भागलपुर: भागलपुर विधानसभा बिहार की हॉट सीट मानी जाती है। यह भाजपा का मजबूत गढ़ रहा है। लेकिन पिछले कुछ चुनावों में भाजपा को यहां हार का सामना करना पड़ा है। आजादी के बाद से भागलपुर विधानसभा में कांग्रेस, जनसंघ, जनता पार्टी, कांग्रेस और भाजपा के प्रत्याशियों ने इस सीट पर जीत हासिल की है।
भाजपा के कद्दावर नेता अश्विनी कुमार चौबे पांच बार इस सीट का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। अश्विनी चौबे सांसद बने तो सीट पर हुए उपचुनाव के बाद से कांग्रेस का इस सीट पर कब्जा है। जबकि पहले, 1995 से 2014 तक इस सीट का प्रतिनिधित्व करने वाले अश्विनी चौबे नीतीश सरकार में अलग-अलग विभागों के मंत्री भी बने थे।
भाजपा सांसद बने विधायक जी, हार रही भाजपा
तत्कालीन विधायक अश्विनी चौबे बक्सर से सांसद बने, तो 2014 में भागलपुर विधानसभा सीट पर उपचुनाव हुआ। इस चुनाव में भाजपा के प्रत्याशी नभय कुमार चौधरी थे। कांग्रेस के प्रत्याशी अजीत शर्मा बने। अजीत शर्मा ने इस उपचुनाव में भाजपा प्रत्याशी को बड़े अंतराल से हराया। इसके बाद भागलपुर सीट पर लंबे अरसे बाद कांग्रेस की वापसी हुई।
भागलपुर विधानसभा सीट पर 2015 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस से अजीत शर्मा तो भाजपा की ओर से प्रत्याशी बनाए गए अश्विनी चौबे के पुत्र अर्जित चौबे के बीच सीधी टक्कर हुई। इस चुनाव में भाजपा की हार हुई और अजीत शर्मा फिर से विधायक बने। इनको इस चुनाव में 70,514 वोट मिले थे, जबकि भाजपा के अर्जित चौबे को 59,856 वोटों से संतोष करना पड़ा था। इस चुनाव में भाजपा के सक्रिय नेता रहे विजय साह ने पार्टी से बगावत करके निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर चुनाव लड़ा था। उनको 15,212 वोट मिले थे। चर्चा रही कि विजय शाह को मिले वोटों ने भी भाजपा का नुकसान किया। विजय शाह अब फिर से भाजपा में वापस लौटे हैं।
चिराग ने प्रत्याशी उतारा, पिछले चुनाव में कांग्रेस से हारी भाजपा
विधानसभा चुनाव 2020 में भाजपा ने अर्जित की जगह तत्कालीन जिलाध्यक्ष रोहित पांडेय को प्रत्याशी बनाया। इसमें रोहित पांडेय बेहद कम अंतराल से चुनाव हार गए। लगातार तीसरी बार अजीत शर्मा की जीत हुई। अब तक कांग्रेस का इस सीट पर कब्जा है। अजीत शर्मा को 65,502 तो रोहित पांडेय को 64,389 वोट मिले थे। इस चुनाव में चिराग पासवान की पार्टी लोजपा ने पूर्व डिप्टी मेयर राजेश वर्मा (वर्तमान खगड़िया सांसद) को लोजपा (रामविलास) से मैदान में उतारा था। राजेश वर्मा को 20,523 वोट मिले। भाजपा की हार में लोजपा (रामविलास) की ओर से प्रत्याशी देना भी एक वजह माना गया था।
मुस्लिम वोटरों की भी रहती बड़ी भूमिका
भागलपुर विधानसभा में मुस्लिम वोटरों की भी संख्या सबसे अधिक है। अपनी इसी मजबूती से यह इस सीट पर हार-जीत तय करते हैं। उसके बाद वैश्य मतदाताओं की संख्या है। ब्राह्मण, राजपूत, भूमिहार, दलित, कुशवाहा, गंगौता, यादव समेत अन्य जातियों की भी हिस्सेदारी रहती है।
इस बार का माहौल यह है
भागलपुर विधानसभा सीट पर एनडीए में जदयू और भाजपा दोनों की नजर इस बार है। जदयू ने भी खुलकर दावेदारी ठोकी है। हालांकि, सीट शेयरिंग में भागलपुर सीट भाजपा के खाते में रहने की अधिक संभावना है। भाजपा यहां पूरी तरह एक्टिव हो चुकी है। इस बार भाजपा किसे टिकट देगी, इस पर संशय बना हुआ है। भाजपा के कुछ सीनियर नेता भी यहां से भाग्य आजमाने के चक्कर में सक्रिय दिख रहे हैं।
उधर, महागठबंधन की तरफ से लगातार तीन बार जीतने वाली कांग्रेस के खाते में सीट जाने की संभावना प्रबल है। कांग्रेस विधायक अजीत शर्मा इस बार लोकसभा चुनाव में महागठबंधन के उम्मीदवार थे। उनकी हार हुई तो राजद की नजर भी इस सीट पर है। राजद ने भागलपुर का लोकसभा चुनाव 2014 में जीता था। प्रचंड मोदी लहर में मिली जीत से राजद यहां लगातार उम्मीद बनाए रहती है।
सियासी फिजा में तैर रहे यह मुद्दे
इस बार की लड़ाई भी कई मुद्दों को लेकर दिलचस्प हो जाएगी। मसलन, एयरपोर्ट, बुनकर कल्याण, ट्रैफिक व पेयजल से जुड़ी समस्याएं। साथ ही जातीय समीकरण भी इस सीट पर हार और जीत को तय करेगी। कांग्रेस से अजित शर्मा, भाजपा के रोहित पांडे और अर्जित चौबे, इसके अलावा जदयू–राजद के दावेदार और अन्य संभावित उम्मीदवारों के बीच मुकाबले की संभावना ने इस सीट पर सियासी लड़ाई को दिलचस्प बना दिया है। हालांकि, औपचारिक ऐलान के बाद ही यह साफ हो पाएगा कि इस बार इस किन-किन उम्मीदवारों के बीच टक्कर होगी।
2020 चुनाव का नतीजा
पिछले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के अजीत शर्मा की जीत हुई थी। भाजपा के प्रत्याशी रोहित पांडे को 1113 वोट से हार का सामना करना पड़ा था। अजित शर्मा को 65,502 वोट यानी 40.52 % वोट, तो रोहित पांडे को 64,389 वोट मिला था यानी 39.83 % वोट मिले थे। वहीं, लोजपा के प्रत्याशी राजेश वर्मा को 20,523 वोट मिले थे, यानी 12.60 परसेंट वोट मिले थे।
पिछले कुछ चुनावों के परिणाम
भागलपुर विधानसभा बीते कुछ चुनावों में 2010 विधानसभा चुनाव में भाजपा से अश्विनी चौबे प्रत्याशी थे। उन्होंने निकटतम प्रतिद्वंद्वी कांग्रेस प्रत्याशी अजीत शर्मा को हराया था। अश्विनी चौबे को 49 हजार 164 वोट मिले थे, जबकि अजीत शर्मा को 38 हजार 104 वोट मिले थे। 2010 के चुनाव में अश्विनी चौबे 11 हजार 60 वोटों से विजयी हुए थे।
2014 में उपचुनाव
2014 में यहां उपचुनाव हुआ, जिसमें कांग्रेस प्रत्याशी अजीत शर्मा को 63 हजार 753 वोट मिले थे। वहीं, निकटतम प्रतिद्वंद्वी भाजपा के नभय कुमार चौधरी को 46 हजार 524 वोट मिले थे। इस उपचुनाव में अजीत शर्मा 17 हजार 229 वोटों से विजयी हुए थे।
2015 विधानसभा चुनाव
2015 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी अजीत शर्मा 70 हजार 514 वोट मिले थे। वहीं, उनके निकटतम प्रतिद्वंद्वी भाजपा प्रत्याशी अर्जित चौबे को 59 हजार 856 वोट मिले थे. उस चुनाव में अजीत शर्मा 10 हजार 658 मतों से विजयी हुए थे।
2020 विधानसभा चुनाव
पिछले विधानसभा चुनाव यानी 2020 में कांग्रेस के अजित शर्मा को 65 हजार 502 वोट मिले थे। निकटतम प्रतिद्वंद्वी भाजपा प्रत्याशी रोहित पांडेय को 64 हजार 389 वोट मिले थे। इस चुनाव में अजीत शर्मा 1 हजार 113 मतों से विजयी हुए थे।
भागलपुर विधानसभा में प्रमुख दावेदार और पार्टियां
कांग्रेस से प्रत्याशी अजीत शर्मा की दावेदारी हो सकती है। वहीं, भाजपा से पूर्व प्रत्याशी रोहित पांडे या अर्जित शाश्वत चौबे की दावेदारी हो सकती है। पूर्व मंत्री शाहनवाज हुसैन भी दावेदारी कर सकते हैं। वहीं, कई नेता भी टिकट की आस में है। जनसुराज से प्रोफेसर देवज्योति मुखर्जी व विशाल आनंद दावेदार हो सकते हैं।
जातीय समीकरण
भागलपुर विधानसभा सीट पर मुस्लिम, यादव और ब्राह्मण वोटर्स जीत-हार तय करते आए हैं। इन जातियों की भूमिका यहां हमेशा से अहम रही है। इस क्षेत्र में राजपूत की संख्या 12 हजार है। कायस्थ 12 हजार है। ब्राह्मण 45 हजार है। यादव 10 हजार है। मुस्लिम 85 हजार, भूमिहार 5 हजार, वैश्य-1 लाख 25 हजार 295, तो वहीं एससी व अति पिछड़ा वोटर्स की संख्या 23 हजार 500 है।
वोटर्स का आंकड़ा
3 लाख 52 हजार 624 वोटर्स
पुरुष – 178618 (53.2%)
महिला – 173978 (46. 6 %)
ट्रांसजेंडर – 28
(नोट: 2020 के आंकड़े अनुसार)



