नई दिल्ली: हिंदू धर्म में गणेश चतुर्थी का पर्व भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी से शुरू होता है, जो इस बार 27 अगस्त 2025 को पड़ेगा। यह दस दिवसीय उत्सव भगवान गणेश के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है, जो बुद्धि, समृद्धि और विघ्नहर्ता के प्रतीक हैं। इस दिन घरों, मंदिरों और पंडालों में गणपति की प्रतिमा स्थापित की जाती है, और अनंत चतुर्दशी (8 सितंबर) को उनकी विदाई होती है। पहला दिन विशेष होता है, क्योंकि यह बप्पा के आगमन का दिन है। इसलिए, इस दिन कुछ खास कार्य करने और कुछ बातों से बचने की सलाह दी जाती है ताकि पूजा का पूरा फल मिले।
पहले दिन क्या करें
- 27 अगस्त को सुबह जल्दी उठकर पूजा स्थल को स्वच्छ करें।
- पूजा क्षेत्र को फूलों, रंगोली और दीपों से सजाएं।
- गणेश जी की मूर्ति को शुभ मुहूर्त (सुबह 11:05 से दोपहर 1:40) में स्थापित करें।
- मूर्ति स्थापना से पहले संकल्प लें कि आप कितने दिनों (1, 3, 5, 7 या 10) तक बप्पा की पूजा करेंगे। संकल्प के बाद ही विसर्जन करें।
- गणेश जी के पास एक कलश स्थापित करें, जिसमें गंगाजल, आम के पत्ते, सुपारी, सिक्का और कुमकुम डालें। ऊपर नारियल रखें।
- गणेश जी को मोदक, लड्डू और फूल अर्पित करें।
- उनकी आरती करें और मंत्रों का जाप करें, जैसे “ॐ गं गणपतये नमः”।
- इस दिन परिवार के साथ मिलकर भक्ति भाव से पूजा करें और सकारात्मक माहौल बनाए रखें।
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इन बातों से बचें
- गणेश चतुर्थी के पहले दिन कुछ सावधानियां बरतना जरूरी है।
- इस दिन चंद्रमा को देखने से बचें, क्योंकि मान्यता है कि इससे मिथ्या दोष लग सकता है।
- नकारात्मक विचार, वाद-विवाद या झगड़े से दूर रहें, क्योंकि यह पवित्र दिन शांति और भक्ति का है।
- गणेश जी को तुलसी पत्र अर्पित न करें, क्योंकि शास्त्रों में यह निषिद्ध है।
- इसके अलावा, मूर्ति स्थापना के बाद बप्पा को अकेला न छोड़ें। उनकी सेवा में नियमितता रखें।
- गणेश चतुर्थी का पहला दिन भक्ति और श्रद्धा का प्रतीक है। सही विधि-विधान और सावधानियों के साथ पूजा करने से बप्पा की कृपा प्राप्त होती है। इस पर्व को उत्साह और पवित्रता के साथ मनाएं।



