नई दिल्ली: अब जल्द ही देश के बच्चों को क्लास 9 से पहले ही सेक्स एजुकेशन पढ़ाई जा सकती है। सुप्रीम कोर्ट (SC) ने बुधवार को कहा कि बच्चों को किशोरावस्था (Puberty) से पहले ही इस विषय में जानकारी और समझ दी जानी चाहिए ताकि वे बदलावों और ज़रूरी सावधानियों को सही समय पर समझ सकें। इससे बच्चो को शारीरिक बदलावो के बारे में भी जानकारी दी जा सकेगी।
सुप्रीम कोर्ट (SC) का बयान
बुधवार को जस्टिस संजय कुमार और जस्टिस आलोक अराधे की बेंच ने कहा, हमारा मानना है कि बच्चों को कम उम्र से ही सेक्स एजुकेशन दी जानी चाहिए, न कि कक्षा 9 से शुरू की जाए। साथ ही इन्होने यह भी कहा की संबंधित अधिकारी इस दिशा में कदम उठाएं ताकि बच्चों को यह समझ हो कि युवावस्था आने पर क्या बदलाव होते हैं और उन्हें किस तरह की सावधानियां रखनी चाहिए।
क्या हैं पूरा मामला?
दरअसल यह टिप्पणी कोर्ट ने एक 15 वर्षीय नाबालिग आरोपी के केस की सुनवाई के दौरान दी। लड़के पर IPC की गंभीर धारा 376 (बलात्कार), 506 (धमकी) और POCSO एक्ट की धारा 6 के तहत केस दर्ज था। अगस्त 2024 में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आरोपी की ज़मानत याचिका खारिज कर दी थी, जिसके बाद यह पूरा मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा।
SC का आदेश
सुप्रीम कोर्ट ने सितंबर 2025 में आरोपी की नाबालिग उम्र को देखते हुए उसे ज़मानत देने का आदेश दिया था और साथ ही उत्तर प्रदेश सरकार से यह जानकारी भी मांगी थी कि राज्य के स्कूलों में सेक्स एजुकेशन किस तरह लागू की जा रही है।जिस पर राज्य सरकार ने जवाब में बताया कि क्लास 9 से 12 तक के छात्रों के लिए NCERT निर्देशों के मुताबिक एक पाठ्यक्रम बनाया गया है।
कोर्ट की सिफारिश
राज्य के जवाब के बाद कोर्ट ने कहा कि सिर्फ क्लास 9 से शुरू करना पर्याप्त नहीं है। बच्चों को पहले ही इस विषय के बारे में जागरूक किया जाना चाहिए ताकि वे बदलावों को समझें और खुद को सुरक्षित रख सकें।
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कोर्ट का अंतिम आदेश
सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट का आदेश रद्द करते हुए पहले दिया गया ज़मानत आदेश स्थायी कर दिया और कहा कि यह तब तक प्रभाव में रहेगा जब तक मुकदमे की सुनवाई पूरी नहीं हो जाती। इसके अलावा कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यह बयान सिर्फ जमानत के संदर्भ में है, केस के मेरिट पर नहीं।
निष्कर्ष
सुप्रीम कोर्ट की यह टिप्पणी बच्चों में समय पर जागरूकता और सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में एक बड़ा और अहम कदम है। किशोरावस्था से पहले ही सेक्स एजुकेशन देने से बच्चों को न केवल शारीरिक बदलावों की समझ मिलेगी, बल्कि वे अधिक सुरक्षित और जिम्मेदार व्यवहार को अपनाना भी सीखेंगे। कोर्ट का यह कदम समाज में यौन शिक्षा को सकारात्मक और आवश्यक हिस्सा बनाने की ओर इशारा करता है, जो बच्चों के उज्ज्वल भविष्य के लिए बहुत जरुरी हैं।



