नई दिल्ली | हिंदू धर्म में लड्डू गोपाल को सिर्फ भगवान की मूर्ति नहीं, बल्कि घर के एक छोटे बच्चे की तरह माना जाता है। इसलिए उनकी सेवा भी प्रेम और श्रद्धा से की जाती है। सुबह जगाने, भोग लगाने और रात को सुलाने तक के नियम भक्त पूरी श्रद्धा से निभाते हैं। ऐसे में जब परिवार को किसी काम या यात्रा के लिए घर से बाहर जाना पड़ता है, तो अक्सर यह सवाल उठता है कि लड्डू गोपाल को साथ ले जाएं या घर पर ही रखें।
क्या लड्डू गोपाल को साथ ले जाना जरूरी है?
अगर यात्रा छोटी है या उन्हें साथ ले जाना संभव नहीं है, तो उन्हें साथ ले जाना जरूरी नहीं माना जाता। घर से निकलने से पहले उन्हें भोग लगाएं, आरती करें और अपनी यात्रा के बारे में प्रार्थना करें।
मानसिक पूजा भी मानी जाती है शुभ
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यदि लड्डू गोपाल साथ नहीं हैं तो उनकी मानसिक पूजा की जा सकती है। मन में भगवान को स्नान कराने, वस्त्र पहनाने, तिलक लगाने और आरती करने का भाव रखें। सच्ची श्रद्धा से की गई पूजा भी स्वीकार मानी जाती है।
भोजन से पहले करें भोग अर्पित
यात्रा के दौरान जब भी भोजन करें, पहले मन ही मन वही भोजन लड्डू गोपाल को अर्पित करें। इसके बाद स्वयं भोजन ग्रहण करें।
नाम जप करते रहें
सफर के दौरान “राधे-राधे”, “हरे कृष्ण” या “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” जैसे मंत्रों का स्मरण करना शुभ माना जाता है। इससे मन शांत रहता है और भक्ति का भाव बना रहता है।
घर लौटने पर करें नियमित सेवा
यात्रा से वापस आने के बाद स्नान करके लड्डू गोपाल की नियमित सेवा शुरू करें। उन्हें स्नान कराएं, नए वस्त्र पहनाएं, भोग लगाएं और आरती करें। इस तरह यात्रा के दौरान भी उनकी सेवा और भक्ति का क्रम बना रहता है।



