पटना: राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के उपराष्ट्रपति पद के उम्मीदवार राधाकृष्णन को जनता दल यूनाइटेड (JDU) का भी समर्थन मिल गया है। जेडीयू के अध्यक्ष और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सोमवार को ट्वीट कर इसकी घोषणा की। उन्होंने राधाकृष्णन को अपनी शुभकामनाएं भी दीं।
घटक दलों का मिला साथ
भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने जबसे सीपी राधाकृष्णन को उपराष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनाया है, उन्हें अपने सभी सहयोगी दलों का समर्थन मिल रहा है। जेडीयू का यह फैसला भी इसी कड़ी में एक महत्वपूर्ण कदम है। जेडीयू के अलावा, अन्य सहयोगी दल जैसे चिराग पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास), जीतनराम मांझी की हिंदुस्तान आवाम मोर्चा और उपेंद्र कुशवाहा की राष्ट्रीय लोक मोर्चा भी रविवार को ही राधाकृष्णन को समर्थन देने का ऐलान कर चुके हैं।
कौन हैं सीपी राधाकृष्णन
सीपी राधाकृष्णन की पृष्ठभूमि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़ी है। वह तमिलनाडु में भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष भी रह चुके हैं। वर्तमान में वह महाराष्ट्र के राज्यपाल हैं। इससे पहले वह तेलंगाना, झारखंड के राज्यपाल और पुद्दुचेरी के उपराज्यपाल के रूप में भी कार्य कर चुके हैं।
उपराष्ट्रपति चुनाव की प्रक्रिया
उपराष्ट्रपति पद के चुनाव के लिए 9 सितंबर को मतदान होगा। यह चुनाव जगदीप धनखड़ के उपराष्ट्रपति पद से इस्तीफे के बाद हो रहे हैं। अभी तक विपक्ष की ओर से किसी भी उम्मीदवार का ऐलान नहीं किया गया है। अगर सीपी राधाकृष्णन यह चुनाव जीतते हैं, तो वह भारत के 15वें उपराष्ट्रपति होंगे।
राजनीतिक समीकरण और गठबंधन की एकता
उपराष्ट्रपति चुनाव में एनडीए (NDA) अपने उम्मीदवार को मैदान में उतारती है। ऐसे में गठबंधन के सभी दलों से उम्मीद की जाती है कि वे मिलकर उस उम्मीदवार का समर्थन करें।जेडीयू (JDU), जो बिहार में भाजपा की प्रमुख सहयोगी है, का समर्थन मिलने से एनडीए की एकजुटता का संदेश जाता है। यह दिखाता है कि गठबंधन के भीतर तालमेल बना हुआ है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा सार्वजनिक रूप से ट्वीट कर समर्थन की घोषणा करना, इस बात को और पुख्ता करता है कि जेडीयू भाजपा के केंद्रीय फैसलों में साथ खड़ी है।
उप राष्ट्रपति पद की महत्ता
उराष्ट्रपति का पद देश का दूसरा सबसे बड़ा संवैधानिक पद होता है। उप राष्ट्रपति राज्यसभा के सभापति भी होते हैं, इसलिए इस पद पर एक ऐसा व्यक्ति होना महत्वपूर्ण है जिस पर सत्ता पक्ष का भरोसा हो। जगदीप धनखड़ के उप राष्ट्रपति पद से हटने के बाद यह पद रिक्त हो गया था, जिसके बाद चुनाव की प्रक्रिया शुरू हुई। यह खबर सिर्फ एक राजनीतिक समर्थन की घोषणा नहीं है, बल्कि यह एनडीए के भीतर की एकता, भाजपा की रणनीतिक सोच और संवैधानिक पदों के लिए होने वाली राजनीतिक कवायद का एक हिस्सा है।



