नई दिल्ली। घुटनों के दर्द, सूजन और चलने-फिरने में दिक्कत से परेशान ऑस्टियोआर्थराइटिस मरीजों के लिए राहत भरी खबर है। अब यह मान्यता टूट सकती है कि घिस चुके घुटनों का इलाज केवल सर्जरी या घुटना प्रत्यारोपण ही है। स्टैनफोर्ड मेडिसिन के शोधकर्ताओं की नई खोज के अनुसार, सही इलाज की मदद से शरीर में दोबारा कार्टिलेज बन सकता है।
ऑस्टियोआर्थराइटिस में घुटनों के बीच मौजूद कार्टिलेज धीरे-धीरे खत्म हो जाता है। इसके कारण हड्डियां आपस में रगड़ खाने लगती हैं, जिससे तेज दर्द, सूजन और उठते-बैठते समय कट-कट की आवाज आती है। अब तक गंभीर मामलों में घुटना बदलवाना अंतिम विकल्प माना जाता था।
शरीर खुद बना सकता है कार्टिलेज
स्टैनफोर्ड मेडिसिन की रिसर्च में यह सामने आया है कि एक विशेष इंजेक्शन के जरिए शरीर की कोशिकाओं को दोबारा सक्रिय किया जा सकता है, जिससे वे नया कार्टिलेज बनाने लगती हैं। यानी यह इलाज केवल दर्द को दबाने तक सीमित नहीं है, बल्कि घुटनों के भीतर हो रहे नुकसान की भरपाई करने में मदद कर सकता है।
शोधकर्ताओं के मुताबिक, यह इंजेक्शन कार्टिलेज बनाने वाली कोशिकाओं को “रीस्टार्ट” करता है। इससे घुटनों के जोड़ मजबूत हो सकते हैं, घर्षण कम होता है और दर्द में धीरे-धीरे राहत मिलती है।
किन मरीजों को हो सकता है ज्यादा फायदा
विशेषज्ञों का कहना है कि यह तकनीक शुरुआती और मध्यम स्तर के ऑस्टियोआर्थराइटिस मरीजों के लिए ज्यादा फायदेमंद हो सकती है। ऐसे मरीज, जिनके घुटने पूरी तरह खराब नहीं हुए हैं, उनमें यह उपचार घुटना प्रत्यारोपण की जरूरत को लंबे समय तक टाल सकता है।
सावधानी भी जरूरी
हालांकि यह खोज बेहद आशाजनक है, लेकिन डॉक्टरों का कहना है कि यह इलाज अभी शोध के चरण में है। इसके लंबे समय तक होने वाले असर और सुरक्षा को लेकर और अध्ययन जारी हैं। इसलिए मरीजों को बिना डॉक्टर की सलाह के किसी भी नए इंजेक्शन या इलाज को अपनाने से बचना चाहिए।
स्टैनफोर्ड मेडिसिन की इस रिसर्च ने यह उम्मीद जगा दी है कि भविष्य में घुटनों का दर्द झेल रहे लाखों लोगों को बड़ी सर्जरी से राहत मिल सकती है और शरीर खुद नया कार्टिलेज बनाकर जोड़ों को दोबारा मजबूत कर सकेगा।



