बिहार की सियासत में हलचल, विधायकों काे टिकट कटने का डर

बिहार विधानसभा चुनाव से पहले एनडीए और महागठबंधन के विधायकों में टिकट कटने की चिंता सताने लगी है। आंतरिक सर्वे में 20-30 विधायकों का पत्ता कटने की आशंका, पटना में लॉबिंग जोरों पर। क्या यह बदलेगा बिहार की सियासत।

Share This Article:

पटना: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 की तारीखों के ऐलान के साथ ही राजनीतिक दलों में उम्मीदवार चयन की प्रक्रिया ने जोर पकड़ लिया है। सत्ताधारी एनडीए गठबंधन, जिसमें जेडीयू, भाजपा, एलजेपी (रामविलास), एचएएम, और आरएलएम शामिल हैं, ने अपने विधायकों के प्रदर्शन का आकलन शुरू कर दिया है। सूत्रों के अनुसार, भाजपा ने 120 से अधिक सीटों पर सर्वे किया, जिसमें 15-20 मौजूदा विधायकों के टिकट कटने की चर्चा है। कारण मतदाताओं से दूरी, विवाद, या क्षेत्र में कमजोर पकड़। जेडीयू भी अपने कोटे की 100-105 सीटों पर यही रणनीति अपना रही है, जहां कम से कम 10-12 विधायकों का टिकट खतरे में है।सीट बंटवारे का फॉर्मूला भी इस बार तनाव का कारण बना हुआ है।

जीतने वालने प्रत्याशी पर जोर

एनडीए में जेडीयू को 102-104, भाजपा को 100-102, एलजेपी (आरवी) को 20-25, एचएएम को 5-7, और आरएलएम को 3-5 सीटें मिलने की संभावना है। लेकिन कुछ सीटों, जैसे बेगूसराय, मधुबनी, और सीवान, पर सहमति बनाना मुश्किल हो रहा है। छोटे दल अधिक सीटों की मांग कर रहे हैं, जबकि बड़े दल नए चेहरों और जीतने की संभावना वाले प्रत्याशियों पर जोर दे रहे हैं। एक जेडीयू नेता ने कहा, “इस बार जनता बदलाव चाहती है।

जन सुराज ने बढ़ाई चिंता

पुराने चेहरों को दोहराने से नुकसान हो सकता है।”विपक्षी महागठबंधन में भी टिकट को लेकर हलचल है। आरजेडी और कांग्रेस अपने विधायकों के प्रदर्शन की समीक्षा कर रहे हैं, और कम से कम 10-15 विधायकों को बाहर का रास्ता दिखाया जा सकता है। जन सुराज जैसे नए राजनीतिक प्रयोग ने सभी 243 सीटों पर उतरने का ऐलान किया है, जिससे दोनों गठबंधनों के लिए चुनौती बढ़ गई है। टिकट कटने के डर से कई विधायक पटना में डेरा डाले हुए हैं। कुछ अपने समर्थकों के साथ पार्टी दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं, तो कुछ सीधे दिल्ली में हाईकमान से मिलने की कोशिश में हैं। एक विधायक ने हल्के अंदाज में कहा, “सर्वे में नाम नीचे आया तो रातों की नींद उड़ गई, लेकिन अभी लॉबिंग से कुछ हो सकता है।

पिछले चुनाव में कई विधायकों को जनता ने नकार दिया था

वर्ष 2020 के चुनाव में 100 से अधिक मौजूदा विधायकों को जनता ने नकार दिया था, और इस बार भी 30-35% विधायकों पर टिकट कटने का खतरा मंडरा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि टिकट कटने का डर गठबंधनों में आंतरिक तनाव पैदा कर सकता है। कुछ विधायक बागी होकर निर्दलीय लड़ने की धमकी दे रहे हैं, जो एनडीए के 137+ सीटों के लक्ष्य को प्रभावित कर सकता है। दूसरी ओर, पार्टियां युवा और महिला उम्मीदवारों को मौका देकर नया समीकरण बनाने की कोशिश में हैं। 14 नवंबर को नतीजों से पहले यह ‘टिकट की जंग’ बिहार की सियासत को और रोमांचक बना रही है। क्या पुराने चेहरे अपनी साख बचा पाएंगे, या बिहार में नए सियासी सितारे उभरेंगे!

Sanjay Rai

sanjayrai.dj@gmail.com

संजय राय ने बीते 25 साल के प्रोफेशनल कैरियर में स्वास्थ्य, अपराध, शिक्षा, विकास समेत सभी बीट की कवरेज की है। दिल्ली सरकार, विधानसभा की कार्यवाही, भाजपा, कांग्रेस, आप सरीखे राजनीतिक दलों के साथ सामाजिक-सांस्कृतिक व आंदोलनात्मक गतिविधियों को भी कवर किया है। कई सत्रों में संसद की कार्यवाही पर भी कलम चलाई है। फिलवक्त NewG India में बतौर सीनियर स्पेशल काॅरेस्पोंडेंट अपनी जिम्मेदारी निभा रहे हैं।

https://x.com/DjSanjayrai

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

न्यूज़लेटर के लिए सब्सक्राइब करें

कैटेगरीज़

हम वह खबरची हैं, जो खबरों के साथ खबरों की भी खबर रखते हैं। हम NewG हैं, जहां खबर बिना शोरगुल के है। यहां news, without noise लिखी-कही जाती है। विचार हममें भरपूर है, लेकिन विचारधारा से कोई खास इत्तेफाक नहीं। बात हम वही करते हैं, जो सही है। जो सत्य से परामुख है, वह हमें स्वीकार नहीं। यही हमारा अनुशासन है, साधन और साध्य भी। अंगद पांव इसी पर जमा रखे हैं। डिगना एकदम भी गवारा नहीं। ब्रीफ में यही हमारा about us है।

©2025 NewG India. All rights reserved.