नई दिल्ली: Shardiya Navratri 2025 में कन्या पूजन का विशेष स्थान है। अष्टमी या नवमी के दिन नौ कन्याओं और एक बालक की पूजा की जाती है, जो माँ दुर्गा के नौ स्वरूपों का प्रतीक माने जाते हैं। इन बच्चों में सहजता, सरलता और पवित्रता का गुण होता है, जो शिव परमात्मा को प्रिय है। पूजा के बाद इन्हें तिलक लगाकर सात्विक भोजन कराया जाता है, जिससे जीवन में सुख, शांति और समृद्धि आती है। यह पूजा केवल रस्म नहीं, बल्कि इन गुणों को आत्मसात करने का संदेश देती है।
आत्मिक शक्तियों का जागरण
नवरात्रि के नौ दिन आत्मजागरण का अवसर हैं। कन्या पूजन हमें सिखाता है कि हर व्यक्ति में मौजूद गुणों को पहचानकर उन्हें अपनाना चाहिए। माँ दुर्गा को अष्टभुजाधारी कहा जाता है, जो आत्मा की आठ शक्तियों का प्रतीक है। यह सहनशीलता, निर्णय क्षमता, सहयोग, और सही-गलत की पहचान है। ये शक्तियां बाहरी स्रोतों से नहीं, बल्कि हमारी आत्मा में पहले से मौजूद हैं। नवरात्रि हमें इन शक्तियों को जागृत करने का अवसर देती है।
दानवता और दिव्यता का द्वंद्व
आज के युग में लोग नकारात्मकता और कमजोरियों से घिरे हैं। हम अक्सर कहते हैं, मैं यह नहीं कर सकता या मुझमें धैर्य नहीं है। यह सोच हमारी शक्तियों को दबा देती है। नवरात्रि हमें सिखाती है कि दानवता और दिव्यता दोनों हमारे भीतर हैं। जब हम अपनी आत्मिक शक्तियों को जगाते हैं, तो नकारात्मकता नष्ट होती है और जीवन में प्रगति शुरू होती है। आत्मजागरण से हम अज्ञान के अंधेरे से बाहर निकलकर ज्ञान के प्रकाश की ओर बढ़ते हैं।
आत्मज्ञान का मार्ग
नवरात्रि का सच्चा अर्थ है अपनी छिपी शक्तियों को पहचानना। यह समय हमें याद दिलाता है कि हमें अपनी कमजोरियों पर ध्यान देने के बजाय अपनी ताकत को उभारना चाहिए। जब हम अपनी आत्मा के गुणों को अपनाते हैं, तो हम माँ दुर्गा और शिव की कृपा के पात्र बनते हैं। यह आत्मिक जागरण हमें जीवन में संतुलन, शांति और समृद्धि प्रदान करता है।



