नई दिल्ली: करवा चौथ का पर्व हर वर्ष पति-पत्नी के प्रेम, विश्वास और अटूट बंधन का प्रतीक माना जाता है। यह व्रत महिलाओं द्वारा अपने पति की लंबी उम्र, सुख-शांति और समृद्ध दांपत्य जीवन की कामना के लिए रखा जाता है। इस वर्ष करवा चौथ 10 अक्टूबर 2025, शुक्रवार को मनाया जाएगा। इस दिन सुहागन महिलाएं निर्जला उपवास रखती हैं और शाम को चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद ही व्रत तोड़ती हैं। वे भगवान शिव, माता पार्वती, भगवान गणेश और भगवान कार्तिकेय की पूजा कर व्रत की पूर्णता की प्रार्थना करती हैं।
पंचांग के अनुसार व्रत की तिथि और समय:
- चतुर्थी तिथि प्रारंभ: 9 अक्टूबर 2025, रात 10:54 बजे
- चतुर्थी तिथि समाप्त: 10 अक्टूबर 2025, रात 7:38 बजे
- उदयातिथि अनुसार व्रत का दिन: 10 अक्टूबर (शुक्रवार)
कब निकलेगा चांद
पंचांग के अनुसार दिल्ली में चंद्रोदय रात 8:55 बजे होगा। हालांकि मौसम की वजह से चांद के दिखने में कुछ देर हो सकती है।देश के विभिन्न हिस्सों में चंद्रमा के उदय का समय अलग-अलग होता है, इसलिए स्थानीय पंचांग के अनुसार समय का ध्यान रखना होगा।
करवाचौथ पूजन विधि
शाम के समय लकड़ी की चौकी पर लाल वस्त्र बिछाकर भगवान शिव, माता पार्वती, श्री गणेश और भगवान कार्तिकेय की मूर्ति या चित्र स्थापित करें। मिट्टी या तांबे का करवा, जल से भरा लोटा, और उस पर रखा श्रीफल पूजा में उपयोग होता है। करवे पर रोली से स्वास्तिक बनाएं और कलावा बांधें। धूप, दीप, अक्षत, पुष्प, चंदन और मिठाई अर्पित कर देवताओं का आवाहन करें। इसके बाद महिलाएं करवा चौथ व्रत कथा सुनती या पढ़ती हैं। चंद्रोदय के समय महिलाएं चंद्रमा को अर्घ्य अर्पित करती हैं और पति के हाथों से जल ग्रहण कर व्रत तोड़ती हैं।
ये भी पढ़ें-भारत में कैंपस खोलेंगी ब्रिटेन की 9 यूनिवर्सिटीज, मोदी- स्टार्मर बैठक में डील
चंद्र दर्शन
करवा चौथ पूजा के बाद, जब चंद्रमा उदय होता है, तो महिलाएं छलनी में दीपक रखकर चंद्रमा को निहारती हैं, फिर उसी छलनी से अपने पति का चेहरा देखती हैं। यह परंपरा बहुत प्राचीन है। पुराने समय में, जब बिजली उपलब्ध नहीं थी, तो महिलाएं दीपक की रोशनी में अपने पति का चेहरा देखती थीं। चंद्रमा को अर्घ्य देते समय, कथा सुनते समय पहने गए दुपट्टे को धारण करना शुभ माना जाता है। ऐसा करने से व्रत का पूर्ण लाभ मिलता है और वैवाहिक जीवन में प्रेम और सौभाग्य बढ़ता है।



