुसार, बॉडी क्लॉक के हिसाब से व्यायाम करना फायदेमंद है, हालांकि इस पर अभी और शोध की आवश्यकता है। वहीं, यूके की स्वास्थ्य संस्था एनएचएस (NHS) वयस्कों को ये सलाह देती है:
- मांसपेशियों की मजबूती: हफ्ते में कम से कम दो दिन योग, पिलाटेस या वेट्स जैसी एक्सरसाइज करें।
- कार्डियो एक्टिविटी: हफ्ते में 150 मिनट मध्यम तीव्रता (जैसे तेज़ चलना) या 75 मिनट उच्च तीव्रता (जैसे दौड़ना) वाली गतिविधि करें।
- समान वितरण: कसरत को पूरे हफ्ते में समान रूप से बांटें और लंबे समय तक बैठकर बिताने वाले समय को कम करें।
सिर्फ पसीना बहाना काफी नहीं है, बल्कि अपनी शरीर की प्राकृतिक प्रवृत्ति को समझना भी जरूरी है। अगर आप रात में सक्रिय महसूस करते हैं, तो शाम का वर्कआउट आपके दिल और दिमाग दोनों के लिए ‘गेम चेंजर’ साबित हो सकता है।



